प्रेम कहानी का खौफनाक अंत: पति का कत्ल, प्रेमी की तलाश और बेटे का टूटा संसार
उत्तर प्रदेश: के कानपुर में सामने आया मनीष गुप्ता हत्याकांड अब सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह रिश्तों, भरोसे और परिवार के टूटने की दर्दनाक कहानी बन चुका है। फीलखाना क्षेत्र में रहने वाले कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस हत्याकांड के पीछे वैवाहिक विवाद और कथित प्रेम प्रसंग की कहानी छिपी हुई है।
मामले में गिरफ्तार पत्नी निहारिका इस समय जेल में है, जबकि पुलिस उस कथित युवक की तलाश में जुटी है जिससे उसके संबंध होने की बात परिजन लगातार कह रहे हैं। हालांकि अभी तक पुलिस को निहारिका का मोबाइल फोन बरामद नहीं हो सका है, जिससे जांच की रफ्तार पर सवाल उठने लगे हैं।
पति-पत्नी के रिश्ते में कब आई दरार?
जानकारी के अनुसार, मनीष गुप्ता और निहारिका ने वर्ष 2017 में प्रेम विवाह किया था। शुरुआती वर्षों में दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य रहा, लेकिन पिछले कुछ समय से उनके रिश्ते में तनाव बढ़ने लगा था।
परिजनों का आरोप है कि निहारिका किसी अन्य युवक से लगातार संपर्क में थी और घंटों फोन पर बातचीत करती थी। मनीष इस बात का विरोध करता था, जिसके चलते दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। कई बार मामला इतना बढ़ जाता था कि पुलिस तक बुलानी पड़ती थी।
5 जून का वह दिन जिसने सब कुछ बदल दिया
5 जून की दोपहर को दोनों के बीच एक बार फिर बहस शुरू हुई। आरोप है कि इसी दौरान निहारिका ने रसोई से चाकू उठाया और मनीष पर कई वार कर दिए।
सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि यह पूरी घटना उनके छह वर्षीय बेटे विष्णु के सामने हुई। गंभीर रूप से घायल मनीष किसी तरह अपने बेटे का हाथ पकड़कर घर से निकले और लगभग 500 मीटर दूर स्थित फीलखाना थाने पहुंचे।
थाने पहुंचकर उन्होंने पुलिस को पूरी घटना बताई। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ने के बाद 16 जून को उनकी मौत हो गई।
मोबाइल फोन बना जांच की सबसे बड़ी कड़ी
मनीष के पिता रामकिशोर का आरोप है कि पुलिस अभी तक निहारिका का मोबाइल बरामद नहीं कर सकी है। उनका कहना है कि मोबाइल मिलने पर कथित प्रेमी से हुई बातचीत, चैट और अन्य डिजिटल सबूत सामने आ सकते हैं।
हालांकि पुलिस का कहना है कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही मोबाइल भी जब्त कर लिया जाएगा।

दादा-दादी की सबसे बड़ी चिंता बना मासूम विष्णु
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित छह वर्षीय विष्णु हुआ है। एक तरफ उसने अपनी आंखों के सामने पिता को खो दिया, दूसरी तरफ उसकी मां जेल पहुंच गई।
मनीष के पिता रामकिशोर और मां मीरा अब अपने पोते के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि निहारिका को पति से समस्या थी तो वह कानूनी रास्ता अपनाकर तलाक ले सकती थी।
परिजनों के मुताबिक, “तलाक हो जाता तो कम से कम बच्चे के सिर से मां-बाप दोनों का साया नहीं उठता। अब बच्चा न पिता के साथ है और न मां के।”
जेल में अकेली है आरोपी महिला
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद निहारिका जेल में बंद है। बताया जा रहा है कि अब तक उसके मायके पक्ष से भी कोई उससे मिलने नहीं पहुंचा है।
जेल सूत्रों का कहना है कि वह काफी समय अकेले रहती है और ज्यादा बातचीत नहीं करती। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस जांच में जुटी, प्रेमी की भूमिका पर नजर
पुलिस अब इस पूरे मामले में कथित प्रेमी की भूमिका की भी जांच कर रही है। डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या हत्या की साजिश में कोई और भी शामिल था।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
निष्कर्ष:
कानपुर का यह हत्याकांड एक बार फिर दिखाता है कि रिश्तों में संवाद और कानूनी समाधान की जगह हिंसा चुनना कितनी बड़ी त्रासदी बन सकता है। एक परिवार बिखर गया, एक मासूम बच्चा अनिश्चित भविष्य के बीच खड़ा है और एक महिला सलाखों के पीछे पहुंच चुकी है। अब सबकी नजर पुलिस जांच और अदालत के फैसले पर टिकी है।

