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Home - तेलंगाना - मां-बाप को छोड़ा बेसहारा तो कटेगी सैलरी! तेलंगाना का नया कानून बना चर्चा का केंद्र

मां-बाप को छोड़ा बेसहारा तो कटेगी सैलरी! तेलंगाना का नया कानून बना चर्चा का केंद्र

Rajat Kumar
Last updated: 2026/03/30 at 7:52 PM
Rajat Kumar
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4 Min Read
Elderly parents receiving financial support under Telangana Parental Support Bill 2026
तेलंगाना सरकार ने नया कानून पास कर माता-पिता की देखभाल न करने वालों की सैलरी से कटौती का प्रावधान लागू किया
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तेलंगाना: ने एक ऐतिहासिक और सख्त सामाजिक कानून लागू करते हुए बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा करने वालों पर बड़ा प्रहार किया है। राज्य विधानसभा ने ‘पैरेंटल सपोर्ट बिल, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। इस कानून के तहत यदि कोई संतान अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करती, तो उसकी सैलरी से सीधे कटौती की जाएगी।

Contents
क्या है ‘पैरेंटल सपोर्ट बिल, 2026’?शिकायत कैसे होगी?भावुक हुए मुख्यमंत्रीदेश में पहली बार इतना व्यापक कानूनअन्य राज्यों में क्या है नियम?समाज पर क्या पड़ेगा असर?बढ़ती समस्या का समाधाननिष्कर्ष:

मुख्यमंत्री Revanth Reddy ने इस विधेयक को पेश करते हुए इसे समाज के लिए जरूरी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल आर्थिक प्रावधान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला एक सख्त संदेश है।

क्या है ‘पैरेंटल सपोर्ट बिल, 2026’?

इस कानून के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ देता है, तो उसकी सैलरी का 15% या ₹10,000 (जो भी कम हो) काटकर सीधे माता-पिता के खाते में भेजा जाएगा। यह नियम केवल सरकारी कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों पर भी लागू होगा।

सबसे खास बात यह है कि इस कानून के दायरे में विधायक, सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी आएंगे। यानी अब जनसेवक भी अपने निजी जीवन में जिम्मेदारी से नहीं बच सकेंगे।

Elderly parents receiving financial support under Telangana Parental Support Bill 2026
तेलंगाना सरकार ने नया कानून पास कर माता-पिता की देखभाल न करने वालों की सैलरी से कटौती का प्रावधान लागू किया

शिकायत कैसे होगी?

इस कानून को आम लोगों के लिए सरल बनाने की कोशिश की गई है। माता-पिता को अब कोर्ट के चक्कर नहीं काटने होंगे। वे सीधे जिला कलेक्टर के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कलेक्टर जांच के बाद अगर शिकायत सही पाते हैं, तो संबंधित कर्मचारी के विभाग या कंपनी को सैलरी से कटौती करने का आदेश देंगे। यह राशि सीधे माता-पिता के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

भावुक हुए मुख्यमंत्री

विधेयक पेश करते समय Revanth Reddy भावुक नजर आए। उन्होंने एक उदाहरण साझा करते हुए कहा कि उन्होंने एक ऐसे जनप्रतिनिधि को देखा, जिसने अपने पिता की बीमारी के दौरान भी उनका साथ नहीं दिया।

उन्होंने कहा, “जब माता-पिता की आंखों में आंसू होते हैं, तो वह समाज के पतन का संकेत होता है। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए जो सक्षम होते हुए भी अपने माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं निभाते।”

देश में पहली बार इतना व्यापक कानून

भारत में पहली बार ऐसा कानून लागू हुआ है, जिसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर को एक साथ शामिल किया गया है। इससे पहले कुछ राज्यों में ऐसे प्रावधान जरूर थे, लेकिन उनका दायरा सीमित था।

अन्य राज्यों में क्या है नियम?

  • Kerala (2023): यहां माता-पिता की उपेक्षा करने पर सैलरी का 25% तक काटा जा सकता है, लेकिन यह मुख्य रूप से अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारियों पर लागू होता है।
  • Assam (2017): ‘प्रणाम एक्ट’ के तहत सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से 10-15% तक कटौती का प्रावधान है।

तेलंगाना का नया कानून इन दोनों से आगे जाकर अधिक व्यापक और प्रभावी माना जा रहा है।

समाज पर क्या पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करेगा। भारत जैसे देश में जहां संयुक्त परिवार की परंपरा धीरे-धीरे कमजोर हो रही है, वहां इस तरह के कानून बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

हालांकि कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार के मामलों में सरकारी हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए। लेकिन समर्थकों का मानना है कि जब माता-पिता को बेसहारा छोड़ दिया जाता है, तब सरकार का हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है।

बढ़ती समस्या का समाधान

आज के दौर में बुजुर्गों की उपेक्षा एक गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। कई मामलों में माता-पिता को आर्थिक और मानसिक रूप से अकेला छोड़ दिया जाता है। ऐसे में यह कानून एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है।

ये भी पढ़ें: क्या ‘वंदे मातरम’ गाना जरूरी है? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार के सर्कुलर पर साफ रुख


निष्कर्ष:

तेलंगाना का ‘पैरेंटल सपोर्ट बिल, 2026’ न केवल एक कानून है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी और संदेश भी है। यह बताता है कि माता-पिता की देखभाल केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अब कानूनी कर्तव्य भी है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

TAGGED: India Law, Parental Support Bill, Parents Care, Revanth Reddy, Salary Cut Law, Social Issue, Telangana News
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