मिडिल ईस्ट: में जारी भीषण तनाव के बीच युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग के 12वें दिन रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बातचीत की और युद्ध को जल्द रोकने की अपील की।
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय Kremlin की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पुतिन ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि मौजूदा संघर्ष को सैन्य रास्ते से नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से हल किया जाना चाहिए। उन्होंने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
बातचीत के दौरान ईरान के राष्ट्रपति पजशकियान ने रूस द्वारा दिए जा रहे समर्थन और मानवीय सहायता के लिए धन्यवाद भी जताया। माना जा रहा है कि रूस इस पूरे संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

ट्रम्प से भी हुई थी पुतिन की बातचीत
इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भी बताया था कि उनकी और पुतिन की फोन पर बातचीत हुई थी। ट्रम्प के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच ईरान-इजराइल संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध की स्थिति पर चर्चा हुई थी।
ट्रम्प ने कहा कि पुतिन ने ईरान युद्ध को खत्म कराने में मदद की पेशकश की है। हालांकि ट्रम्प ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर पुतिन रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में मदद कर दें तो दुनिया के लिए यह ज्यादा अच्छा होगा।
ईरान का दावा – कई ठिकानों पर मिसाइल हमले
इस बीच ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया है कि उसने इजराइल और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
IRGC के मुताबिक, तीन घंटे से ज्यादा समय तक “खोरामशहर सुपर-हेवी मिसाइल” दागी गईं। इन हमलों में इजराइल के कई महत्वपूर्ण सैन्य और कम्युनिकेशन केंद्रों को निशाना बनाया गया।
ईरान ने यह भी दावा किया कि तेल अवीव के दक्षिण में स्थित हेला सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेंटर, वेस्ट यरुशलम और हाइफा की कुछ मिलिट्री साइट्स को निशाना बनाया गया। इसके अलावा इराक के एरबिल में अमेरिकी बेस और बहरीन के मनामा में अमेरिकी पांचवें नेवल फ्लीट के मुख्यालय पर भी हमले किए गए।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
इजराइल का पलटवार – तेहरान और तबरीज में हमले
दूसरी ओर इजराइल ने भी ईरान के कई अहम ठिकानों पर जवाबी हमला किया है। इजराइल की सेना Israel Defense Forces (IDF) ने बताया कि उसने ईरान की राजधानी तेहरान और तबरीज शहर में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
IDF के अनुसार, तबरीज में एक विशेष सैन्य कमांड सेंटर को टारगेट किया गया, जबकि तेहरान में “इमाम हसन सिक्योरिटी यूनिट” के मिलिट्री कंपाउंड और बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च से जुड़े कमांड सेंटर पर हमला किया गया।
इसके अलावा माराघेह प्रांत में इंटेलिजेंस और जनरल सिक्योरिटी पुलिस के कमांड सेंटर को भी निशाना बनाया गया। इजराइल का दावा है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई कई मिसाइलों को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।
लेबनान और खाड़ी देशों में भी बढ़ा खतरा
इस युद्ध का असर अब पूरे मिडिल ईस्ट में दिखाई देने लगा है। दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमलों में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई है। स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कई लोग घायल भी हुए हैं।
वहीं सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि शायबा ऑयल फील्ड की ओर जा रहे दो ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया गया। इसके अलावा कई अन्य ड्रोन और मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट किया गया।
कतर से भारतीयों की वापसी
मिडिल ईस्ट में बढ़ते खतरे के बीच कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना शुरू कर दिया है। कतर में भारतीय दूतावास के मुताबिक करीब 1000 भारतीय नागरिक कतर एयरवेज की फ्लाइट से भारत लौट आए हैं। ये लोग दिल्ली, मुंबई और कोच्चि पहुंचे हैं।
दूतावास ने बताया कि आपातकालीन मामलों में यात्रा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं और जरूरत पड़ने पर और भी लोगों को वापस लाया जाएगा।
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट में जारी यह युद्ध अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहा बल्कि इसमें कई वैश्विक ताकतें भी अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो रही हैं। रूस की ओर से युद्ध रोकने की अपील और कूटनीतिक पहल यह संकेत देती है कि दुनिया इस संघर्ष को बड़े युद्ध में बदलने से रोकना चाहती है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि क्या यह संकट शांतिपूर्ण तरीके से खत्म हो पाएगा या नहीं।

