नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। इस निमंत्रण के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि क्या प्रधानमंत्री मोदी इस ऐतिहासिक समारोह में शामिल होंगे या भारत किसी विशेष प्रतिनिधिमंडल को भेजेगा।
सूत्रों के अनुसार खामेनई के सम्मान में 5 जुलाई से 9 जुलाई तक ईरान के प्रमुख शहरों तेहरान, कोम और मशहद में कई धार्मिक, सांस्कृतिक और सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
ईरान सरकार ने इन आयोजनों को राष्ट्रीय स्तर का श्रद्धांजलि कार्यक्रम घोषित किया है। तेहरान में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित होंगी, जबकि धार्मिक शहर कोम में इस्लामी विद्वानों और धर्मगुरुओं की मौजूदगी में विशेष कार्यक्रम रखे जाएंगे। अंतिम और सबसे बड़ा श्रद्धांजलि समारोह 9 जुलाई को मशहद में आयोजित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया निमंत्रण भारत-ईरान संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। चाबहार पोर्ट परियोजना, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बना हुआ है।

हालांकि अब तक भारत सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस निमंत्रण को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विदेश मंत्रालय भी फिलहाल इस विषय पर चुप्पी साधे हुए है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस निमंत्रण पर क्या फैसला लेता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री मोदी इस समारोह में शामिल होते हैं तो यह भारत और ईरान के रिश्तों को नई मजबूती देने वाला कदम साबित हो सकता है। वहीं यदि किसी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को भेजा जाता है, तब भी इसे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक सम्मान और सहयोग के संकेत के रूप में देखा जाएगा।
अयातुल्ला अली खामेनई ईरान की राजनीति और धार्मिक व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने करीब तीन दशकों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में ईरान ने कई क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना किया और पश्चिम एशिया की राजनीति में अपनी मजबूत भूमिका बनाए रखी।
खामेनई के निधन के बाद पूरे ईरान में शोक का माहौल है। देशभर में लाखों लोग श्रद्धांजलि सभाओं में हिस्सा ले रहे हैं। ईरानी सरकार ने उनके सम्मान में कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों की घोषणा की है।
दुनिया भर के कई देशों के नेताओं की ओर से भी शोक संदेश भेजे गए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत इस निमंत्रण का क्या जवाब देता है। प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत का रुख बेहद अहम माना जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
निष्कर्ष:
ईरान के राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया निमंत्रण केवल एक औपचारिक आमंत्रण नहीं बल्कि भारत-ईरान संबंधों की अहम कड़ी भी माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या पीएम मोदी खामेनई की अंतिम विदाई में शामिल होंगे या भारत किसी अन्य स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा।

