मिडिल ईस्ट: में छिड़ी भीषण जंग ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे खाड़ी देशों के कई हिस्सों में अफरातफरी मच गई। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत में प्रधानमंत्री आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक बुलाई गई।
बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री Narendra Modi ने की। बैठक में पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा, एयरस्पेस बंद होने से उत्पन्न संकट और संभावित आर्थिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हुई।

CCS की तीन घंटे चली हाई-लेवल बैठक
करीब तीन घंटे चली बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मौजूद रहे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में मुख्य रूप से निम्न मुद्दों पर विचार किया गया:
- ईरान और इजराइल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
- मिडिल ईस्ट एयरस्पेस बंद होने से यात्रा और व्यापार पर असर
- तेल आपूर्ति और वैश्विक कीमतों में संभावित उछाल

सरकार ने सभी भारतीय दूतावासों को हाई अलर्ट पर रहने और भारतीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
UAE को भारत का स्पष्ट समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने UAE पर हुए हमलों की निंदा की और कहा कि भारत इस कठिन समय में उसके साथ खड़ा है।
UAE में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। अबूधाबी के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग ने सभी होटलों को निर्देश दिया है कि यात्रा प्रतिबंधों के कारण फंसे यात्रियों का खर्च सरकार वहन करेगी।
नेतन्याहू से संघर्ष समाप्त करने की अपील
प्रधानमंत्री ने इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से भी फोन पर बातचीत की। सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है और संघर्ष जल्द समाप्त होना चाहिए।

भारत ने एक बार फिर दोहराया कि वह कूटनीतिक समाधान और वार्ता के जरिए तनाव कम करने का पक्षधर है।
खामेनेई की मौत के बाद उबाल
ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की इजराइली हमलों में मौत की खबर के बाद कई देशों में प्रदर्शन तेज हो गए। भारत के श्रीनगर, लखनऊ, पटना और हैदराबाद समेत 15 से ज्यादा शहरों में विरोध मार्च निकाले गए।
नई दिल्ली में अंजुमन-ए-हैदरी के सदस्यों ने कैंडल मार्च निकाला और अमेरिका-इजराइल के खिलाफ नारेबाजी की। पाकिस्तान के लाहौर और इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास के बाहर हिंसक झड़पें हुईं।
स्थिति को देखते हुए दिल्ली और अन्य संवेदनशील शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, खासकर डिप्लोमैटिक मिशनों और शिया बहुल इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
350 से ज्यादा फ्लाइट रद्द, हजारों यात्री फंसे
मिडिल ईस्ट एयरस्पेस लगभग बंद होने के कारण भारत में रविवार को 350 से ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गईं। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट, मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कई फ्लाइट्स कैंसिल हुईं।
कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (CIAL) ने जानकारी दी कि खाड़ी देशों की कम से कम 16 उड़ानें रद्द की गईं। हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे रहे।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे एयरलाइंस से लगातार संपर्क में रहें और अपनी उड़ान की स्थिति जांचते रहें।

90 लाख भारतीयों पर असर
आंकड़ों के अनुसार:
- ईरान में करीब 10,000 भारतीय रहते हैं
- इजराइल में लगभग 40,000 भारतीय नागरिक हैं
- पूरे गल्फ और वेस्ट एशिया में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं
भारत सरकार ने सभी भारतीय दूतावासों को सामुदायिक नेताओं से संपर्क बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर आपात निकासी योजना तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
तेल बाजार में हलचल, ओपेक का बड़ा फैसला
जंग के बीच ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) और सहयोगी देशों ने तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। सऊदी अरब, रूस, इराक, UAE, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान सहित आठ देशों ने अप्रैल से उत्पादन 206,000 बैरल प्रति दिन बढ़ाने की घोषणा की।

होर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन करीब 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो वैश्विक आपूर्ति का लगभग 20% है। इस मार्ग में किसी भी रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग का बयान
अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने मिलकर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है। बयान में कहा गया कि ये हमले संप्रभु देशों की सीमाओं का उल्लंघन हैं और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
भारत में सुरक्षा कड़ी
राजधानी दिल्ली समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। डिप्लोमैटिक एन्क्लेव, दूतावासों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। खुफिया एजेंसियां भी हालात पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
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आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर व्यापक असर पड़ सकता है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
भारत ने फिलहाल संतुलित रुख अपनाते हुए शांति और कूटनीतिक समाधान की वकालत की है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या वैश्विक दबाव के चलते संघर्ष विराम संभव हो पाता है या स्थिति और बिगड़ती है।
निष्कर्ष:
ईरान-इजराइल युद्ध ने वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन को झकझोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई CCS बैठक इस बात का संकेत है कि भारत स्थिति को गंभीरता से ले रहा है। 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय यात्रा संकट—ये तीन बड़े मुद्दे फिलहाल भारत के सामने हैं।
अब पूरी दुनिया की नजर इस पर है कि क्या कूटनीति हथियारों पर भारी पड़ेगी या पश्चिम एशिया एक लंबे संघर्ष की ओर बढ़ रहा है।

