पुणे: के खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में आयोजित 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड के दौरान भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऐसा बयान दिया जिसने एक बार फिर भारत की सैन्य तैयारी और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। सेना प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत किसी भी संभावित खतरे के लिए पूरी तरह तैयार है और यदि देश की सुरक्षा को चुनौती दी गई तो जवाब पहले से कहीं अधिक प्रभावी और निर्णायक होगा।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में दिख रही शांति को स्थायी नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने इसे केवल दुश्मनी के बीच एक अस्थायी विराम बताया और कहा कि भारतीय सेना 24 घंटे देश की सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहती है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ बना नई सैन्य रणनीति का प्रतीक
सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान ने यह साबित कर दिया कि भारत उकसावे का जवाब किस स्तर की सटीकता और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ दे सकता है। उनके अनुसार यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत की सामरिक क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन भी था।
उन्होंने युवा कैडेटों से कहा कि आने वाले वर्षों में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी और उन्हें इसी उच्च स्तर की प्रतिबद्धता बनाए रखनी होगी।
तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत पर जोर
जनरल द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल एक सेना के दम पर नहीं जीते जा सकते। आज के दौर में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल ही सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा कि एनडीए में कैडेटों को शुरुआत से ही संयुक्त सैन्य संस्कृति में प्रशिक्षित किया जाता है। यही वजह है कि किसी भी ऑपरेशन के दौरान तीनों सेनाएं एकजुट होकर काम करती हैं और बेहतर परिणाम हासिल करती हैं।
सेना प्रमुख के मुताबिक भविष्य के युद्ध पारंपरिक युद्धों से बिल्कुल अलग होंगे। इनमें तकनीक, साइबर क्षमता, निगरानी प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी।

आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप पर फोकस
अपने भाषण में जनरल द्विवेदी ने आधुनिक युद्ध के नए आयामों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज खतरे केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। साइबर हमले, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सूचना युद्ध जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान युद्धक्षेत्र पूरी तरह पारदर्शी हो चुका है, जहां हर गतिविधि पर निगरानी रखी जाती है। ऐसे में सेना को अपनी रणनीतियों और सुरक्षा तंत्र को लगातार अपडेट करना होगा।
42 साल पुरानी यादें हुईं ताजा
एनडीए के मंच पर संबोधन के दौरान सेना प्रमुख भावुक भी नजर आए। उन्होंने बताया कि लगभग 42 वर्ष पहले वह स्वयं इसी अकादमी से पास आउट हुए थे। उन्होंने कहा कि एनडीए ने उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र सेवा के मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने युवा कैडेटों से अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाने की अपील की।
पहलगाम हमले के बाद बढ़ी सतर्कता
हाल के वर्षों में आतंकवाद और सीमा पार से होने वाली गतिविधियों ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सतर्क बनाया है। सेना प्रमुख के बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब किसी भी सुरक्षा चुनौती का जवाब देने के लिए केवल रक्षात्मक नहीं बल्कि सक्रिय रणनीति पर काम कर रहा है। सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बढ़ता समन्वय भविष्य की सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
भारत की सैन्य तैयारी पर दुनिया की नजर
भारत लगातार अपने रक्षा ढांचे को आधुनिक बना रहा है। स्वदेशी हथियारों, अत्याधुनिक तकनीक और संयुक्त सैन्य अभियानों पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में सेना प्रमुख का यह संदेश न केवल देशवासियों बल्कि भारत के विरोधियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निष्कर्ष:
एनडीए की पासिंग आउट परेड में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का संबोधन केवल नए कैडेटों के लिए प्रेरणा नहीं था, बल्कि भारत के दुश्मनों के लिए स्पष्ट संदेश भी था। उन्होंने साफ कर दिया कि भारतीय सेनाएं हर चुनौती के लिए तैयार हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। भविष्य के किसी भी खतरे का जवाब संयुक्त सैन्य शक्ति और आधुनिक रणनीति के साथ दिया जाएगा।

