ट्रम्प के बयान से फिर गरमाया पश्चिम एशिया, ईरान ने दिया तीखा जवाब; खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ा लाखों का सैलाब
नई दिल्ली/तेहरान/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में ईरान की पूरी शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व मौजूद थी और यदि अमेरिका चाहता तो केवल एक सैन्य हमले में पूरे नेतृत्व को समाप्त कर सकता था।
हालांकि ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ऐसा इसलिए नहीं किया क्योंकि “अगर सभी नेता खत्म हो जाते तो बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचता।” उनके इस बयान पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका पर सभ्यता, इतिहास और सम्मान की कमी का आरोप लगाया।
ट्रम्प ने क्या कहा?
एक मीडिया इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के पास उस समय पूरी जानकारी थी कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व अंतिम संस्कार में मौजूद रहेगा। उनके मुताबिक अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई का विकल्प था, लेकिन उसने संयम बरता।
ट्रम्प ने अंतिम संस्कार में शामिल लोगों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां बहाए जा रहे आंसू भी “शायद नकली” हो सकते हैं। यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
ईरान ने दिया करारा जवाब
ट्रम्प के बयान के कुछ ही घंटों बाद आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिक्रिया जारी की।
ईरान ने कहा,
“लोगों को मारा जा सकता है लेकिन विचारों को नहीं। जिन लोगों के पास न सभ्यता है, न इतिहास और न सम्मान, वे ऐसी ही भाषा बोलते हैं।”
ईरान ने ट्रम्प के बयान को उकसाने वाला और क्षेत्रीय शांति के लिए खतरनाक बताया।

खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब
तेहरान स्थित इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसल्ला में तीसरे दिन भी लाखों लोगों की भीड़ अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी। पूरे परिसर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे।
अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने “डेथ टू अमेरिका” और “डेथ टू इजराइल” जैसे नारे लगाए। भारी गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए पानी छिड़काव और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई।
100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल हुए शामिल
ईरानी मीडिया के अनुसार खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए।
ईरान सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं।
- हजारों अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती
- मेट्रो और सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा
- होटलों में विशेष छूट
- हजारों स्कूलों में ठहरने की व्यवस्था
- दूसरे शहरों से विशेष ट्रेनें
5 शहरों से गुजरेगी अंतिम यात्रा
ईरानी अधिकारियों के अनुसार खामेनेई की अंतिम यात्रा केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहेगी।
यात्रा क्रम इस प्रकार रहेगा—
- तेहरान
- कोम
- करबला
- नजफ
- मशहद
9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
परमाणु मुद्दे पर भी बढ़ा तनाव
अंतिम संस्कार के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता फिलहाल रोक दी है।
इसके अलावा ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को अपने प्रमुख परमाणु ठिकानों—
- फोर्डो
- नतांज
- इस्फहान
के निरीक्षण की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे परमाणु विवाद और अधिक जटिल हो सकता है।
ईरानी सेना की अमेरिका और इजराइल को चेतावनी
ईरानी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि युद्धविराम का इस्तेमाल सेना अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए कर रही है।
सेना ने साफ कहा कि यदि अमेरिका या इजराइल ने किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई की, तो ईरान उसका “निर्णायक और कड़ा जवाब” देगा।
रूस ने भी दी चेतावनी
रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ा तो बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी प्रभावित हो सकता है।
यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार का तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों की राय
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रम्प का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनाव चरम पर है।
यदि दोनों देशों के बीच बयानबाजी इसी तरह जारी रही तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रम्प का ताजा बयान और उस पर ईरान की तीखी प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि पश्चिम एशिया में तनाव अभी खत्म होने वाला नहीं है। खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी और परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई तनातनी आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकती है। दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि दोनों देश कूटनीतिक रास्ता अपनाते हैं या टकराव और गहरा होता है।

