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Reading: Middle East Tension: ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान आएंगे भारत, BRICS सम्मेलन में लेंगे हिस्सा
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Home - राज्य - Middle East Tension: ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान आएंगे भारत, BRICS सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

Middle East Tension: ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान आएंगे भारत, BRICS सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

Rajat Kumar
Last updated: 2026/08/14 at 3:30 PM
Rajat Kumar
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5 Min Read
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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के भारत दौरे की खबर ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। पेजेशकियान सितंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आएंगे। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जाएगी।

Contents
BRICS सम्मेलन में शामिल होंगे पेजेशकियानमध्य पूर्व संकट के बीच क्यों अहम है दौरा?ईरान को भारत से उम्मीदभारत बन सकता है संवाद का अहम माध्यम?BRICS मंच पर भी होगी नजरभारत-ईरान संबंधों के लिए भी अहमक्या कोई बड़ा कूटनीतिक संदेश मिलेगा?निष्कर्ष

ईरानी राष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे समय में होने जा रहा है, जब पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ऐसे में पेजेशकियान की भारत यात्रा को सिर्फ BRICS बैठक तक सीमित नहीं देखा जा रहा है। इससे भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

BRICS सम्मेलन में शामिल होंगे पेजेशकियान

ईरानी सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान आगामी BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली का दौरा करेंगे।

भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन में BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन व्यवस्था, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों जैसे कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

ईरान के लिए भी BRICS मंच लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति पेजेशकियान की व्यक्तिगत मौजूदगी ईरान की BRICS में सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।

मध्य पूर्व संकट के बीच क्यों अहम है दौरा?

पेजेशकियान का भारत दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। क्षेत्रीय तनाव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ता है।

भारत के लिए पश्चिम एशिया का महत्व कई स्तरों पर है। भारत के इस क्षेत्र के देशों के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंध हैं। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी पश्चिम एशिया में रहते और काम करते हैं। ऐसे में क्षेत्र में स्थिरता भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों से सीधे जुड़ी हुई है।

इसी वजह से ईरानी राष्ट्रपति का भारत दौरा कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरान को भारत से उम्मीद

ईरान ने संकेत दिया है कि वह मौजूदा संकट को कम करने के प्रयासों में भारत की रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी भारत की संभावित भूमिका को लेकर सकारात्मक रुख व्यक्त किया है।

अराघची ने जून में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत दौरे के दौरान कहा था कि ईरान संकट को कम करने में भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेगा।

यह बयान महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवादों में बातचीत और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की नीति पर जोर देता रहा है।

भारत बन सकता है संवाद का अहम माध्यम?

ईरान की ओर से भारत की भूमिका को लेकर दिया गया संकेत नई दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर भी माना जा सकता है। भारत के ईरान के साथ लंबे समय से संबंध हैं और दोनों देशों के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक सहयोग के कई क्षेत्र हैं।

वहीं भारत के पश्चिम एशिया के अन्य महत्वपूर्ण देशों के साथ भी मजबूत संबंध हैं। ऐसे में नई दिल्ली के पास विभिन्न पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत किसी एक पक्ष का समर्थन करेगा। भारत की पारंपरिक विदेश नीति बातचीत, कूटनीति और तनाव कम करने के प्रयासों पर केंद्रित रही है।

BRICS मंच पर भी होगी नजर

पेजेशकियान की मौजूदगी BRICS सम्मेलन को पश्चिम एशिया के मुद्दों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बना सकती है। BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक राजनीति और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी इसकी भूमिका बढ़ी है।

ईरान के लिए BRICS में सक्रिय भागीदारी पश्चिमी देशों के प्रभाव से इतर अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत करने का अवसर भी है। वहीं भारत के लिए यह सम्मेलन वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों पर अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच होगा।

भारत-ईरान संबंधों के लिए भी अहम

पेजेशकियान के दौरे के दौरान भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बातचीत की संभावना रहेगी। दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व रखते हैं।

व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण रहे हैं। चाबहार बंदरगाह भी भारत और ईरान के बीच रणनीतिक सहयोग का प्रमुख उदाहरण है।

ऐसे में राष्ट्रपति स्तर की यात्रा दोनों देशों को अपने संबंधों की समीक्षा और आगे की दिशा तय करने का अवसर दे सकती है।

क्या कोई बड़ा कूटनीतिक संदेश मिलेगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि सितंबर में होने वाले BRICS सम्मेलन के दौरान क्या भारत और ईरान के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर कोई बड़ा कूटनीतिक संदेश सामने आएगा।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारत किसी मध्यस्थता की औपचारिक भूमिका निभाएगा या नहीं। लेकिन ईरान की ओर से भारत की रचनात्मक भूमिका का स्वागत किए जाने का संकेत यह जरूर बताता है कि नई दिल्ली को क्षेत्रीय संवाद में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।

आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और सम्मेलन के एजेंडे से यह तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

निष्कर्ष

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का सितंबर 2026 में भारत दौरा कई मायनों में अहम होने जा रहा है। नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में उनकी मौजूदगी से भारत-ईरान संबंधों को नई गति मिलने की संभावना है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने में भारत की संभावित भूमिका पर भी दुनिया की नजर रहेगी। हालांकि, भारत की वास्तविक भूमिका और किसी संभावित पहल की तस्वीर सम्मेलन के दौरान ही अधिक स्पष्ट होगी।

TAGGED: BRICS, BRICS Summit 2026, India Iran Relations, India News, Iran News, Iran President, Masoud Pezeshkian, Middle East Tension, New Delhi, West Asia Crisis, ईरान राष्ट्रपति, पेजेशकियान, भारत-ईरान संबंध
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