प्रधानमंत्री: Narendra Modi ने शनिवार को असम के Silchar में करीब 24 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने पूर्वोत्तर के विकास और कनेक्टिविटी को लेकर कई बड़े ऐलान किए और साथ ही कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला भी बोला।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि बराक घाटी केवल असम ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व और पूर्वी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भाषा, संस्कृति और व्यापार के लिहाज से ऐतिहासिक महत्व रखता है और आने वाले वर्षों में यह दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े बाजारों से जुड़ने वाला प्रमुख केंद्र बन सकता है।

बराक घाटी की पहचान और संभावनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि सिलचर को अक्सर Barak Valley का गेटवे कहा जाता है। उन्होंने कहा कि बराक नदी के उपजाऊ मैदानों, चाय बागानों और शिक्षा संस्थानों ने इस क्षेत्र को एक विशिष्ट पहचान दी है।
उन्होंने कहा कि बराक घाटी लंबे समय से व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र रही है। लेकिन लंबे समय तक इस क्षेत्र की क्षमता का पूरी तरह उपयोग नहीं हो सका।
प्रधानमंत्री के अनुसार अब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस क्षेत्र को 21वीं सदी के विकास मॉडल से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
शिलॉन्ग-सिलचर कॉरिडोर से बदलेगी तस्वीर
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर Shillong–Silchar Corridor का भूमि पूजन किया। लगभग 166 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की लागत करीब 22,860 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद असम और Shillong के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। साथ ही Guwahati से सिलचर तक की यात्रा का समय करीब साढ़े आठ घंटे से घटकर लगभग पांच घंटे रह जाने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उत्तर-पूर्व का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर होगा।
लॉजिस्टिक और ट्रेड हब बनेगी बराक घाटी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हाल ही में शुरू की गई रेल, कृषि और बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं बराक घाटी को उत्तर-पूर्व का बड़ा लॉजिस्टिक और ट्रेड हब बनाने में मदद करेंगी।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से व्यापार, परिवहन और पर्यटन को नई गति मिलेगी। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर भी पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर Manipur, Mizoram और Tripura जैसे राज्यों को भी बेहतर कनेक्टिविटी देगा। इन राज्यों के माध्यम से भारत का संपर्क Bangladesh और Myanmar से भी मजबूत होगा।
दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजार तक पहुंच
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बराक घाटी से आगे दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े बाजारों तक पहुंच आसान होगी। इससे न केवल व्यापार बढ़ेगा बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
प्रधानमंत्री के अनुसार इस कनेक्टिविटी से असम के किसानों, छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को सीधा फायदा मिलेगा।
कांग्रेस पर तीखा हमला
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने Indian National Congress पर भी जमकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कई दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने उत्तर-पूर्व को दिल्ली और दिल दोनों से दूर रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों ने इस क्षेत्र की संभावनाओं को नजरअंदाज किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “जहां कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला बंद हो जाता है, वहां हमारा काम शुरू हो जाता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और एनडीए सरकार ने उत्तर-पूर्व को देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
सीमावर्ती गांवों पर विशेष ध्यान
प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार सीमावर्ती गांवों को देश का अंतिम नहीं बल्कि पहला गांव मानती है।
उन्होंने बताया कि सीमा क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार ने Vibrant Villages Programme शुरू किया है।
इस योजना के तहत सीमा से लगे गांवों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
युवाओं के लिए अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहले असम के युवाओं को हिंसा और अस्थिरता के माहौल में जीना पड़ता था। लेकिन अब स्थिति बदल रही है।
उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं और बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
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निष्कर्ष
सिलचर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई विकास परियोजनाएं पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। शिलॉन्ग-सिलचर कॉरिडोर और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बराक घाटी को व्यापार और लॉजिस्टिक हब बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती हैं। साथ ही प्रधानमंत्री के भाषण ने राजनीतिक स्तर पर भी बहस को तेज कर दिया है।

