सड़क परिवहन: और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने देशभर में ओवरलोडेड वाहनों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए नए नियम लागू करने का फैसला किया है। ये नियम 15 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएंगे और इनके तहत तय सीमा से अधिक वजन लेकर चलने वाले वाहनों पर अब भारी जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार का यह कदम सड़क सुरक्षा बढ़ाने और हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
नए नियमों के अनुसार, यदि कोई वाहन निर्धारित सीमा से 20 प्रतिशत तक अधिक वजन लेकर चलता है, तो उस पर बेस रेट का दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। वहीं, अगर ओवरलोडिंग 20 प्रतिशत से 40 प्रतिशत या उससे अधिक होती है, तो यह जुर्माना सीधे चार गुना तक बढ़ जाएगा। यह प्रावधान उन ट्रांसपोर्टर्स के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, जो अब तक नियमों की अनदेखी करते हुए अतिरिक्त लोड लेकर चलते थे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर वाहन का वजन निर्धारित सीमा से 10 प्रतिशत तक कम या बराबर है, तो उस पर किसी भी प्रकार का ओवरलोडिंग शुल्क नहीं लगेगा। यानी छोटे स्तर की गलती पर राहत दी गई है, लेकिन ज्यादा ओवरलोडिंग पर कड़ी सजा तय की गई है।
ओवरलोडिंग की जांच अब पूरी तरह तकनीकी तरीके से की जाएगी। टोल प्लाजा पर लगे प्रमाणित वजन मापने वाले उपकरणों के जरिए वाहनों का वजन मापा जाएगा। जहां यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, वहां ओवरलोडिंग शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
जुर्माना वसूली की प्रक्रिया भी अब डिजिटल कर दी गई है। सभी ओवरलोडिंग शुल्क केवल FASTag के माध्यम से वसूले जाएंगे। इसके साथ ही, ओवरलोडेड वाहनों की जानकारी VAHAN पोर्टल में दर्ज की जाएगी, जिससे भविष्य में भी ऐसे वाहनों की निगरानी आसान हो सके।
अगर कोई वाहन बिना वैध FASTag के राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलता पाया जाता है, तो उस पर पहले से लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। यानी अब बिना FASTag के चलना भी महंगा पड़ सकता है।

सरकार के अनुसार, यह नियम “राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) चौथा संशोधन नियम, 2026” के तहत लाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और ओवरलोडिंग से होने वाले नुकसान को कम करना है। ओवरलोडेड वाहन न केवल सड़कों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि हादसों का खतरा भी बढ़ाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरलोडिंग के कारण सड़कों की उम्र कम हो जाती है, जिससे बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ती है और सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसे में यह नया नियम सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, ये नियम उन निजी निवेश परियोजनाओं पर लागू नहीं होंगे, जो पहले से चल रही हैं, जब तक कि संबंधित कंसेशनायर इन नियमों को अपनाने के लिए सहमति न दें। इससे पहले से चल रही परियोजनाओं को कुछ राहत मिल सकती है।
सरकार ने Weigh-in-Motion (WIM) तकनीक को भी बढ़ावा देने की बात कही है, जिससे चलते-फिरते ही वाहनों का वजन मापा जा सकेगा। इससे ट्रैफिक बाधित हुए बिना ही जांच संभव होगी।
कुल मिलाकर, ये नए नियम ट्रांसपोर्ट सेक्टर में अनुशासन लाने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम हैं। आने वाले समय में इनका असर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष:
ओवरलोडेड वाहनों पर सख्त कार्रवाई के लिए लाए गए नए नियम न सिर्फ सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाएंगे, बल्कि देश के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करेंगे। हालांकि, ट्रांसपोर्टर्स के लिए यह नियम चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में यह बदलाव जरूरी माना जा रहा है।

