देश: के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल महाराष्ट्र के किसानों के लिए आखिरकार राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले कई दिनों से प्याज की गिरती कीमतों को लेकर परेशान किसान लगातार सरकार से मदद की मांग कर रहे थे। कई मंडियों में किसानों को प्याज का भाव इतना कम मिला कि कटौतियों के बाद उन्हें सिर्फ 50 पैसे से 1 रुपये प्रति किलो तक की कीमत मिली। इस हालात ने हजारों किसानों को आर्थिक संकट में धकेल दिया था।
इसी बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक के बाद किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया गया। अब सरकारी एजेंसियां NAFED और NCCF सीधे किसानों से प्याज खरीदेंगी। सरकार के इस कदम को किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
महाराष्ट्र में क्यों बिगड़े हालात?
संभाजीनगर, नासिक, पुणे, बीड और अन्य कई जिलों में इस बार प्याज की बंपर पैदावार हुई। लेकिन बाजार में मांग कम होने और सप्लाई ज्यादा होने के कारण कीमतें तेजी से नीचे आ गईं। कई किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे थे।
किसानों का कहना है कि एक किलो प्याज उगाने में करीब 18 से 20 रुपये तक की लागत आती है। इसमें बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और ट्रांसपोर्ट जैसे खर्च शामिल होते हैं। लेकिन मंडियों में जो कीमत मिली, उसने किसानों को पूरी तरह तोड़ दिया।
कई जगहों पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। कुछ किसानों ने नाराज होकर सड़कों पर प्याज फेंक दिए, जबकि कई किसान अपनी फसल मंडी तक ले जाने से भी डरने लगे।
अमित शाह से मुलाकात के बाद बड़ा फैसला
किसानों की नाराजगी और बिगड़ते हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की। बैठक में प्याज किसानों के साथ-साथ गन्ना किसानों के मुद्दे भी उठाए गए।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में फैसला लिया गया कि NAFED और NCCF अब किसानों से सीधे प्याज खरीदेंगी ताकि उन्हें बाजार में बेहतर दाम मिल सके। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इस कदम से किसानों को न्यूनतम लाभकारी मूल्य मिल सकेगा और बाजार में कीमतों को भी स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी खरीद शुरू होने से किसानों को बड़ा सहारा मिलेगा। जब NAFED और NCCF सीधे खरीद करेंगी, तब किसानों को औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी।
इसके अलावा केंद्र सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि प्याज के निर्यात पर फिलहाल कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय प्याज की मांग बनी रहेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
क्या है NAFED और NCCF की भूमिका?
NAFED यानी नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन और NCCF यानी नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन किसानों से फसल खरीदने और बाजार में सप्लाई बनाए रखने का काम करती हैं।
सरकार अक्सर तब इन एजेंसियों का इस्तेमाल करती है जब किसी फसल की कीमतें बहुत ज्यादा गिर जाती हैं या बाजार में संकट पैदा हो जाता है। प्याज के मामले में भी यही रणनीति अपनाई जा रही है।
किसानों में बढ़ी उम्मीद
सरकार के फैसले के बाद महाराष्ट्र के किसानों में राहत की भावना देखने को मिल रही है। कई किसान संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अगर खरीद प्रक्रिया जल्द शुरू होती है तो किसानों को काफी राहत मिलेगी।
हालांकि किसान संगठनों ने यह भी मांग की है कि सरकार सिर्फ अस्थायी राहत न दे बल्कि प्याज के लिए स्थायी मूल्य नीति भी तैयार करे ताकि भविष्य में किसानों को ऐसे संकट का सामना न करना पड़े।
कृषि विशेषज्ञों ने क्या कहा?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्याज की कीमतें हर साल बड़े उतार-चढ़ाव का सामना करती हैं। कभी कीमतें आसमान छूती हैं तो कभी किसानों को लागत भी नहीं मिलती। ऐसे में स्टोरेज, निर्यात नीति और सरकारी खरीद व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर सरकार समय रहते बाजार में हस्तक्षेप करे तो किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिल सकती है।
निष्कर्ष:
महाराष्ट्र के प्याज किसानों के लिए यह फैसला किसी बड़ी राहत से कम नहीं माना जा रहा। अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस की बैठक के बाद NAFED और NCCF द्वारा सीधे खरीद का फैसला किसानों को आर्थिक संकट से बाहर निकालने में मदद कर सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि खरीद प्रक्रिया कितनी जल्दी और कितने बड़े स्तर पर शुरू होती है।


