झूला हादसा: ने शनिवार शाम हरियाणा के फरीदाबाद में अफरा-तफरी मचा दी। प्रसिद्ध सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट मेले में अचानक एक बड़ा झूला गिर गया, जिसमें एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई, जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूरजकुंड मेले में झूला हादसा ने एक बार फिर सार्वजनिक मेलों में सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शनिवार शाम करीब सवा छह बजे हुए इस हादसे ने मेले की रौनक को मातम में बदल दिया। हजारों दर्शकों की मौजूदगी में झूला गिरने से चीख-पुकार मच गई। प्रशासन ने तत्काल मेला ग्राउंड खाली कराया और जांच के आदेश दिए।
सूरजकुंड मेले में झूला हादसा: कैसे हुआ दर्दनाक हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, “सुनामी” नामक झूले पर करीब 18 लोग सवार थे। झूला ऊपर से नीचे आते समय अचानक संतुलन खो बैठा और जोरदार तरीके से नीचे गिर गया। झूले की रेलिंग टूटकर लोगों पर आ गिरी, जिससे कई लोग उसके नीचे दब गए।
घटना के तुरंत बाद मेला परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। मौके पर मौजूद दुकानदारों और सुरक्षाकर्मियों ने बिना देर किए बचाव कार्य शुरू किया।
इससे पहले भी सूरजकुंड मेले की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। LRN24.com पर प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में मेले की तैयारियों और सुरक्षा मानकों पर प्रशासनिक दावों का जिक्र किया गया था
मृतक पुलिस इंस्पेक्टर की पहचान और घायलों की स्थिति
इस हादसे में जान गंवाने वाले पुलिस इंस्पेक्टर की पहचान जगदीश प्रसाद के रूप में हुई है। वह पलवल जिले के चांदहट थाना के SHO थे। हादसे के समय वे मौके पर तैनात थे और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे।
घायलों को तुरंत निजी अस्पतालों और बादशाह खान सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, हालांकि अधिकांश खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
एक अन्य संबंधित खबर में LRN24.com ने हरियाणा में सार्वजनिक मेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें झूलों की तकनीकी जांच पर जोर दिया गया था

प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?
“झूला गिरते ही चीख-पुकार मच गई”
घटना के चश्मदीद दुकानदार राघव ने बताया कि वे अपने स्टॉल पर ग्राहकों को अटेंड कर रहे थे। अचानक जोरदार आवाज आई और झूला नीचे गिर गया। रेलिंग में अटकने के बाद लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे।
“कुछ लोगों को उतारा, फिर झूला पूरी तरह गिर गया”
राघव के अनुसार, उन्होंने और अन्य लोगों ने मिलकर 7–8 लोगों को सुरक्षित नीचे उतारा। तभी झूला दोबारा नीचे आया और पूरी तरह गिर गया। इस दौरान उन्हें भी हल्की चोट आई।
प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। मेला ग्राउंड को एहतियातन खाली करा दिया गया।
रात करीब 10 बजे पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने मेला परिसर का निरीक्षण किया और बाद में अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने कहा,
“पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं। ADC की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है।”
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सभी घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है।
सरकारी जानकारी और आधिकारिक अपडेट के लिए हरियाणा पर्यटन विभाग और प्रशासन की वेबसाइट Haryana Tourism ( Link – Government Authority) का हवाला दिया गया है।
DC और नोडल अधिकारी ने क्या कहा?
फरीदाबाद के DC आयुष सिन्हा ने बताया कि इस हादसे में वेंडर की लापरवाही की भी जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
वहीं, मेले के नोडल अधिकारी हरविंद्र यादव ने दावा किया कि झूलों की रोजाना जांच के लिए कमेटी बनाई गई थी और निरीक्षण के बाद ही उन्हें चलाने की अनुमति दी जाती थी। अब यह जांच का विषय है कि सुरक्षा मानकों में चूक कहां हुई।
इसी दिन गिरा मेले का गेट भी बना सवाल
गौर करने वाली बात यह है कि शनिवार शाम को ही मेले के गेट नंबर-2 के पास बना डिजाइनर गेट भी गिर गया था। हालांकि, उस घटना में केवल एक व्यक्ति को मामूली चोट आई थी। लगातार हो रही घटनाओं ने मेले की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निष्कर्ष:
सूरजकुंड मेले में झूला हादसा न केवल एक दुखद दुर्घटना है, बल्कि यह सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण भी है। एक अनुभवी पुलिस अधिकारी की मौत और दर्जनों लोगों का घायल होना प्रशासन और आयोजकों के लिए चेतावनी है।
अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे दोबारा हो सकते हैं।

