पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके की निगरानी अब पहले से ज्यादा व्यवस्थित और डिजिटल होने जा रही है। शिक्षा विभाग नवंबर से एक नई डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए एक विशेष आईटी सिस्टम और डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है, जिसके जरिए स्कूलों में होने वाली निगरानी की रिपोर्ट सीधे शिक्षा विभाग तक पहुंचाई जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं होगा कि शिक्षक स्कूल में मौजूद हैं या नहीं, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि कक्षा में बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है और किस तरीके से पढ़ाया जा रहा है। शिक्षा विभाग के स्तर पर इस रिपोर्ट की नियमित समीक्षा किए जाने की योजना है।
नवंबर से शुरू हो सकती है नई व्यवस्था
शिक्षा विभाग के मुताबिक इस पूरी व्यवस्था को नवंबर तक आईटी सिस्टम के रूप में तैयार करने का लक्ष्य है। सिस्टम तैयार होने के बाद स्कूलों में शिक्षकों की मॉनिटरिंग शुरू की जाएगी।
इसके लिए एक विशेष डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है। निगरानी के दौरान जुटाई गई जानकारी इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज की जाएगी। इसके बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी और शिक्षा मंत्री स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा की जा सकेगी।
इस व्यवस्था से स्कूलों की निगरानी को कागजी रिपोर्ट से आगे ले जाकर डिजिटल तरीके से करने की कोशिश की जा रही है।
अतिरिक्त शिक्षकों को बनाया जाएगा मॉनिटरिंग टीम का हिस्सा
शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था के लिए अतिरिक्त शिक्षकों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है। विभाग का आकलन है कि शिक्षकों की तबादला प्रक्रिया पूरी होने और नई नियुक्तियों के बाद पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध हो सकते हैं।
इन शिक्षकों का चयन करने के बाद उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन्हें स्कूलों की मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदारी दी जाएगी।
खास बात यह होगी कि मॉनिटरिंग के लिए शिक्षकों को उनके अपने जिले के बजाय दूसरे जिलों के स्कूलों में भेजा जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर किसी तरह के पक्षपात की संभावना कम करने की कोशिश की जाएगी।

एक दिन में तीन स्कूलों का करना होगा दौरा
मॉनिटरिंग टीम में शामिल शिक्षक एक दिन में करीब तीन स्कूलों का भ्रमण करेंगे। वहां जाकर वे कक्षा में चल रही पढ़ाई का जायजा लेंगे।
उन्हें यह देखना होगा कि शिक्षक पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ा रहे हैं या नहीं और बच्चों को पढ़ाने का तरीका कैसा है। इसके साथ ही कक्षा में बच्चों की भागीदारी पर भी ध्यान दिया जाएगा।
मॉनिटरिंग के दौरान यह भी देखा जाएगा कि बच्चे शिक्षक से सवाल कर रहे हैं या नहीं। इसका मकसद कक्षा में केवल शिक्षक के पढ़ाने के बजाय बच्चों की वास्तविक भागीदारी का आकलन करना भी होगा।
सबसे खास होगा ‘काउंटर चेक’
शिक्षा विभाग ने निगरानी व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए काउंटर चेक का प्रावधान भी रखा है।
इसके तहत किसी स्कूल में एक शिक्षक द्वारा की गई मॉनिटरिंग के बाद उसी स्कूल की दोबारा जांच के लिए दूसरे शिक्षक को भेजा जाएगा। दोनों मॉनिटरिंग रिपोर्ट की तुलना की जाएगी।
अगर दोनों रिपोर्ट में समानता मिलती है, तो विभाग के स्तर पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य मॉनिटरिंग रिपोर्ट की विश्वसनीयता बढ़ाना है।
स्कूल को पहले से नहीं मिलेगी जानकारी
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जिस स्कूल की मॉनिटरिंग की जानी है, उसे इसकी जानकारी पहले से नहीं दी जाएगी।
यानी मॉनिटरिंग टीम के शिक्षक कब और किस स्कूल में पहुंचेंगे, इसकी जानकारी संबंधित विद्यालय को पहले से नहीं होगी। विभाग का मानना है कि इससे वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
अगर स्कूल को पहले से निरीक्षण की जानकारी मिल जाए तो सामान्य दिनों की तुलना में अलग तैयारी की संभावना रहती है। अचानक निरीक्षण से कक्षा में पढ़ाई की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है।
शिक्षा मंत्री स्तर पर होगी निगरानी
इस पूरी व्यवस्था की रिपोर्ट डिजिटल डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस डेटा को देख सकेंगे और जरूरत के अनुसार स्कूलों की स्थिति की समीक्षा कर सकेंगे।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया है कि पूरी व्यवस्था आईटी तंत्र के माध्यम से संचालित होगी। उनका कहना है कि सिस्टम को नवंबर में तैयार करने के बाद मॉनिटरिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
शिक्षकों के साथ छात्रों की पढ़ाई पर भी फोकस
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फोकस कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता पर बताया जा रहा है। आमतौर पर स्कूल निरीक्षण में शिक्षक की उपस्थिति, रजिस्टर और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों पर ध्यान दिया जाता है। अब विभाग कक्षा के अंदर होने वाली पढ़ाई को भी मॉनिटरिंग के केंद्र में लाने की तैयारी कर रहा है।
यदि यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो शिक्षा विभाग के पास अलग-अलग स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकता है।
निष्कर्ष
बिहार शिक्षा विभाग की नई डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर नजर रखने की दिशा में बड़ा बदलाव हो सकती है। नवंबर से प्रस्तावित इस सिस्टम में अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरे जिलों के स्कूलों में भेजकर कक्षा का निरीक्षण कराया जाएगा। एक दिन में तीन स्कूलों के दौरे, अचानक मॉनिटरिंग और काउंटर चेक जैसी व्यवस्थाओं के जरिए रिपोर्ट को ज्यादा विश्वसनीय बनाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना होगा कि आईटी सिस्टम लागू होने के बाद यह व्यवस्था स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने में कितनी प्रभावी साबित होती है।

