हिंद महासागर: में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा माहौल को अचानक तनावपूर्ण बना दिया है। भारत के नौसैनिक कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे ईरान के फ्रिगेट युद्धपोत IRIS Dena को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुआ बताया जा रहा है।
इस घटना के बाद ईरान और अमेरिका के बीच पहले से मौजूद तनाव और गहरा गया है। ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। वहीं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना मध्य पूर्व और हिंद महासागर क्षेत्र में बड़े भू-राजनीतिक संकट का कारण बन सकती है।
Thick smoke rises from burning Iranian warships — reports pic.twitter.com/JY2CSegFKi
— RT (@RT_com) March 5, 2026
अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुआ हमला
मिली जानकारी के अनुसार यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र के पास हुआ, जहां ईरान का फ्रिगेट IRIS Dena सामान्य गति से अपने देश की ओर लौट रहा था। यह जहाज भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम में भाग लेकर वापस जा रहा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की एक परमाणु पनडुब्बी ने अचानक इस जहाज पर टॉरपीडो दागा। टॉरपीडो सीधे जहाज के पिछले हिस्से में लगा, जिसके बाद जोरदार विस्फोट हुआ और जहाज तेजी से समुद्र में डूबने लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों और ड्रोन फुटेज में देखा गया कि समुद्र शांत था और जहाज सामान्य रूप से आगे बढ़ रहा था। तभी अचानक तेज धमाका हुआ और जहाज के आसपास आग, धुआं और पानी का विशाल गुबार उठ गया।

भारी जनहानि की आशंका
इस युद्धपोत पर लगभग 130 नाविक सवार बताए जा रहे थे। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार हमले में करीब 80 नाविकों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है।
श्रीलंका की नौसेना ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और अब तक लगभग 30 नाविकों को समुद्र से बचाया गया है। बचाए गए नाविकों को श्रीलंका के गॉल शहर स्थित करापिटिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है और समुद्र में लापता नाविकों की तलाश की जा रही है।
ईरान का तीखा बयान
इस घटना के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरानी युद्धपोत पर हमला करना समुद्री कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।
उन्होंने कहा—
“यह हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ समुद्र में किया गया बड़ा अपराध है। हमारा जहाज भारत के कार्यक्रम से लौट रहा था और उस पर हमला करना बेहद गैरजिम्मेदाराना कदम है।”
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि इस कार्रवाई के गंभीर परिणाम होंगे और इसका जवाब जरूर दिया जाएगा।
भारत के नौसैनिक कार्यक्रम से लौट रहा था जहाज
IRIS Dena हाल ही में भारत में आयोजित बड़े अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम का हिस्सा बना था। यह कार्यक्रम 18 फरवरी से 25 फरवरी तक बंगाल की खाड़ी में आयोजित MILAN 2026 और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का हिस्सा था।
इस कार्यक्रम में दुनिया के कई देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था। भारत की मेजबानी में हुए इस आयोजन का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, सहयोग और सामरिक साझेदारी को मजबूत करना था।
ईरान का यह जहाज विशाखापट्टनम से कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अपने देश लौट रहा था। इसी दौरान हिंद महासागर में यह घटना हुई।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार?
रिपोर्टों के अनुसार यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार अमेरिका ने टॉरपीडो के जरिए किसी दुश्मन देश के युद्धपोत को डुबोया है।
हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से अभी तक इस घटना पर आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन ड्रोन फुटेज के सामने आने के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
वैश्विक राजनीति में बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना वैश्विक राजनीति में नया मोड़ ला सकती है। पहले से ही मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है।
28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद से हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। उन हमलों में ईरान के कई बड़े सैन्य और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाया गया था।
इन घटनाओं के बाद ईरान ने कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे।
“100 Hours” of Operation Epic Fury. pic.twitter.com/XW5ZnRAJJL
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ईरान-इजराइल टकराव की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ महीनों में ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया है। दोनों देशों के बीच छिपा हुआ संघर्ष अब खुलकर सामने आने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त रणनीति के कारण ईरान खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहा है। यही कारण है कि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
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हिंद महासागर में सुरक्षा पर सवाल
इस घटना के बाद हिंद महासागर की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। यह समुद्री क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
दुनिया का लगभग 40 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी क्षेत्र से गुजरता है। ऐसे में किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
भारत सहित कई देशों की नजर अब इस पूरे घटनाक्रम पर है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद कई देशों ने चिंता जताई है। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई खतरनाक मिसाल बन सकती है।
संयुक्त राष्ट्र और कई वैश्विक संगठनों से उम्मीद की जा रही है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत करने की कोशिश करेंगे।
क्या होगा आगे?
अभी तक अमेरिका की ओर से इस हमले की पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है। लेकिन यदि यह घटना आधिकारिक रूप से सही साबित होती है तो यह अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव की शुरुआत भी बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज होंगी।
निष्कर्ष
हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena पर हुए हमले ने वैश्विक राजनीति को एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर ला खड़ा किया है। भारत के नौसैनिक कार्यक्रम से लौट रहे जहाज पर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हमला होना बेहद गंभीर घटना मानी जा रही है।
यदि इस मामले में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान इस घटना को लेकर क्या कदम उठाते हैं।

