पाकिस्तान सरकार: ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 रुपए प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया है। नई कीमतें 16 मई से लागू हो गई हैं। कटौती के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल 409.78 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (HSD) 409.58 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर मिल रहा है।
हालांकि कीमतों में यह राहत मामूली मानी जा रही है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई थी। इसके बावजूद सरकार के इस फैसले से मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पाकिस्तान में मोटरसाइकिल, रिक्शा और छोटी गाड़ियों का इस्तेमाल बड़ी संख्या में होता है, इसलिए पेट्रोल की कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल सस्ता हुआ है, वहीं भारत में एक दिन पहले यानी 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम 3-3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए गए थे। भारत में कीमतें बढ़ने के बाद दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया। इसके अलावा CNG की कीमतों में भी 2 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी की गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों में ईंधन की कीमतों में अंतर की वजह उनकी अलग-अलग आर्थिक परिस्थितियां और सरकारी नीतियां हैं। पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वहां लगातार बढ़ती महंगाई, विदेशी मुद्रा की कमी और तेल आयात पर बढ़ता खर्च सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पिछले कुछ समय से पाकिस्तान सरकार हर शुक्रवार रात को पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की समीक्षा कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते वहां ईंधन दरों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है।
दरअसल, 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजराइल और ईरान तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। युद्ध की आशंका और सप्लाई चेन प्रभावित होने के डर से क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों में दिखाई दिया।
पाकिस्तान में पिछले सप्ताह ही सरकार ने पेट्रोल की कीमत में 14.92 रुपए और डीजल में 15 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। वहीं युद्ध शुरू होने के कुछ दिनों बाद 6 मार्च को पेट्रोल-डीजल 55 रुपए प्रति लीटर तक महंगा कर दिया गया था। इसके बाद 2 अप्रैल को भी पेट्रोल में 43% और हाई-स्पीड डीजल में 55% तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
इसी बढ़ती महंगाई के खिलाफ पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए थे। 15 मई को इस्लामाबाद में लोगों ने ईंधन कीमतों में कमी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार ने बढ़ते जनदबाव और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए फिलहाल 5 रुपए की राहत दी है, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो आने वाले दिनों में फिर से कीमतें बढ़ सकती हैं।
वहीं भारत में तेल कंपनियां लंबे समय से बढ़ती लागत के दबाव में थीं। क्रूड ऑयल महंगा होने के कारण कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी वजह से पेट्रोल-डीजल और CNG के दाम बढ़ाने का फैसला लिया गया।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, अगर ईरान संकट और पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत और पाकिस्तान जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ेगा।
फिलहाल पाकिस्तान में मिली यह राहत जनता के लिए अस्थायी राहत मानी जा रही है। वहीं भारत में बढ़ती ईंधन कीमतें आने वाले समय में महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। दोनों देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल के बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहेंगी।
निष्कर्ष
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 5 रुपए की कटौती आम जनता के लिए राहत जरूर है, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई और वैश्विक तेल संकट के बीच यह राहत कितनी टिकाऊ होगी, यह आने वाला समय तय करेगा। दूसरी ओर भारत में बढ़ते ईंधन दाम महंगाई पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।

