ओडिशा: के पवित्र शहर पुरी में गुरुवार को विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा 2026 का भव्य शुभारंभ हो गया। हर वर्ष की तरह इस बार भी भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। इस दिव्य अवसर पर देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पुरी की सड़कों पर उमड़ पड़ी।
रथयात्रा का आयोजन 16 जुलाई से शुरू होकर 27 जुलाई 2026 को नीलाद्री बीजे की परंपरा के साथ संपन्न होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं और उन्हें प्रत्यक्ष दर्शन देते हैं।
वैदिक मंत्रों के बीच शुरू हुई पारंपरिक रस्में
रथयात्रा से पहले श्रीजगन्नाथ मंदिर परिसर में सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और विशेष पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहा। पारंपरिक ‘पहांडी’ रस्म के तहत सबसे पहले भगवान बलभद्र को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाया गया। इसके बाद देवी सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ को भक्तों के जयघोष के बीच रथों तक लाया गया।
तीनों रथ—तालध्वज, देवदलन और नंदीघोष—को पहले ही मंदिर के सिंहद्वार के सामने सुसज्जित कर खड़ा किया गया था। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भगवानों के रथारोहण की प्रक्रिया पूरी की गई।
बारिश के बावजूद नहीं टूटा श्रद्धालुओं का उत्साह
इस वर्ष रथयात्रा पर बारिश का भी असर देखने को मिला। मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश गुरुवार सुबह तक जारी रही, जिससे पुरी के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। रथ भी बारिश में भीग गए, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।
भारी बारिश के बावजूद लाखों भक्त रथयात्रा में शामिल होने के लिए सुबह से ही बड़दांड पर जुटे रहे। भक्तों के जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा पुरी शहर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
रथयात्रा को लेकर प्रशासन ने इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया है। बताया जा रहा है कि इस बार 25 लाख से अधिक श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं।
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ भी अपनी माता के साथ भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद प्रशासन ने उत्कृष्ट व्यवस्था की है और उन्होंने देश की समृद्धि तथा विश्व शांति के लिए भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की।
वहीं बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि रथयात्रा भगवान जगन्नाथ की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं और सभी को समान रूप से आशीर्वाद देते हैं।
विदेशी श्रद्धालुओं ने भी जताई खुशी
रथयात्रा में इस बार बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु भी शामिल हुए। कई विदेशी भक्तों ने कहा कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन करना उनके जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने इस आयोजन को अद्भुत और अविस्मरणीय बताया।
प्रसिद्ध गायक सोनू निगम भी पहली बार पुरी रथयात्रा में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले कई बार भगवान जगन्नाथ पर आधारित भक्ति गीत गाए हैं, लेकिन पहली बार प्रत्यक्ष दर्शन का सौभाग्य मिला है। उन्होंने यहां की व्यवस्था और आध्यात्मिक माहौल की जमकर सराहना की।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
इतनी विशाल भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। हजारों पुलिसकर्मी, एनडीआरएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे मार्ग पर तैनात हैं।
रथयात्रा के दौरान एक श्रद्धालु के बेहोश होने पर एम्बुलेंस को तुरंत रास्ता देने के लिए लोगों ने अनुशासित तरीके से रास्ता खाली किया। इस दृश्य की सोशल मीडिया पर भी खूब सराहना हो रही है।
27 जुलाई तक चलेगा उत्सव
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर में नौ दिनों तक विराजमान रहेंगे। इसके बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से पुनः श्रीमंदिर लौटेंगे। अंत में नीलाद्री बीजे की परंपरा के साथ इस वर्ष की रथयात्रा का समापन होगा।
निष्कर्ष:
पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा 2026 श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम बन गई है। भारी बारिश के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक है। वैदिक अनुष्ठानों, भव्य रथों और दिव्य वातावरण के बीच भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देकर समरसता और मानवता का संदेश दे रहे हैं।

