12 फरवरी को देशभर में ट्रेड यूनियनों और किसानों की संयुक्त हड़ताल।
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12 फरवरी ट्रेड यूनियन स्ट्राइक: को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। सेंट्रल ट्रेड यूनियनों (CTUs) की ओर से 12 फरवरी को बुलाई गई राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है। इस संयुक्त आंदोलन का उद्देश्य केंद्र सरकार की कई नीतियों के खिलाफ संगठित विरोध दर्ज कराना है।
देशव्यापी हड़ताल के आह्वान ने मजदूर संगठनों और किसान संगठनों को एक साझा मंच पर ला खड़ा किया है। निजीकरण, ठेका प्रथा, चार लेबर कोड और बिजली संशोधन बिल 2025 जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी है।
12 फरवरी ट्रेड यूनियन स्ट्राइक: क्यों हो रही है देशव्यापी हड़ताल
12 फरवरी ट्रेड यूनियन स्ट्राइक का मुख्य कारण केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों को बताया जा रहा है। सेंट्रल ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि मौजूदा नीतियां मजदूरों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं।
हड़ताल में निम्न मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा:
संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ किया है कि ये मुद्दे केवल मजदूरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सीधे प्रभावित करते हैं।
12 फरवरी को देशभर में ट्रेड यूनियनों और किसानों की संयुक्त हड़ताल।
संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन और रणनीति
संयुक्त किसान मोर्चा ने 12 फरवरी ट्रेड यूनियन स्ट्राइक को “किसान-मजदूर एकता” का प्रतीक बताया है। SKM के अनुसार, देशभर में किसान, खेतिहर मजदूर और औद्योगिक श्रमिक एक साथ सड़कों पर उतरेंगे।
कई राज्यों में संयुक्त धरना-प्रदर्शन, रैलियां और चक्का जाम जैसी गतिविधियों की तैयारी की जा रही है। पंजाब रोडवेज ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC), बिजली कर्मचारी संगठन और अन्य श्रमिक यूनियनें भी इस हड़ताल में शामिल होंगी।
किसानों और खेतिहर मजदूरों की बड़ी भागीदारी की उम्मीद
12 फरवरी ट्रेड यूनियन स्ट्राइक में किसानों और खेतिहर मजदूरों की भागीदारी को अहम माना जा रहा है। SKM का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में पहले से ही हड़ताल को लेकर बैठकों और सभाओं का दौर चल रहा है।
खासकर हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसान संगठनों ने सक्रिय तैयारी शुरू कर दी है। इन राज्यों में कृषि और बागवानी से जुड़े मुद्दे आंदोलन का केंद्र रहेंगे।
हिमाचल में सेब किसानों का दिल्ली मार्च प्लान
हिमाचल प्रदेश में सेब किसानों ने 12 फरवरी को प्रस्तावित देशव्यापी किसान हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है। इसके साथ ही दिल्ली मार्च की तैयारी भी तेज कर दी गई है।
हिमाचल प्रदेश एप्पल ग्रोअर्स एसोसिएशन (HPAGA) की जुब्बल और रोहड़ू में हुई ब्लॉक-लेवल बैठकों में यह फैसला लिया गया कि गांव स्तर पर किसानों को संगठित किया जाएगा।
व्यापार समझौतों पर किसानों की नाराजगी
किसान संगठनों का आरोप है कि भारत-अमेरिका और अन्य मुक्त व्यापार समझौतों के तहत आयात शुल्क में की गई कटौती से हिमाचल की सेब आधारित अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है।
किसानों का कहना है कि सस्ते विदेशी सेब बाजार में आने से स्थानीय बागवान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।
वरिष्ठ किसान नेता राकेश सिंघा की चेतावनी
पूर्व विधायक और वरिष्ठ किसान नेता राकेश सिंघा ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा,
“अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपीय देशों से आने वाले सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करने से हमारे किसानों पर भारी संकट आएगा।”
सिंघा ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेब उत्पादकों को बड़े पैमाने पर सब्सिडी और कॉर्पोरेट सपोर्ट मिलता है, जबकि भारतीय किसानों को वैसा संरक्षण नहीं मिलता।
उनके अनुसार,
“यह नीति एक तूफान की तरह है, जो हमारे सेब के बागानों को तबाह कर सकती है।”
12 फरवरी को देशभर में ट्रेड यूनियनों और किसानों की संयुक्त हड़ताल।
सरकार की ओर से क्या कहा गया
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पहले ही यह आश्वासन दिया है कि भारतीय सेब उत्पादकों के हितों की रक्षा की जाएगी। हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि केवल आश्वासन काफी नहीं हैं, ठोस नीति फैसले जरूरी हैं।
12 फरवरी ट्रेड यूनियन स्ट्राइक का असर परिवहन, बिजली, सार्वजनिक सेवाओं और औद्योगिक उत्पादन पर पड़ सकता है। कई राज्यों में स्कूल, बैंकिंग सेवाएं और सरकारी कार्यालय भी प्रभावित हो सकते हैं।
ट्रेड यूनियनों का दावा है कि यह हड़ताल सरकार तक मजदूरों और किसानों की आवाज पहुंचाने के लिए जरूरी है।
निष्कर्ष / Impact
12 फरवरी ट्रेड यूनियन स्ट्राइक सिर्फ एक औद्योगिक हड़ताल नहीं, बल्कि किसान और मजदूर वर्ग की साझा लड़ाई के रूप में उभर रही है। संयुक्त किसान मोर्चा के समर्थन से यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस हड़ताल के बाद किसी तरह की बातचीत की पहल होती है।