अंतरराष्ट्रीय: मंच पर एक नई बहस छिड़ गई है, जहां भारत की विदेश नीति और इजराइल के साथ उसके संबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। United Nations Human Rights Council में पेश एक रिपोर्ट में भारत पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
यह रिपोर्ट UN की विशेष दूत Francesca Albanese द्वारा तैयार की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि इजराइल के साथ करीबी रणनीतिक संबंधों के चलते भारत अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों से भटक रहा है।
क्या है पूरा मामला?
‘टॉर्चर एंड जेनोसाइड’ नामक इस रिपोर्ट को 23 मार्च को पेश किया गया था। इसमें मुख्य रूप से गाजा और फिलिस्तीनी कैदियों की स्थिति पर फोकस किया गया है। रिपोर्ट में आरोप है कि अक्टूबर 2023 के बाद से इजराइल ने गाजा में व्यवस्थित तरीके से दमन और यातना का इस्तेमाल किया है।
Francesca Albanese ने एक इंटरव्यू में कहा कि ऐसे हालात में जो देश इजराइल को हथियार या समर्थन दे रहे हैं, वे भी अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के दायरे में आ सकते हैं।
भारत पर क्यों उठे सवाल?
रिपोर्ट में भारत का नाम सीधे तौर पर लेते हुए कहा गया है कि इजराइल के साथ उसकी “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” उसे कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी के दायरे में लाती है।
अल्बनीज के अनुसार, International Court of Justice पहले ही इजराइल के कब्जे को गैरकानूनी बता चुका है और देशों से हथियारों का लेन-देन रोकने की अपील कर चुका है। इसके बावजूद यदि कोई देश सैन्य सहयोग जारी रखता है, तो वह नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का ऐतिहासिक रुख न्याय और संतुलन का रहा है, लेकिन मौजूदा नीतियां उससे अलग दिखाई देती हैं।

गाजा को बताया ‘यातना शिविर’
रिपोर्ट में गाजा की स्थिति को बेहद गंभीर बताया गया है। इसमें कहा गया है कि वहां रहने वाले लाखों लोग बेहद सीमित क्षेत्र में, संसाधनों की भारी कमी के बीच जीवन बिता रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, निगरानी तकनीकों—जैसे ड्रोन, फेस रिकग्निशन और चेकपॉइंट्स—के जरिए फिलिस्तीनियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर गहरा मानसिक और सामाजिक दबाव बन रहा है।
Gaza Strip को रिपोर्ट में “एक बड़े कंसंट्रेशन कैंप जैसी स्थिति” बताया गया है, जहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और समर्थन
Francesca Albanese ने यह भी बताया कि कुछ देश जैसे South Africa, Spain, Malaysia और Colombia इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वैश्विक राजनीति और प्रभावशाली समूहों के कारण ठोस कार्रवाई करना आसान नहीं है।
भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया?
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में भारत की विदेश नीति पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा सकता है।
कानूनी बनाम राजनीतिक बहस
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून की व्याख्या अक्सर जटिल होती है और कई बार राजनीतिक हित भी इसमें भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि भारत इस आरोप पर क्या रुख अपनाता है।
UN रिपोर्ट ने एक बार फिर भारत-इजराइल संबंधों को वैश्विक बहस के केंद्र में ला दिया है। Francesca Albanese के आरोपों से यह साफ है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर कूटनीतिक और कानूनी चर्चा और तेज हो सकती है।

