आगरा: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां देशभर में पौधारोपण अभियान, पर्यावरण रैलियां और सोशल मीडिया पर जागरूकता संदेशों की भरमार देखने को मिली, वहीं आगरा के यमुना आरती स्थल पर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता त्रिमोहन मिश्रा, जिन्हें लोग “ट्री मैन” के नाम से जानते हैं, ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक गंभीर और महत्वपूर्ण संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण दिवस केवल एक दिन मनाने का विषय नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जिम्मेदारी है जिसे प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आजकल कई स्थानों पर पर्यावरण दिवस के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती हैं। लोग पौधे लगाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर देते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद वही पौधे उपेक्षा का शिकार हो जाते हैं।
पौधे लगाना ही नहीं, उन्हें बचाना भी जरूरी
ट्री मैन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक अर्थ केवल नए पौधे लगाना नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद पेड़ों की रक्षा करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्षों पुराने पेड़ हजारों नए पौधों के बराबर पर्यावरणीय लाभ देते हैं, लेकिन विकास परियोजनाओं के नाम पर इन्हें तेजी से काटा जा रहा है।
उनका कहना था कि यदि हम केवल पौधारोपण करते रहेंगे और पुराने वृक्षों को बचाने में असफल रहेंगे, तो पर्यावरण संतुलन लगातार बिगड़ता जाएगा।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी
अपने संबोधन में त्रिमोहन मिश्रा ने अनियोजित विकास पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहरों में तेजी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल और हरित क्षेत्रों में लगातार हो रही कमी के कारण तापमान में वृद्धि हो रही है। आज अधिकांश शहर भीषण गर्मी और वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा बन सकता है।
कचरा जलाना बन रहा गंभीर खतरा
ट्री मैन ने खुले में कचरा जलाने की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि कई इलाकों में आज भी लोग प्लास्टिक और अन्य कचरे को खुलेआम आग के हवाले कर देते हैं। इससे निकलने वाला जहरीला धुआं वातावरण को प्रदूषित करता है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। यदि कहीं अवैध रूप से कचरा जलाया जा रहा हो तो लोगों को उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग पर चिंता
पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा कि आज लोग अपने घरों में एयर कंडीशनर लगाकर राहत तो महसूस कर लेते हैं, लेकिन इसके कारण बाहरी वातावरण और अधिक गर्म होता जा रहा है। यही वजह है कि ग्लोबल वार्मिंग लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही तो ग्लेशियर तेजी से पिघलते रहेंगे और समुद्र का जलस्तर बढ़ने से भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है।
पशु-पक्षियों की सुरक्षा भी जरूरी
त्रिमोहन मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पेड़ों तक सीमित नहीं है। पशु-पक्षी और अन्य जीव-जंतु भी प्रकृति के महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि भीषण गर्मी के दौरान अपने घरों, दुकानों और छतों पर पक्षियों के लिए पानी के बर्तन रखें तथा आवारा पशुओं के लिए भी पानी और भोजन की व्यवस्था करें।
उन्होंने कहा कि जब तक जीव-जंतुओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह संतुलित नहीं हो सकता।

युवाओं से लिए तीन संकल्प
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ट्री मैन ने युवाओं और नागरिकों से तीन महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आग्रह किया।
पहला, हर व्यक्ति अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या किसी विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी स्वयं उठाए।
दूसरा, पशु-पक्षियों के लिए नियमित रूप से पानी और भोजन की व्यवस्था करे।
तीसरा, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के साथ-साथ उसे पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में प्रयास करे।

शिक्षा और जागरूकता पर दिया जोर
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं को पर्यावरण शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के महत्व को समझ सकें।
कार्यक्रम में अमित शर्मा, करन शर्मा, विवेक कुमार, अमन ठाकुर सहित अनेक पर्यावरण प्रेमी भी मौजूद रहे और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
विश्व पर्यावरण दिवस पर ट्री मैन त्रिमोहन मिश्रा का संदेश स्पष्ट था कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं बल्कि जीवनभर निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है। केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल, पुराने पेड़ों की सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। यदि आज समाज जागरूक नहीं हुआ तो भविष्य में पर्यावरण संकट और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।


