देश: की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। प्रश्नपत्र लीक विवाद के कारण रद्द हुई परीक्षा अब 21 जून को दोबारा आयोजित की जानी है। इसी बीच यह खबर सामने आई कि परीक्षा प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रश्नपत्रों को एयरफोर्स के विमानों से भेजने से पेपर लीक नहीं रुकेंगे। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि समस्या व्यवस्था में है, केवल परिवहन का तरीका बदलने से समाधान नहीं निकलेगा।
“सरकार अनपढ़ों जैसी बातें कर रही है”
अरविंद केजरीवाल ने अपने पोस्ट में लिखा कि अगर प्रश्नपत्र वायुसेना के जहाजों से भेजे जाएंगे तो क्या इससे पेपर लीक रुक जाएगा? उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सुझाव देकर मूल समस्या से ध्यान भटका रही है। उनके अनुसार, देश की शिक्षा व्यवस्था माफिया के कब्जे में जा चुकी है और इसे सुधारने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती हैं। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बनाया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
21 जून को होगी NEET की पुनर्परीक्षा
गौरतलब है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को NEET-UG परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के बाद कई राज्यों से प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। बढ़ते विवाद और जांच के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई।
अब 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। सरकार का दावा है कि इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। इन्हीं उपायों के तहत एयरफोर्स की मदद लेने का प्रस्ताव भी चर्चा में आया।

CUET परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी पर भी उठे सवाल
NEET विवाद के बीच CUET-UG 2026 परीक्षा भी चर्चा में आ गई है। शनिवार को देश के कई परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी खराबी और सर्वर संबंधी समस्याओं के कारण छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
वाराणसी सहित कई शहरों से ऐसी रिपोर्ट सामने आईं जहां छात्रों को घंटों इंतजार करना पड़ा। आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने भी इस मुद्दे को उठाया और कहा कि तकनीकी खामियों का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
“देश को पढ़े-लिखे प्रधानमंत्री की जरूरत”
CUET में आई तकनीकी समस्याओं को लेकर भी केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो शिक्षा व्यवस्था की जटिलताओं को समझे और छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दे।
उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा नेताओं ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष छात्रों की चिंता के नाम पर राजनीति कर रहा है।
परीक्षा प्रणाली पर बढ़ता अविश्वास
लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। लाखों छात्र महीनों तक तैयारी करते हैं और जब परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो उनका मनोबल प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, डिजिटल और पारदर्शी बनाने की जरूरत है। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
NEET और CUET जैसे राष्ट्रीय स्तर के एग्जाम देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं। ऐसे में सरकार, परीक्षा एजेंसियों और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और छात्रों का भरोसा बहाल करें।

