नई दिल्ली। ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब और तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत के गायन को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस और सोनिया गांधी पर सवाल उठाए थे। अब विपक्षी दलों के नेताओं ने बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है।
तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने बीजेपी से सवाल किए और कहा कि राष्ट्रगीत को लेकर राजनीति करने के बजाय इसके ऐतिहासिक संदर्भ और वास्तविक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने बीजेपी के आरोपों को बताया राजनीति
पटना में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि जब ‘वंदे मातरम’ लिखा गया था, उस समय मौजूदा बीजेपी के नेता राजनीतिक रूप से उस भूमिका में नहीं थे।
अखिलेश प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया कि बीजेपी इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से विवाद का रूप दे रही है। उनके मुताबिक, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस का देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने बीजेपी पर राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने का आरोप लगाया।
कीर्ति आजाद ने बीजेपी से पूछा सवाल
दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने भी बीजेपी के आरोपों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि क्या बीजेपी इस मुद्दे के जरिए लोगों को भावनात्मक रूप से उकसाना चाहती है।
कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि बीजेपी के कुछ कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के बजाय फिल्म ‘वंदे मातरम’ से जुड़ा गीत बजाए जाने के बावजूद बीजेपी नेताओं ने उस पर सवाल नहीं उठाए।
उन्होंने सवाल किया कि अगर राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर इतना जोर दिया जा रहा है तो ऐसे मामलों पर भी समान रुख क्यों नहीं अपनाया गया।
‘पहले सभी छह पद गाकर दिखाएं’
कीर्ति आजाद ने बीजेपी नेताओं को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि वे सामने आएं और ‘वंदे मातरम’ के सभी छह पद गाकर दिखाएं।
उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि वह खुद भी सभी छह पद पूरे तौर पर गाने में सक्षम नहीं हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी राष्ट्रभक्ति कम हो जाती है।
उनका तर्क था कि राष्ट्रभक्ति को केवल इस बात से नहीं मापा जाना चाहिए कि कोई व्यक्ति गीत के कितने पद याद रखता है। उन्होंने बीजेपी पर इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद में बदलने का आरोप लगाया।

संजय राउत ने भी बीजेपी पर साधा निशाना
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भी ‘वंदे मातरम’ विवाद को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा।
उन्होंने गीत के पदों और उसे गाए जाने को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ के सभी पदों को गाना हर परिस्थिति में जरूरी नहीं माना गया था।
राउत ने संसद में कानून पारित होने के दौरान मौजूदगी को लेकर भी बीजेपी नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर ‘वंदे मातरम’ का सम्मान इतना महत्वपूर्ण है तो संसद में इससे जुड़े कानून पर चर्चा के दौरान प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठने चाहिए।
आजादी की लड़ाई से जुड़े नारों का किया जिक्र
संजय राउत ने अपने बयान में स्वतंत्रता आंदोलन का संदर्भ भी दिया। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के बीच ‘वंदे मातरम’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसे नारे बेहद लोकप्रिय थे।
उनके मुताबिक, स्वतंत्रता आंदोलन का उद्देश्य देश को आजाद कराना था और उस दौर में इन नारों ने लोगों में जोश और जागरूकता पैदा करने का काम किया।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय उसके ऐतिहासिक महत्व को समझने की जरूरत है।
बीजेपी और विपक्ष के बीच बढ़ी तकरार
‘वंदे मातरम’ को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत के गायन को कथित तौर पर बीच में रोकने की कोशिश हुई और कांग्रेस नेतृत्व का रवैया राष्ट्रगीत के प्रति सम्मानजनक नहीं था।
विपक्षी नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे को इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
इस पूरे विवाद में सोनिया गांधी का नाम भी बीजेपी के आरोपों के केंद्र में रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल बीजेपी के दावों को राजनीतिक आरोप बताते हुए खारिज कर रहे हैं।
विवाद आगे किस दिशा में जाएगा?
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सामने आए इस विवाद ने राजनीतिक बहस को एक बार फिर राष्ट्रगीत, राष्ट्रवाद और राजनीतिक दलों की भूमिका के सवाल तक पहुंचा दिया है।
एक तरफ बीजेपी इसे ‘वंदे मातरम’ के सम्मान से जोड़कर कांग्रेस पर निशाना साध रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रहा है।
अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या संसद और राजनीतिक मंचों पर इसे लेकर और तीखी बहस देखने को मिलती है।
निष्कर्ष
‘वंदे मातरम’ गायन को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच सियासी टकराव बढ़ गया है। बीजेपी के आरोपों के जवाब में कीर्ति आजाद ने बीजेपी नेताओं को गीत के सभी छह पद गाने की चुनौती दी, जबकि संजय राउत ने भी बीजेपी के रुख पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रगीत के सम्मान को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रही है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

