देश: में एलपीजी गैस संकट को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों ने गैस संकट, निलंबित सांसदों की वापसी और सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा में प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi समेत कई विपक्षी सांसदों ने आठ निलंबित सांसदों की बहाली की मांग उठाई। विपक्षी सदस्य वेल में आकर नारे लगाने लगे और सरकार से गैस संकट पर तत्काल चर्चा कराने की मांग करने लगे।

स्पीकर ने दी चेतावनी
इस दौरान लोकसभा स्पीकर Om Birla ने विपक्ष को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अगर सांसद सदन की मेजों पर चढ़कर हंगामा करेंगे तो कार्रवाई करना मजबूरी बन जाता है।
लगातार हंगामे के कारण पहले लोकसभा को दोपहर 12 बजे तक स्थगित किया गया। इसके बाद दोबारा कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण इसे फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। दोपहर 2 बजे कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन यह केवल एक घंटे ही चल सकी और अंततः लोकसभा को 16 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
सदन के अंदर हंगामे के अलावा विपक्षी दलों ने संसद परिसर में भी विरोध प्रदर्शन किया। सांसदों ने हाथों में प्लेकार्ड लेकर एलपीजी संकट के खिलाफ प्रदर्शन किया और सरकार से तत्काल समाधान की मांग की।
सांसदों ने ‘अरे मोदी जी, एलपीजी’ जैसे नारे लगाते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि गैस संकट के कारण आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव
इसी बीच एक और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। सूत्रों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव दिया है।
यह प्रस्ताव संसद में दिए गए नोटिस के जरिए लाया गया है। हालांकि इस पर अभी आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इस कदम ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
सरकार का पक्ष
लोकसभा में वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने एलपीजी संकट और वैश्विक हालात पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के कारण कुछ चुनौतियां पैदा हुई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और जरूरी फंड उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
सीतारमण ने बताया कि सरकार ₹1 लाख करोड़ का आर्थिक स्थिरीकरण कोष (Economic Stabilization Fund) तैयार कर रही है, जो वैश्विक संकटों के असर से देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
ये भी पढ़ें: LPG को लेकर डर फैलाने वालों को PM की चेतावनी: मोदी बोले- कालाबाजारी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
विपक्ष पर आरोप
वित्त मंत्री ने विपक्ष के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि जब सरकार सदन में स्थिति स्पष्ट कर रही है, तब विपक्ष सुनने को तैयार नहीं है और केवल अपना एजेंडा चला रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में सभी राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय हित में एकजुट होकर काम करना चाहिए ताकि जनता में भरोसा कायम रहे।
संबोधन के दौरान सीतारमण ने Chandrashekhar Azad से मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें अपने नाम के साथ ‘रावण’ शब्द हटाकर ‘विदुर’ लगा लेना चाहिए, क्योंकि महाभारत के बाद विदुर बिजनौर आकर बस गए थे।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री Ramdas Athawale ने कहा कि देश में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
वहीं राज्यसभा सांसद H. D. Deve Gowda ने भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव जरूर है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है।
शिवसेना सांसद Naresh Mhaske ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि आम लोगों को परेशानी न हो, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।

