गुजरात बना निवेशकों की पहली पसंद, नीति आयोग की रैंकिंग में महाराष्ट्र और तमिलनाडु को छोड़ा पीछे
देश: में निवेश और औद्योगिक विकास की दौड़ में गुजरात ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति साबित कर दी है। नीति आयोग द्वारा जारी पहले ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स 2026’ में गुजरात ने बड़े राज्यों की श्रेणी में 56.6 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि के साथ राज्य ने महाराष्ट्र (53.7) और तमिलनाडु (53.3) जैसे बड़े औद्योगिक राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब केंद्र सरकार ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में राज्यों में निवेश, उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही है। गुजरात की यह सफलता उद्योग-अनुकूल नीतियों, मजबूत बुनियादी ढांचे और निवेशकों के लिए आसान कारोबारी माहौल का परिणाम मानी जा रही है।
84 संकेतकों और 8 प्रमुख मानकों पर हुआ मूल्यांकन
नीति आयोग द्वारा तैयार किए गए इस सूचकांक में देश के 17 प्रमुख राज्यों का मूल्यांकन 84 संकेतकों (Indicators) और 8 प्रमुख पिलर्स (Pillars) के आधार पर किया गया। इन मानकों में नीति स्थिरता, उद्योगों के लिए बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स, बिजली, श्रम व्यवस्था, नवाचार, वित्तीय अनुशासन और निवेश प्रक्रियाओं की पारदर्शिता जैसे कई अहम पहलुओं को शामिल किया गया।
इन सभी मानकों पर गुजरात ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।
iNDEXTb की सिंगल-विंडो प्रणाली बनी सबसे बड़ी ताकत
रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात का Industrial Extension Bureau (iNDEXTb) निवेशकों को सिंगल-विंडो क्लीयरेंस की सुविधा प्रदान करता है। इससे उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक अनुमति और सरकारी प्रक्रियाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, पारदर्शी और सरल हो गई हैं।
इसके अलावा, उद्योगों को NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) समय पर और कम लागत में उपलब्ध कराने की सुव्यवस्थित व्यवस्था ने राज्य में कारोबार शुरू करना आसान बनाया है। यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा गुजरात पर लगातार मजबूत होता जा रहा है।
स्थिर श्रम व्यवस्था ने बढ़ाया उद्योगों का विश्वास
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य में अनिवार्य सेवाओं में हड़ताल पर प्रभावी नियंत्रण होने के कारण श्रम व्यवधान (Labour Disruption) बेहद कम देखने को मिलता है।
स्थिर श्रम व्यवस्था के चलते उद्योगों को उत्पादन में रुकावट का सामना कम करना पड़ता है, जिससे निवेशकों का विश्वास और मजबूत होता है।

विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना आकर्षण का केंद्र
गुजरात के औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी ताकत उसका आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर माना गया है।
राज्य में विकसित किए गए धोलेरा SIR, GIFT City, साणंद, दाहेज, झगड़िया और सायखा जैसे औद्योगिक क्लस्टर निवेशकों को विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इससे उद्योगों की स्थापना तेज, आसान और कम समय में संभव हो रही है।
इसी मजबूत व्यवस्था के कारण वाइब्रेंट गुजरात समिट लगातार देश और दुनिया के बड़े निवेशकों को आकर्षित करने में सफल रहा है।
बेहतर सड़क, रेल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क
रिपोर्ट के अनुसार गुजरात का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भी देश के सर्वश्रेष्ठ नेटवर्क में शामिल है।
- देश के कुल स्टेट हाईवे नेटवर्क का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा गुजरात में है।
- राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे की अनुमानित 635 किलोमीटर लंबाई राज्य में मौजूद है।
- भारत के कुल रेलवे नेटवर्क का लगभग 7 प्रतिशत हिस्सा गुजरात में स्थित है।
बेहतर सड़क, रेल और बंदरगाह सुविधाओं ने उद्योगों की सप्लाई चेन को अधिक तेज और प्रतिस्पर्धी बनाया है।
सस्ती बिजली बनी उद्योगों के लिए बड़ा फायदा
गुजरात में औद्योगिक इकाइयों को मिलने वाली बिजली राष्ट्रीय औसत की तुलना में लगभग 29 प्रतिशत सस्ती है।
इसके साथ ही राज्य में औसतन 23.8 घंटे प्रतिदिन बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है, जो बड़े राज्यों के औसत से अधिक है।
कम लागत और निर्बाध बिजली आपूर्ति उद्योगों के लिए उत्पादन लागत कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
निर्यात, MSME और वित्तीय अनुशासन ने बढ़ाया भरोसा
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में गुजरात की हिस्सेदारी लगभग 31 प्रतिशत है, जो राज्य की मजबूत औद्योगिक क्षमता को दर्शाती है।
वित्त वर्ष 2019-24 के दौरान गुजरात की GSDP वृद्धि दर देश में तीसरे स्थान पर रही। वहीं राज्य का प्रति व्यक्ति GSDP ₹2,64,232 है, जो बड़े राज्यों के औसत से लगभग 67 प्रतिशत अधिक बताया गया है।
MSME सेक्टर में भी गुजरात की मजबूत उपस्थिति निवेश और रोजगार दोनों को गति दे रही है।
वित्तीय अनुशासन के मामले में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2024 में गुजरात का राजकोषीय घाटा GSDP का केवल 2.81 प्रतिशत रहा, जबकि कुल देनदारियां बड़े राज्यों के औसत से काफी कम दर्ज की गईं।
नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मिला बढ़ावा
राज्य सरकार ने नवाचार और तकनीकी विकास पर भी विशेष ध्यान दिया है।
वित्त वर्ष 2025 तक गुजरात में 614 अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) स्थापित की जा चुकी हैं। प्रति एक लाख आबादी पर इन लैब्स की उपलब्धता बड़े राज्यों के औसत से अधिक है। इससे भविष्य की तकनीकों, स्टार्टअप और नवाचार आधारित उद्योगों को मजबूत आधार मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यही नवाचार आधारित इकोसिस्टम भविष्य में गुजरात को वैश्विक निवेश का और बड़ा केंद्र बना सकता है।


