पश्चिम बंगाल: में राष्ट्रपति के दौरे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Droupadi Murmu की अगवानी के तय प्रोटोकॉल में कथित चूक को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय गृह सचिव Govind Mohan ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
अधिकारियों के अनुसार पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस मामले पर अपनी रिपोर्ट आज शाम 5 बजे तक गृह मंत्रालय को सौंपें। यह मामला राष्ट्रपति के 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के दौरे के दौरान हुए कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है।
कार्यक्रम स्थल बदलने से शुरू हुआ विवाद
दरअसल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। यह कार्यक्रम मूल रूप से Siliguri के बिधाननगर क्षेत्र में आयोजित होना तय था।
हालांकि सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल को बदलकर Bagdogra एयरपोर्ट के पास गोपालपुर क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया।
कार्यक्रम स्थल बदलने के बाद राष्ट्रपति ने इस पर नाराजगी भी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार आदिवासी समुदाय के हितों को लेकर गंभीर नहीं है।

राष्ट्रपति ने जताई नाराजगी
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अगर कार्यक्रम बिधाननगर में आयोजित किया जाता तो अधिक लोग इसमें शामिल हो सकते थे। उन्होंने कहा कि छोटे स्थल के कारण कई लोग कार्यक्रम में भाग नहीं ले सके।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने बिधाननगर में कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी।
उन्होंने कहा,
“ऐसा लगता है कि कार्यक्रम ऐसी जगह रखा गया जहां लोगों का पहुंचना मुश्किल था। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोग इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को होने नहीं देना चाहते थे।”
प्रोटोकॉल को लेकर भी उठा सवाल
इस पूरे विवाद में एक और मुद्दा राष्ट्रपति के स्वागत को लेकर सामने आया है। जानकारी के अनुसार जब राष्ट्रपति मुर्मू पश्चिम बंगाल पहुंचीं तो एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने के लिए केवल सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब मौजूद थे।
सामान्य प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रपति के स्वागत के लिए राज्य के मुख्यमंत्री या कोई वरिष्ठ मंत्री उपस्थित रहता है। लेकिन इस कार्यक्रम में ऐसा नहीं हुआ, जिस पर केंद्र सरकार ने गंभीरता दिखाई है।
प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर Narendra Modi ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में ऐसे पदों का सम्मान सर्वोच्च होना चाहिए।
ममता बनर्जी का पलटवार
वहीं दूसरी ओर Mamata Banerjee ने केंद्र और भाजपा के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को बदनाम करने के लिए राष्ट्रपति के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति को कार्यक्रम में राज्य के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के बारे में जो जानकारी दी गई, वह पूरी तरह गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि आलोचना करने से पहले भाजपा शासित राज्यों की स्थिति भी देखनी चाहिए।
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संथाल समुदाय से राष्ट्रपति की अपील
इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू ने संथाल समुदाय के युवाओं से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में संथाल समुदाय का योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन उसे इतिहास में पर्याप्त पहचान नहीं मिली।
उन्होंने बाबा तिलका मांझी, सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे महान आदिवासी नायकों को याद करते हुए कहा कि इन वीरों के संघर्ष ने देश को प्रेरणा दी है।
राष्ट्रपति ने युवाओं से शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान देने तथा अपनी भाषा और संस्कृति को संरक्षित रखने का संदेश भी दिया।
निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के दौरे को लेकर उठे इस विवाद ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रिपोर्ट तलब की है, जबकि राज्य सरकार ने आरोपों को खारिज किया है। अब सभी की नजर इस रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

