नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर अपने पुराने चेक बाउंस मामले को लेकर चर्चा में हैं। गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामला भावनात्मक मोड़ ले गया, जब राजपाल यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कोर्ट में कहा—“मुझे पांच बार और जेल भेज दो, लेकिन मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं।”
यह मामला एक लंबे समय से चल रहे वित्तीय विवाद से जुड़ा है, जिसमें अभिनेता पर करोड़ों रुपये की बकाया राशि का भुगतान न करने का आरोप है। कोर्ट ने उनकी ओर से मांगे गए अतिरिक्त समय को सख्ती से खारिज कर दिया।
कोर्ट ने साफ कहा—‘नहीं मतलब नहीं’
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने कोर्ट से 6 करोड़ रुपये चुकाने के लिए 30 दिन का समय मांगा। हालांकि कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा—“नहीं मतलब नहीं। फैसला सुरक्षित रखा जा रहा है, और समय नहीं दिया जाएगा।”
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि यदि अभिनेता भुगतान करने के इच्छुक हैं, तो देरी क्यों हो रही है। जज ने कहा कि “अगर आप पेमेंट करना चाहते हैं, तो कर दीजिए, फिर मामला खत्म हो जाएगा।”
7.75 करोड़ रुपये अब भी बकाया
शिकायतकर्ता पक्ष के वकील ने कोर्ट को बताया कि राजपाल यादव पर अब भी करीब 7.75 करोड़ रुपये बकाया हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सजा पूरी कर लेने से वित्तीय जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
वकील के अनुसार, राजपाल यादव पहले ही करीब 2 करोड़ रुपये जमा कर चुके हैं, लेकिन बाकी राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अभिनेता खुद 10 करोड़ रुपये के बकाया को स्वीकार कर चुके हैं।

वन-टाइम सेटलमेंट की कोशिश भी नाकाम
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) का विकल्प भी सुझाया। कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर कम समय में 6 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया जाए, तो विवाद समाप्त हो सकता है। शिकायतकर्ता पक्ष भी इस प्रस्ताव पर सहमत नजर आया।
लेकिन जब राजपाल यादव ने इसके लिए 30 दिन का समय मांगा, तो कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद मामला और जटिल हो गया और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
भावुक हुए अभिनेता, बोले—‘मैं हार नहीं मानूंगा’
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने भावुक होते हुए कहा—
“मैंने 17 करोड़ रुपये चुका दिए हैं, मेरे पांच फ्लैट बिक चुके हैं। मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं। मुझे फिर से जेल भेज दो, लेकिन मैं अपनी लड़ाई जारी रखूंगा।”
उनके इस बयान ने कोर्ट रूम का माहौल कुछ देर के लिए भावुक बना दिया, लेकिन अदालत ने तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म अता पता लापता के निर्माण के लिए एक निजी कंपनी से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। 2012 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके बाद अभिनेता आर्थिक संकट में आ गए।
कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की। समय के साथ ब्याज जुड़ने से यह रकम बढ़ती गई और विवाद गहराता गया।
पहले भी जा चुके हैं जेल
साल 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी करार देते हुए 6 महीने की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की, जहां उन्हें कई बार राहत मिली।
हालांकि फरवरी 2026 में कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। इसके बाद उन्होंने जेल जाकर सजा काटी और बाद में 1.5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर अंतरिम जमानत पर रिहा हुए।
निष्कर्ष:
राजपाल यादव का यह मामला सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि एक अभिनेता की आर्थिक संघर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन की कहानी भी है। कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि भावनाएं नहीं, बल्कि तथ्य और समयबद्ध भुगतान ही राहत दिला सकते हैं। अब सभी की नजरें कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

