AGRA: में 12 अप्रैल 2026 को साहित्य और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब RD Educational Society द्वारा Incredible India Foundation के सहयोग से “समिधा कवि सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया।
यह आयोजन शहर के प्रतिष्ठित Lemon Tree Hotel में हुआ, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए सुप्रसिद्ध कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

भव्य उद्घाटन के साथ हुआ कार्यक्रम का आगाज़
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर पूरन डाबर, डॉ सुशील गुप्ता, डॉ अरुण उपाध्याय, तुलसीराम यादव, अरुण डंग, हमवीर सिंह और गिरधर शर्मा जैसे गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र का संचालन श्रुति सिन्हा ने बेहद प्रभावशाली ढंग से किया। वातावरण पूरी तरह से सांस्कृतिक ऊर्जा और साहित्यिक उत्साह से भरा हुआ नजर आया।

कार्यक्रम का उद्देश्य: सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर कदम
कार्यक्रम संयोजक कवि Ishan Dev ने अपने उद्बोधन में बताया कि “समिधा कवि सम्मेलन” का मुख्य उद्देश्य सनातन चेतना को जागृत करना और भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि कविता केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति है।

अतिथियों के विचार: साहित्य का महत्व
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए पूरन डाबर ने आगरा के ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कवि सम्मेलन समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
डॉ सुशील गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि कविताएं समाज को जोड़ने और प्रेरित करने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व होना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ाना चाहिए।

काव्यपाठ: भावनाओं का अनूठा संगम
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण काव्यपाठ रहा, जिसमें विभिन्न रसों—देशभक्ति, हास्य, व्यंग्य और संवेदनशीलता—का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला।

मेरठ से आए कवि Dr Prateek Gupta ने अपने देशभक्ति से ओतप्रोत शब्दों से माहौल को जोश से भर दिया:
“घर, जमीन, दुकान भी दे दी, खुश हो ना
भारत के सम्मान में दे दी, खुश हो ना
स्वर्ग द्वार पर खड़े शहीद, बस यह पूछें
हमने अपनी जान भी दे दी, खुश हो ना”

इसके बाद युवा कवि Ishan Dev ने देशभक्ति का जज्बा जगाते हुए कहा:
“हमको कोई कायर न समझें
हम हर जवाब तन कर देंगे,
यदि वतन मांगेगा कुर्बानी
तो भगत सिंह बनकर देंगे।”

सुप्रसिद्ध कवयित्री Mamta Sharma ने रिश्तों और जीवन की सच्चाई को बयां करते हुए कहा:
“स्वार्थों की कटार होते हैं
रूह के आर पार होते हैं
जो समय पर साथ न देते हों,
ऐसे रिश्ते तो भार होते हैं।”

हास्य कवि Ramesh Muskan ने अपनी चुटीली पंक्तियों से श्रोताओं को खूब हंसाया:
“कर पाओ तो यूँ करो जीवन का सम्मान,
आँखों में सपने रखो अधरों पर मुस्कान।”

अंत में कार्यक्रम का संचालन कर रहे Shashikant Yadav ने अपनी व्यंग्यात्मक शैली से समापन को यादगार बना दिया:
“तोला से मन भर तोला है
पारा पानी में घोला है
कीड़े सब बाहर निकले हैं
चुटकी भर तो सच बोला है।”
सम्मान समारोह: साहित्यकारों का अभिनंदन
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों और कवियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। उन्हें पटका पहनाकर, चंदन का तिलक लगाकर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वालों में पूरन डाबर, डॉ सुशील गुप्ता, डॉ हिमांशु यादव, अरुण डंग, डॉ शुभम लवानियां, डॉ अरुण उपाध्याय, तुलसीराम यादव, आरसी शर्मा, अजय शर्मा और बृजेश शर्मा प्रमुख रहे।

सहयोग और आयोजन की विशेषताएं
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डावर ग्रुप, डॉ विजय किशोर बंसल, Incredible India Foundation, साधना भार्गव और प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम का संचालन श्रुति सिन्हा और शशिकांत यादव ने किया, जबकि अंत में संयोजक ईशान देव ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।

सांस्कृतिक चेतना का संदेश
“समिधा कवि सम्मेलन” केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरूकता का प्रतीक बनकर उभरा। इसने यह साबित किया कि कविता आज भी समाज को जोड़ने और जागरूक करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
श्रोताओं ने पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह के साथ भाग लिया और कवियों की रचनाओं पर तालियों की गूंज लगातार सुनाई देती रही।

निष्कर्ष:
आगरा में आयोजित “समिधा कवि सम्मेलन” ने साहित्य और संस्कृति के महत्व को एक बार फिर उजागर किया। इस आयोजन ने न केवल श्रोताओं का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूक भी किया।

