नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बारिश के बीच मच्छर जनित बीमारियों के साथ-साथ फ्लू के मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 अगस्त को दिल्ली में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के 48 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही 2026 में अब तक दर्ज H1N1 मामलों की कुल संख्या 3,629 पहुंच गई है।
कुल मामलों में 3,054 मरीज दिल्ली के हैं, जबकि 575 मामले दिल्ली के बाहर के बताए गए हैं। वहीं, फ्लूएंजा ए और बी के कुल मामलों की संख्या भी बढ़कर 5,029 हो गई है।
हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को घबराने के बजाय सावधानी बरतने की जरूरत है। सामान्य सर्दी-जुकाम या हल्के बुखार में बिना जरूरत अस्पताल पहुंचने के बजाय लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है। लेकिन तेज बुखार, अत्यधिक ठंड लगना, सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
एक तरफ H1N1, दूसरी तरफ मच्छरों का बढ़ता प्रकोप
दिल्ली में अगस्त के दौरान सिर्फ फ्लू ही चिंता का कारण नहीं रहा। बारिश और जगह-जगह जमा पानी के बीच मच्छरों की संख्या बढ़ने से डेंगू और मलेरिया के मामलों में भी तेज उछाल देखने को मिला है।
MCD के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक डेंगू के 311 मामले सामने आए हैं। इनमें अकेले अगस्त में 90 मामले दर्ज किए गए। जुलाई में डेंगू के 40 मामले थे, यानी अगस्त में यह संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई।
महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल में 52, मई में 35, जून में 39 और जुलाई में 40 डेंगू केस सामने आए थे। अगस्त में 90 मामलों के साथ अचानक हुई बढ़ोतरी ने मच्छर नियंत्रण अभियान के सामने चुनौती बढ़ा दी है।

पश्चिमी दिल्ली में सबसे ज्यादा डेंगू के मामले
क्षेत्रवार आंकड़ों में पश्चिमी क्षेत्र 47 मामलों के साथ सबसे आगे है। इसके बाद मध्य क्षेत्र में 39, उत्तरी शाहदरा में 32 और सिविल लाइंस में 28 मामले सामने आए हैं।
दक्षिणी क्षेत्र में 21, सिटी एसपी में 19, नजफगढ़ में 18, रोहिणी में 17 और नरेला में 16 मामले दर्ज किए गए हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि मच्छर जनित बीमारियों का असर राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल रहा है।
मलेरिया ने भी अगस्त में पकड़ी रफ्तार
डेंगू के साथ मलेरिया के मामलों में भी अगस्त में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जनवरी से जुलाई के बीच मलेरिया के कुल 66 मामले सामने आए थे, जबकि अकेले अगस्त में 53 नए मामले दर्ज हो चुके हैं।
इस तरह वर्ष 2026 में अब तक मलेरिया के कुल मामले 119 हो गए हैं। यानी कुल मामलों का लगभग आधा हिस्सा अगस्त में ही सामने आया है।
क्षेत्रवार आंकड़ों में पश्चिमी क्षेत्र 22 मामलों के साथ सबसे आगे है। दक्षिणी क्षेत्र में 17 और मध्य क्षेत्र में 16 मामले सामने आए हैं।
चिकनगुनिया भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं
चिकनगुनिया के मामले डेंगू और मलेरिया की तुलना में कम हैं, लेकिन अगस्त में इसकी रफ्तार भी बढ़ी है।
आंकड़ों के अनुसार जनवरी में एक, फरवरी में एक, मार्च में तीन, अप्रैल में दो, मई में चार, जून में तीन और जुलाई में तीन मामले सामने आए थे। अगस्त में अब तक 8 मामले दर्ज हो चुके हैं।
इस तरह इस साल चिकनगुनिया के कुल मामलों की संख्या 22 पहुंच गई है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
स्वाइन फ्लू जैसे वायरल संक्रमण में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, थकान और ठंड लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं डेंगू और मलेरिया में भी तेज बुखार प्रमुख लक्षण हो सकता है।
लेकिन हर बुखार का कारण H1N1, डेंगू या मलेरिया हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से बीमारी तय करने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह और जांच कराना बेहतर है।
विशेष रूप से सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी, शरीर में पानी की कमी या हालत तेजी से बिगड़ने पर चिकित्सा सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
बारिश के मौसम में सावधानी सबसे जरूरी
मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने देना महत्वपूर्ण है। कूलर, गमले, छत, पुराने टायर, खुले कंटेनर और ऐसी जगहों की नियमित जांच करनी चाहिए जहां पानी कुछ दिनों तक जमा रह सकता है।
साथ ही मच्छर से बचने के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनना, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करना और घर के आसपास साफ-सफाई रखना उपयोगी हो सकता है।
निष्कर्ष
दिल्ली में H1N1 के 48 नए मामले सामने आने के बाद इस साल स्वाइन फ्लू के कुल मामले 3,629 तक पहुंच गए हैं। दूसरी ओर अगस्त में डेंगू के 90 और मलेरिया के 53 मामले सामने आना भी चिंता का विषय है।
हालांकि इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में किसी एक बीमारी की आपात स्थिति पैदा हो गई है। लेकिन बारिश के मौसम में संक्रमण और मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए सावधानी जरूरी है।
बुखार या अन्य गंभीर लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

