नई दिल्ली: में संसद के भीतर शुरू हुई एक हल्की-फुल्की टिप्पणी अब गंभीर सियासी बहस का रूप ले चुकी है। पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच जुबानी जंग ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
दरअसल, संसद में चर्चा के दौरान खरगे ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि देवगौड़ा का कांग्रेस से “प्रेम” था, लेकिन उन्होंने अंततः भाजपा और नरेंद्र मोदी से “शादी” कर ली। यह बयान सुनते ही सदन में ठहाके लगे, लेकिन यह टिप्पणी यहीं खत्म नहीं हुई।
देवगौड़ा ने इस बयान का जवाब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पत्र के माध्यम से दिया। उन्होंने उसी “शादी” वाले रूपक का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कांग्रेस के साथ उनका रिश्ता “जबरदस्ती की शादी” जैसा था, जिसे उन्हें अंततः “तलाक” देना पड़ा।

‘अपमानजनक रिश्ते’ का आरोप
देवगौड़ा ने अपने जवाब में कहा कि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन कभी सहज नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें और उनकी पार्टी को गठबंधन के दौरान सम्मान नहीं मिला। उन्होंने लिखा कि यह रिश्ता “अपमानजनक” हो गया था, जिसके कारण अलग होना ही एकमात्र विकल्प बचा।
उन्होंने खासतौर पर वर्ष 2018 और 2019 की घटनाओं का जिक्र किया। देवगौड़ा के अनुसार, 2018 में कांग्रेस ने एच.डी. कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा था, जबकि वे स्वयं चाहते थे कि खरगे को यह जिम्मेदारी दी जाए। लेकिन उनकी राय को नजरअंदाज किया गया।
2019 में टूटा गठबंधन
देवगौड़ा ने आगे कहा कि 2019 में कांग्रेस ने गठबंधन को कमजोर किया और कई विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। उनका दावा है कि कांग्रेस यदि समय रहते दलबदल रोकने के लिए ठोस कदम उठाती, तो स्थिति अलग हो सकती थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस गठबंधन नहीं छोड़ा, बल्कि कांग्रेस ने उन्हें छोड़ दिया। उनके शब्दों में—“उन्होंने मुझे तलाक देने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा।”

खरगे की तारीफ भी, पर तंज बरकरार
दिलचस्प बात यह है कि तीखे आरोपों के बीच देवगौड़ा ने खरगे को “ईमानदार व्यक्ति” बताया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने खरगे जैसे नेताओं को आगे बढ़ने का पूरा मौका नहीं दिया।
इसके विपरीत, उन्होंने नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें भाजपा से सम्मान और स्नेह मिला। यह बयान भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह उनकी वर्तमान राजनीतिक झुकाव को दर्शाता है।
संसद से सोशल मीडिया तक बढ़ा विवाद
यह पूरा विवाद संसद में एक हल्की टिप्पणी से शुरू हुआ, लेकिन अब यह कर्नाटक और राष्ट्रीय राजनीति के बड़े मुद्दों को छू रहा है। खासकर गठबंधन राजनीति, नेतृत्व विवाद और दलों के बीच विश्वास जैसे विषय फिर से चर्चा में आ गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाजी आने वाले चुनावों के मद्देनजर रणनीतिक भी हो सकती है। कर्नाटक में पहले से ही गठबंधन और दल-बदल की राजनीति जटिल रही है, और ऐसे बयान उस माहौल को और गर्म कर सकते हैं।
राजनीतिक संकेत क्या हैं?
देवगौड़ा का यह बयान केवल एक जवाब नहीं, बल्कि एक संदेश भी है। यह संदेश कांग्रेस के साथ उनके पुराने रिश्तों की खटास को उजागर करता है और भाजपा के साथ उनकी नजदीकियों को भी संकेत देता है।
वहीं, खरगे की टिप्पणी को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। यह कांग्रेस की ओर से राजनीतिक व्यंग्य था, लेकिन उसका जवाब गंभीर आरोपों में बदल गया।
निष्कर्ष:
देवगौड़ा और खरगे के बीच यह बयानबाजी केवल शब्दों की जंग नहीं है, बल्कि यह भारत की गठबंधन राजनीति की जटिलताओं को भी उजागर करती है। “शादी” और “तलाक” जैसे रूपकों के जरिए सामने आया यह विवाद आने वाले समय में और गहराई पकड़ सकता है। फिलहाल, यह साफ है कि पुराने रिश्तों की कसक अब भी सियासत में जिंदा है।

