मिडिल ईस्ट: में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर तीखा और आक्रामक बयान देकर वैश्विक हलचल बढ़ा दी है। व्हाइट हाउस से राष्ट्र के नाम संबोधन में ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य संघर्ष में “जीत हासिल कर ली है” और ईरान की सैन्य ताकत अब काफी हद तक कमजोर हो चुकी है।
करीब 19 मिनट के इस भाषण में ट्रम्प ने कहा कि ईरान की मिसाइल, ड्रोन क्षमता और नौसेना को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने दावा किया कि “ईरान की सेना अब हमारे कंट्रोल में है” और इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लगभग पूरा हो चुका है।
हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका उसे “स्टोन एज” यानी पाषाण युग में पहुंचा देगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले 2 से 3 हफ्तों में अमेरिका एक बड़ा सैन्य कदम उठा सकता है।
भाषण में पुरानी बातें, नया ऐलान नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रम्प के इस संबोधन में कोई ठोस नई नीति या घोषणा सामने नहीं आई। उन्होंने वही बातें दोहराईं जो वे पिछले कुछ समय से कहते रहे हैं। ट्रम्प ने अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यह युद्ध जरूरी है और इसे सही नजरिए से देखा जाना चाहिए।
उन्होंने वियतनाम युद्ध और इराक युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि वे युद्ध कई साल तक चले, जबकि ईरान के साथ यह संघर्ष अभी शुरुआती चरण में है। उन्होंने माना कि इस युद्ध के कारण अमेरिकी नागरिकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है, लेकिन इसे भविष्य की सुरक्षा में निवेश बताया।
दिलचस्प बात यह रही कि ट्रम्प ने एक दिन पहले कहा था कि उन्हें किसी समझौते की जरूरत नहीं है, लेकिन अपने भाषण में उन्होंने ईरान से बातचीत की अपील भी की। इस विरोधाभास ने उनके रुख को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान का पलटवार और सख्त रुख
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के दावों को खारिज करते हुए सख्त प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि इजराइल की “गलत रणनीति और उकसावे” के कारण अमेरिका इस युद्ध में कूदा है।
ईरान का कहना है कि उसकी असली सैन्य क्षमता अभी भी सुरक्षित है और अमेरिका उसके एडवांस हथियारों को नुकसान नहीं पहुंचा पाया है। ईरानी सेना ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि जमीनी हमला किया गया, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

क्षेत्रीय और वैश्विक हलचल तेज
इस संघर्ष का असर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी साफ दिखने लगा है। व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि रूस इस युद्ध को खत्म कराने के लिए मध्यस्थता करने को तैयार है। वहीं चीन ने भी तत्काल युद्धविराम की अपील की है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बना हुआ है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। ब्रिटेन ने इस मुद्दे पर 35 देशों की बैठक बुलाई है, हालांकि इसमें कई बड़े देशों को शामिल नहीं किया गया।
उधर, ओस्लो समेत कई शहरों में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। यह दिखाता है कि यह संघर्ष अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है।
जमीनी हालात और बढ़ता खतरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान में एक पुराने मेडिकल रिसर्च सेंटर पर हमला हुआ है, जिससे भारी नुकसान हुआ। वहीं इजराइल ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटे में हिजबुल्लाह के कई ठिकानों को निशाना बनाया और दर्जनों लड़ाकों को मार गिराया।
इन घटनाओं से साफ है कि हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और किसी भी समय यह संघर्ष और बड़ा रूप ले सकता है।
निष्कर्ष:
ट्रम्प के आक्रामक बयान और ईरान के जवाबी रुख के बीच मिडिल ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं, तो आने वाले हफ्तों में यह संघर्ष और गंभीर हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

