अहमदाबाद: कहते हैं कि जब कानून के रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो समाज में न्याय की उम्मीद पूरी तरह दम तोड़ देती है। गुजरात के अहमदाबाद जिले से एक ऐसा ही सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक नामी वकील पर आरोप लगा है कि उसने अपनी ही मुवक्किल (Client)—जो कि खुद एक नाबालिग रेप पीड़िता है—के साथ दुष्कर्म किया। आरोपी वकील उस पीड़िता को पूर्व में हुए एक सामूहिक बलात्कार के मामले में कोर्ट में न्याय दिलाने के लिए केस लड़ रहा था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी वकील को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना ने पूरे कानूनी जगत और नागरिक समाज को हिलाकर रख दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह खौफनाक वारदात अहमदाबाद जिले के ढोलका तालुका के एक गांव की है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़ित बच्ची की उम्र महज 13 साल है। उसके साथ इस बर्बरता की शुरुआत साल 2025 में हुई थी।
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सितंबर 2025 की घटना: सितंबर 2025 में जब बच्ची की उम्र केवल 12 साल थी, तब दो आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया था और उसके साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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गरीबी बनी लाचारी: पीड़ित बच्ची के माता-पिता बेहद गरीब हैं और मजदूरी करके अपना गुजारा करते हैं। कानूनी पेचीदगियों से अनजान और डरे हुए परिवार ने सरकारी वकील (Public Prosecutor) की मदद लेने के बजाय, निजी तौर पर 43 वर्षीय वकील प्रणयराज रणवीर से संपर्क किया और उससे केस लड़ने की गुहार लगाई।
फीस के बदले रखी ‘हैवानियत’ की शर्त
वकील प्रणयराज रणवीर ने इस केस को हाथ में लेने के लिए गरीब परिवार से 15 हजार रुपये की फीस मांगी। मजदूरी करने वाले माता-पिता के लिए यह रकम बहुत बड़ी थी। जब उन्होंने अपनी आर्थिक तंगी का हवाला देकर असमर्थता जताई, तो वकील ने अपनी घिनौनी साजिश के तहत एक शर्त रखी।
वकील ने कहा कि यदि वे फीस नहीं दे सकते, तो उन्हें अपनी बेटी को उसके घर पर घरेलू सहायिका (झाड़ू-पोछा और साफ-सफाई) के काम के लिए भेजना होगा। अपनी बच्ची को इंसाफ दिलाने की आस में मजबूर माता-पिता ने वकील की इस शर्त को स्वीकार कर लिया।
शर्मनाक कृत्य और धमकी: पुलिस जांच के अनुसार, जब मासूम बच्ची काम करने के लिए वकील के घर पहुंची, तो आरोपी प्रणयराज ने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। उसने डरा-धमकाकर बच्ची के कपड़े उतरवाए और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। वारदात को अंजाम देने के बाद हैवान वकील ने बच्ची को धमकी दी कि यदि उसने इस बारे में अपने माता-पिता या किसी और को बताया, तो वह कोर्ट में उसका केस खराब कर देगा और पहले वाले आरोपियों को जेल से बाहर निकलवा देगा।
डर की दीवार टूटी और आरोपी हुआ गिरफ्तार
डरी-सहमी बच्ची कई दिनों तक चुप रही, लेकिन आखिरकार उसने अपनी मां को इस आपबीती के बारे में बताया। यह सुनते ही माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपी वकील प्रणयराज रणवीर को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी वकील प्रणयराज कोई पेशेवर अपराधी की तरह पहले भी कई गंभीर मामलों में संलिप्त रहा है। उसके खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज मामलों की सूची लंबी है:
| अपराध का प्रकार | विवरण |
| पारिवारिक प्रताड़ना | पत्नी के साथ क्रूरता और दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज |
| शराबबंदी कानून | गुजरात मद्य निषेध (Prohibition Act) के उल्लंघन के मामले |
| अन्य अपराध | दंगा भड़काने, मारपीट और धमकी देने के कई मुकदमे |
निष्कर्ष:
यह घटना केवल एक वकील की हैवानियत की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे सिस्टम की उस बड़ी कमी को उजागर करती है जहाँ देश के गरीब और लाचार लोग मुफ्त कानूनी सहायता (Free Legal Aid) के अपने अधिकारों से पूरी तरह अनजान हैं। भारतीय संविधान के तहत हर नागरिक को मुफ्त कानूनी मदद पाने का अधिकार है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग ऐसे दलालों और हैवानों के चंगुल में फंस जाते हैं। वक्त आ गया है कि कानूनी बिरादरी और सरकार ऐसे अपराधियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित करे ताकि पीड़िता को असल मायनों में न्याय मिल सके।


