नई दिल्ली। वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत वर्ष 2026–27 का आम बजट, विशेषकर उसका रक्षा खंड, केवल आंकड़ों की प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह भारत की बदलती सुरक्षा नीति और सैन्य दृष्टिकोण का स्पष्ट घोषणापत्र है। हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक युद्धों में त्वरित निर्णय, तकनीकी श्रेष्ठता और आक्रामक क्षमता ही निर्णायक भूमिका निभाती है।
इसी रणनीतिक अनुभव के आधार पर रक्षा बजट में ऐतिहासिक 15 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे कुल रक्षा आवंटन बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। कुल सरकारी व्यय का 14.67 प्रतिशत रक्षा पर खर्च होना यह संकेत देता है कि भारत अब अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
🌍 बदलती वैश्विक राजनीति और भारत की नई सोच
यूक्रेन युद्ध का लंबा खिंचना, पश्चिम एशिया में अस्थिरता और महाशक्तियों की आक्रामक रणनीतियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि आज की दुनिया में कमजोर राष्ट्रों के लिए कोई सुरक्षित क्षेत्र नहीं है। भारत सरकार ने इस यथार्थ को स्वीकार करते हुए यह सिद्धांत अपनाया है कि—
“शक्ति ही शांति की सबसे विश्वसनीय गारंटी है।”
📊 GDP के 2% से अधिक रक्षा व्यय—रणनीतिक संकेत
वैश्विक तुलना में देखें तो अमेरिका GDP का लगभग 3.4%, पाकिस्तान 2.8%, रूस 7% और इज़रायल 8% से अधिक रक्षा पर खर्च कर रहे हैं। ऐसे में भारत द्वारा GDP के 2 प्रतिशत से अधिक रक्षा निवेश चीन और पाकिस्तान—दोनों से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों को संतुलित करने की दिशा में एक समयबद्ध और आवश्यक कदम है।

⚙️ बजट संरचना: तात्कालिक तैयारी + दीर्घकालिक स्थिरता
रक्षा बजट का वितरण भारत की स्पष्ट रणनीति दर्शाता है—
-
28%: नए हथियार व सैन्य प्लेटफॉर्म
-
25%: संचालन, वेतन व दैनिक आवश्यकताएँ
-
22%: पूर्व सैनिकों की पेंशन व कल्याण
-
शेष: सीमा अवसंरचना और रक्षा अनुसंधान
यह संतुलन दर्शाता है कि भारत युद्ध की तैयारी के साथ-साथ दीर्घकालिक सैन्य स्थायित्व पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है।
🚀 सेना के आधुनिकीकरण पर बड़ा दांव
पूंजीगत व्यय (Capital Outlay) में 22% वृद्धि कर 2.19 लाख करोड़ रुपये किए गए हैं। यह ‘जनरेशन-जंप’ आधुनिकीकरण का स्पष्ट संकेत है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान की गई आपातकालीन खरीद—ड्रोन, गोला-बारूद, निगरानी उपकरण—की लंबित वित्तीय देनदारियों का समायोजन भी इस वृद्धि का अहम कारण है।
✈️ वायु, जल और थल—तीनों मोर्चों पर निर्णायक बढ़त
-
वायुसेना: 53,733 करोड़ रुपये—114 राफेल, AMCA इंजन, मीटियॉर व स्कैल्प मिसाइलें
-
नौसेना: 25,030 करोड़ रुपये—INS विक्रांत के लिए राफेल-M, Project-75(I) पनडुब्बियाँ
-
थलसेना: ज़ोरावर लाइट टैंक, MQ-9B ड्रोन, SiG-716 राइफल्स, राष्ट्रीय राइफल्स के लिए विशेष प्रावधान
🛡️ सैनिक कल्याण और भविष्य की तैयारी
राजस्व बजट में 17% वृद्धि कर इसे 3.06 लाख करोड़ रुपये किया गया है।
-
उपकरण रखरखाव: 1.58 लाख करोड़
-
पूर्व सैनिक पेंशन व कल्याण: 1.71 लाख करोड़
साथ ही, BRO को 7,329 करोड़ और DRDO को 29,100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 1.39 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद केवल घरेलू उद्योगों के लिए आरक्षित कर भारत को रक्षा आयातक से निर्यातक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।
ये भी पढ़ें: Budget 2026: कैंसर–डायबिटीज की दवाएं होंगी सस्ती, युवाओं पर बड़ा दांव; निर्मला सीतारमण के 6 संकल्पों से बदलेगा भारत
✅ निष्कर्ष:
7.85 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट केवल वित्तीय दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भारत के सम्मान, सुरक्षा और संप्रभुता का घोषणापत्र है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और वैश्विक संघर्षों से सबक लेते हुए भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि निर्णायक प्रहार की पूर्ण क्षमता के साथ आगे बढ़ रहा है। GDP के 2 प्रतिशत से अधिक का यह निवेश भारत को एक उभरती नहीं, बल्कि सशक्त वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की तैयारी का स्पष्ट संकेत है।

