एअर इंडिया: की दिल्ली से बेंगलुरु जा रही फ्लाइट AI2651 गुरुवार को एक बड़े हादसे का शिकार होते-होते बच गई। केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया। एविएशन भाषा में इस तरह की घटना को “टेल स्ट्राइक” कहा जाता है। हालांकि राहत की बात यह रही कि विमान को सुरक्षित तरीके से उतार लिया गया और सभी 181 यात्री तथा क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित हैं।
घटना के बाद विमान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिनमें विमान के पिछले हिस्से पर स्क्रैच और नुकसान के निशान दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन तस्वीरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, हादसे से ठीक पहले रनवे से एक बोइंग 747 विमान ने उड़ान भरी थी। उसके इंजनों से पैदा हुई तेज “वेक टर्बुलेंस” की वजह से एयर इंडिया के विमान का संतुलन प्रभावित हुआ। इसी कारण पायलट को लैंडिंग के दौरान कठिनाई महसूस हुई।
एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, “वेक टर्बुलेंस” हवा में बनने वाला शक्तिशाली दबाव और घुमावदार वायु प्रवाह होता है, जो बड़े विमानों के पीछे बनता है। यदि दूसरा विमान बहुत जल्दी उसी मार्ग पर उतरने की कोशिश करे, तो उसका बैलेंस बिगड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि एयर इंडिया फ्लाइट के पायलट को स्थिति का अंदाजा हो गया था और उसने नियमों के अनुसार “गो-अराउंड” करने का फैसला लिया। गो-अराउंड ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें पायलट लैंडिंग को बीच में छोड़कर विमान को दोबारा हवा में ले जाता है ताकि बाद में सुरक्षित तरीके से लैंडिंग की जा सके।
लेकिन इसी प्रक्रिया के दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टच हो गया। यह टकराव ज्यादा गंभीर नहीं था, लेकिन विमान के ढांचे को नुकसान पहुंचा। एयरलाइन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विमान को तुरंत जांच के लिए ग्राउंड कर दिया है।
एयर इंडिया और एयरपोर्ट अधिकारियों ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को भी घटना की जानकारी दे दी गई है। प्रारंभिक जांच में वेक टर्बुलेंस को संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा।
घटना के बाद एयर इंडिया की बेंगलुरु से दिल्ली जाने वाली वापसी फ्लाइट AI2652 को रद्द कर दिया गया। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक उड़ानों और अन्य व्यवस्थाओं का आश्वासन दिया है।
बेंगलुरु एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की ग्राउंड टीम यात्रियों की सहायता में जुटी रही। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर घटना के दौरान का अपना अनुभव साझा किया। कुछ यात्रियों ने बताया कि लैंडिंग के दौरान विमान में अचानक झटका महसूस हुआ था, जिससे कुछ समय के लिए घबराहट फैल गई थी।
एविएशन इंडस्ट्री में “टेल स्ट्राइक” को गंभीर सुरक्षा घटना माना जाता है, क्योंकि इससे विमान के पिछले हिस्से और संरचना को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि आधुनिक विमानों में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं, जिनकी वजह से बड़े हादसे टल जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पायलट द्वारा समय रहते गो-अराउंड का फैसला लेना एक महत्वपूर्ण कदम था। यदि स्थिति को नजरअंदाज किया जाता, तो हादसा और गंभीर हो सकता था। विमानन नियमों के अनुसार, किसी भी असामान्य स्थिति में पायलट को लैंडिंग रद्द करने का पूरा अधिकार होता है।
हाल के वर्षों में भारतीय विमानन क्षेत्र में यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिसके चलते एयर ट्रैफिक और रनवे संचालन पर दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में एयरपोर्ट और एयरलाइंस के लिए सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना और भी जरूरी हो गया है।
फिलहाल DGCA की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। एयर इंडिया ने कहा है कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और घटना की पूरी जांच के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
दिल्ली से बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया फ्लाइट AI2651 के साथ हुआ “टेल स्ट्राइक” हादसा बड़ा खतरा बन सकता था, लेकिन पायलट की सतर्कता और समय पर लिए गए फैसले ने सभी यात्रियों की जान बचा ली। अब DGCA और एयरलाइन इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं।


