पश्चिम एशिया: में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 24 घंटों में चार प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत कर वैश्विक मंच पर शांति और स्थिरता का स्पष्ट संदेश दिया है।
इस दौरान उन्होंने इमैनुएल मैक्रों, हैथम बिन तारिक और अनवर इब्राहिम से फोन पर चर्चा की। बातचीत का केंद्र बिंदु पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता रहा।
मैक्रों से बातचीत: शांति और कूटनीति पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बातचीत में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकता है।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर शांति और स्थिरता बहाल करने के प्रयासों में सहयोग करेंगे।
ओमान के सुल्तान से चर्चा: ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा अहम
नरेंद्र मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से भी महत्वपूर्ण बातचीत की। उन्होंने सुल्तान को ईद की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने ओमान की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा करते हुए वहां से भारतीयों समेत अन्य नागरिकों की सुरक्षित निकासी में ओमान की भूमिका की सराहना की।
बातचीत में एक महत्वपूर्ण मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट रहा, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मलेशिया के प्रधानमंत्री से भी हुई चर्चा
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ बातचीत में भी प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। दोनों नेताओं ने माना कि बढ़ते तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देना जरूरी है।
इस बातचीत में क्षेत्रीय शांति के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक प्रभावों पर भी चर्चा की गई, क्योंकि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
भारत की संतुलित कूटनीति का संकेत
प्रधानमंत्री मोदी की इन लगातार बातचीतों को भारत की सक्रिय और संतुलित विदेश नीति के रूप में देखा जा रहा है। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद और शांति का समर्थन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कूटनीतिक पहल भारत को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और प्रभावशाली देश के रूप में स्थापित करती है।

ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय हितों पर फोकस
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों पर पड़ता है। भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करते हैं, उनके लिए होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री की बातचीत में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाना यह दर्शाता है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को लेकर सजग है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
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वैश्विक संदेश: शांति ही समाधान
इन सभी बातचीतों का एक साझा संदेश यह है कि मौजूदा संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।
भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह शांति, स्थिरता और सहयोग की नीति पर कायम है और वैश्विक संकटों के समाधान में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

