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Home - राज्य - IWT के बीच भारत ने खोले बगलिहार डैम के गेट! चिनाब में उफान से पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन, बाढ़ या राहत?

IWT के बीच भारत ने खोले बगलिहार डैम के गेट! चिनाब में उफान से पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन, बाढ़ या राहत?

Rajat Kumar
Last updated: 2026/07/06 at 6:09 PM
Rajat Kumar
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5 Min Read
भारी बारिश के बाद जम्मू-कश्मीर में बगलिहार डैम के खुले गेटों से चिनाब नदी में छोड़ा जा रहा पानी।
जम्मू-कश्मीर में लगातार बारिश के बाद बगलिहार डैम से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। चिनाब नदी में बढ़े बहाव के बीच पाकिस्तान में संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा तेज है।
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चिनाब में उफान, बगलिहार डैम के गेट खुले; IWT के बीच पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

जम्मू-कश्मीर: में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण चिनाब नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। बढ़ते जलदबाव को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने रामबन जिले स्थित बगलिहार जलविद्युत परियोजना (Baglihar Dam) के तीन गेट खोल दिए हैं। यह कदम पूरी तरह जल प्रबंधन और सुरक्षा के मद्देनज़र उठाया गया है, लेकिन इसका असर पाकिस्तान तक महसूस किया जा सकता है, क्योंकि चिनाब नदी आगे पाकिस्तान में प्रवेश करती है।

Contents
चिनाब में उफान, बगलिहार डैम के गेट खुले; IWT के बीच पाकिस्तान की बढ़ी चिंताभारी बारिश से बढ़ा जलस्तर, गेट खोलना पड़ाक्या पाकिस्तान पर पड़ेगा असर?IWT स्थगित होने से क्यों बढ़ी चिंता?मई में बंद थे गेट, अब खुलने की नौबत क्यों आई?कृषि पर पड़ सकता है असरभारत की प्राथमिकता क्या है?क्या यह कूटनीतिक संदेश भी है?निष्कर्ष

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) सीमा-पार आतंकवाद समाप्त होने तक स्थगित रहेगी। ऐसे में डैम से पानी छोड़े जाने की खबर ने पाकिस्तान में जल प्रबंधन और संभावित बाढ़ को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।


भारी बारिश से बढ़ा जलस्तर, गेट खोलना पड़ा

पिछले कई दिनों से डोडा, किश्तवाड़, रामबन और आसपास के इलाकों में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। इसका सीधा असर चिनाब नदी पर पड़ा, जहां जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बगलिहार डैम के तीन गेट खोलकर अतिरिक्त पानी नियंत्रित तरीके से नदी में छोड़ा। अधिकारियों के अनुसार यह एक रूटीन फ्लड मैनेजमेंट प्रक्रिया है, ताकि बांध पर अत्यधिक दबाव न बने और किसी प्रकार की आपात स्थिति से बचा जा सके।

रामबन जिला प्रशासन ने बताया कि जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।


क्या पाकिस्तान पर पड़ेगा असर?

चिनाब नदी जम्मू-कश्मीर से निकलकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रवेश करती है। ऐसे में भारत से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी पाकिस्तान के निचले इलाकों तक पहुंचेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान यदि लगातार भारी बारिश होती रही और पानी का बहाव बढ़ा, तो पाकिस्तान के मराला हेडवर्क्स और आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ सकता है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बारिश के दौरान डैम से अतिरिक्त पानी छोड़ना सामान्य जल प्रबंधन प्रक्रिया होती है। इसका उद्देश्य किसी देश को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि बांध की सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण सुनिश्चित करना होता है।

भारी बारिश के बाद जम्मू-कश्मीर में बगलिहार डैम के खुले गेटों से चिनाब नदी में छोड़ा जा रहा पानी।
जम्मू-कश्मीर में लगातार बारिश के बाद बगलिहार डैम से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। चिनाब नदी में बढ़े बहाव के बीच पाकिस्तान में संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा तेज है।

IWT स्थगित होने से क्यों बढ़ी चिंता?

भारत ने हाल के महीनों में दोहराया है कि सिंधु जल संधि (IWT) तब तक प्रभावी रूप से स्थगित रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता।

इसके चलते पाकिस्तान को पहले की तरह रीयल-टाइम हाइड्रोलॉजिकल डेटा और अन्य तकनीकी सूचनाएं मिलने में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में अचानक बढ़ते जलप्रवाह का पूर्वानुमान लगाना उसके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, भारत ने पहले भी संभावित बाढ़ जैसी स्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक सूचनाएं साझा करने की परंपरा का पालन किया है, ताकि जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।


मई में बंद थे गेट, अब खुलने की नौबत क्यों आई?

करीब दो महीने पहले मई में भारत ने बगलिहार डैम के सभी गेट बंद रखे थे। उस समय पाकिस्तान में पानी की उपलब्धता को लेकर चर्चा तेज हो गई थी और सिंधु जल संधि को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई थी।

अब स्थिति पूरी तरह उलट गई है। मानसून की भारी बारिश के कारण डैम में पानी का दबाव बढ़ गया, जिसके बाद अतिरिक्त पानी छोड़ना जरूरी हो गया।

यह दिखाता है कि नदी प्रबंधन पूरी तरह मौसम और जलस्तर पर निर्भर करता है। सूखे और बाढ़—दोनों परिस्थितियों में संचालन की प्रक्रिया अलग होती है।


कृषि पर पड़ सकता है असर

चिनाब नदी पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र की कृषि के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि अचानक जलप्रवाह बढ़ता है तो निचले क्षेत्रों में खड़ी फसलों पर असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, यदि पर्याप्त जल उपलब्ध रहता है तो सिंचाई के लिए यह लाभकारी भी हो सकता है। इसलिए अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि मानसून के दौरान नदी का बहाव कितना बढ़ता है और पाकिस्तान अपने जल प्रबंधन की तैयारी किस तरह करता है।


भारत की प्राथमिकता क्या है?

भारत का कहना है कि बगलिहार परियोजना एक वैध जलविद्युत परियोजना है और इसका संचालन तकनीकी मानकों के अनुसार किया जाता है।

सरकार का जोर इस बात पर है कि:

  • बांध की सुरक्षा बनी रहे।
  • बाढ़ की स्थिति से स्थानीय लोगों की रक्षा हो।
  • बिजली उत्पादन प्रभावित न हो।
  • जल प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से किया जाए।

क्या यह कूटनीतिक संदेश भी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि IWT को लेकर भारत का रुख पहले से स्पष्ट है, लेकिन वर्तमान में डैम से पानी छोड़ा जाना मुख्यतः प्राकृतिक परिस्थितियों और जल प्रबंधन की आवश्यकता से जुड़ा कदम है। इसे सीधे किसी राजनीतिक कार्रवाई के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

फिर भी, सिंधु जल संधि पर जारी तनाव के कारण इस तरह की घटनाएं भारत-पाकिस्तान संबंधों में चर्चा का विषय बन जाती हैं।


निष्कर्ष

जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के कारण चिनाब नदी का जलस्तर बढ़ने पर बगलिहार डैम के गेट खोलना प्रशासनिक और तकनीकी आवश्यकता थी। इससे पाकिस्तान के कुछ निचले इलाकों में जलप्रवाह बढ़ सकता है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव बारिश की तीव्रता और स्थानीय जल प्रबंधन पर निर्भर करेगा। सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम जल कूटनीति और मानसूनी प्रबंधन—दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

TAGGED: Baglihar Dam, Breaking News, Chenab River, Flood News, India Pakistan Relations, Indus Water Treaty, IWT, Jammu Kashmir, Monsoon 2026, Pakistan
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