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Home - वायरल न्यूज़ - क्या आपकी कार पर पेड़ गिर जाए तो मिलेगा मुआवजा? सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सबको चौंकाया

क्या आपकी कार पर पेड़ गिर जाए तो मिलेगा मुआवजा? सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सबको चौंकाया

Rajat Kumar
Last updated: 2026/06/15 at 6:06 PM
Rajat Kumar
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5 Min Read
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पेड़ गिरा, जिंदगी बदल गई… फिर भी नहीं मिला सड़क हादसे का मुआवजा! सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

नई दिल्ली। बारिश के मौसम में सड़क किनारे पेड़ के नीचे वाहन खड़ा करना आम बात है। लोग तेज धूप या बारिश से बचने के लिए अक्सर ऐसा करते हैं। लेकिन क्या होगा यदि उसी दौरान पेड़ की कोई बड़ी शाखा टूटकर वाहन पर गिर जाए और उसमें बैठे व्यक्ति को गंभीर चोट लग जाए? क्या ऐसी स्थिति में सड़क दुर्घटना मुआवजा (MACT Claim) मिल सकता है?

Contents
पेड़ गिरा, जिंदगी बदल गई… फिर भी नहीं मिला सड़क हादसे का मुआवजा! सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसलाक्या था पूरा मामला?मुआवजे के लिए अदालत पहुंचे पीड़ितसुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?‘Act of God’ सिद्धांत का जिक्रफिर भी पीड़ित को मिली राहतभविष्य के मामलों पर क्या होगा असर?निष्कर्ष:

इस सवाल का जवाब अब देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि हर वह घटना जिसमें किसी वाहन पर पेड़ गिर जाए, उसे मोटर वाहन दुर्घटना नहीं माना जा सकता। अदालत ने साफ किया कि मुआवजा तभी मिलेगा जब दुर्घटना और वाहन के उपयोग के बीच सीधा तथा निकट संबंध साबित हो।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2007 का है। बेंगलुरु निवासी के.के. उमेश कुमार ऑटो-रिक्शा से यात्रा कर रहे थे। यात्रा के दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए ऑटो चालक ने वाहन को सड़क किनारे एक पुराने पेड़ के नीचे रोक दिया।

कुछ ही देर बाद पेड़ की एक भारी शाखा टूटकर सीधे ऑटो के ऊपर गिर गई। हादसा इतना गंभीर था कि उमेश कुमार को रीढ़ की गंभीर चोटें आईं और वे स्थायी रूप से अपंग हो गए। उनके दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया और जीवन पूरी तरह बदल गया।

मुआवजे के लिए अदालत पहुंचे पीड़ित

घटना के बाद पीड़ित ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे की मांग करते हुए दावा दायर किया। मामला कर्नाटक हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने BBMP (वृहत बेंगलुरु महानगर पालिका), बीमा कंपनी और बागवानी विभाग को जिम्मेदार मानते हुए मुआवजे का भार साझा करने का आदेश दिया।

लेकिन BBMP इस फैसले से सहमत नहीं था। नगर निगम ने तर्क दिया कि यह मोटर वाहन दुर्घटना नहीं बल्कि प्राकृतिक कारणों से हुई घटना है। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 165 और 166 के तहत दावा तभी स्वीकार किया जा सकता है जब दुर्घटना और वाहन के उपयोग के बीच पर्याप्त कारणात्मक संबंध (Causal Connection) मौजूद हो।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दुर्घटना का मुख्य कारण वाहन नहीं बल्कि पेड़ की शाखा का गिरना था। ऑटो सिर्फ वह स्थान था जहां पीड़ित मौजूद था।

पीठ ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वही व्यक्ति बारिश से बचने के लिए पैदल पेड़ के नीचे खड़ा होता और शाखा उसके ऊपर गिर जाती, तब भी परिणाम वही होता। इसलिए केवल वाहन में मौजूद होना घटना को मोटर दुर्घटना नहीं बना देता।

‘Act of God’ सिद्धांत का जिक्र

सुनवाई के दौरान अदालत ने ‘Act of God’ यानी प्राकृतिक कारणों से होने वाली घटनाओं के सिद्धांत का भी उल्लेख किया।

कोर्ट ने माना कि नगर निकायों की जिम्मेदारी सड़क किनारे पेड़ों की देखरेख करना है, लेकिन यह अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है कि वे हर समय हर पेड़ और उसकी प्रत्येक शाखा पर नजर रखें।

सिर्फ इस आधार पर कि शाखा पुरानी थी और टूट गई, नगर निगम को स्वतः दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

फिर भी पीड़ित को मिली राहत

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी तौर पर BBMP को जिम्मेदार नहीं माना, लेकिन पीड़ित की गंभीर स्थिति को देखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया।

अदालत ने पाया कि पीड़ित जीवनभर के लिए गंभीर दिव्यांगता का शिकार हो गया है। दोनों पैरों का पक्षाघात और अन्य शारीरिक समस्याएं उसकी जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर चुकी हैं।

ऐसे में कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए मुआवजे की राशि 17.10 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी।

अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि पीड़ित को राहत पाने के लिए नई कानूनी लड़ाई न लड़नी पड़े।

भविष्य के मामलों पर क्या होगा असर?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य के हजारों मुआवजा मामलों के लिए मिसाल बनेगा। अब ऐसे मामलों में जहां वाहन केवल घटनास्थल की भूमिका निभा रहा हो और दुर्घटना का वास्तविक कारण कोई बाहरी या प्राकृतिक घटना हो, वहां MACT के तहत मुआवजा पाना कठिन हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि हर दुर्घटना को मोटर वाहन दुर्घटना नहीं माना जा सकता। साथ ही अदालत ने यह भी दिखाया कि कानून की व्याख्या करते समय मानवीय संवेदनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजा दावों की सीमाओं को स्पष्ट करता है। अदालत ने एक ओर कानूनी सिद्धांतों को मजबूती से लागू किया, वहीं दूसरी ओर पीड़ित की गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए मानवीय संवेदनशीलता भी दिखाई। यह निर्णय भविष्य के ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण नजीर साबित होगा।

TAGGED: BBMP, MACT क्लेम, कानूनी खबर, कोर्ट फैसला, पेड़ गिरने का मामला, भारत समाचार, मुआवजा नियम, मोटर वाहन अधिनियम, सड़क दुर्घटना, सुप्रीम कोर्ट
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