ट्रम्प भारत–यूएस ट्रेड डील: को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 10% ग्लोबल टैरिफ के ऐलान के बावजूद यह समझौता पहले की तरह आगे बढ़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ तय ढांचे में कोई बदलाव नहीं होगा।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द किए जाने के तीन घंटे के भीतर ट्रम्प ने वैश्विक स्तर पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। हालांकि, भारत के साथ हो रही बातचीत पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।

ट्रम्प भारत-यूएस ट्रेड डील और 10% ग्लोबल टैरिफ
अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी के अनुसार, ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय संघ जैसे देशों पर अब धारा 122 के तहत 10% का ग्लोबल टैरिफ लागू होगा। पहले जो दरें तय थीं, उनकी जगह यह नई दर प्रभावी होगी।
इसका मतलब है कि भारत पर कुल टैरिफ 18% से घटकर 10% रह सकता है। हालांकि, इस पर अंतिम आधिकारिक आदेश अभी जारी होना बाकी है।
ट्रम्प ने अपने बयान में कहा:
“हम एक नया आदेश साइन कर रहे हैं, जिसके तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लागू होगा।”
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह दर भारत के लिए अलग से जोड़ी जाएगी या पूर्व निर्धारित ढांचे में समायोजित होगी।
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फरवरी के अंत तक फाइनल होगी ट्रम्प भारत-यूएस ट्रेड डील
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि अंतरिम व्यापार समझौता फरवरी के अंत तक अंतिम रूप ले लेगा। मार्च में इस पर हस्ताक्षर होंगे और अप्रैल से यह लागू हो सकता है।
23 फरवरी से भारत और अमेरिका के अधिकारी अमेरिका में तीन दिन की अहम बैठक करेंगे। इस दौरान 7 फरवरी को जारी जॉइंट स्टेटमेंट के आधार पर कानूनी ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन करेंगे।
इसके अलावा, टैक्स में 25% से 18% तक की कमी के आदेश की भी उम्मीद है। इससे कई भारतीय उद्योगों को सीधा फायदा मिलेगा।
किन सेक्टर को मिलेगा फायदा?
ट्रम्प भारत-यूएस ट्रेड डील से भारत के निर्यात सेक्टर को राहत मिलने की संभावना है। विशेष रूप से:
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कपड़ा उद्योग
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चमड़ा उत्पाद
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जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर
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कृषि निर्यात
पीयूष गोयल ने 7 फरवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात की अनुमति दी जाएगी।
साथ ही, जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फूड को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है।
अधिक जानकारी के लिए पाठक अमेरिकी व्यापार विभाग की आधिकारिक जानकारी देख सकते हैं – Office of the United States Trade Representative (USTR)।

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50 हजार करोड़ डॉलर की खरीद समझौता
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 50 हजार करोड़ डॉलर के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है।
इसके तहत:
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भारतीय सामान पर अमेरिकी टैक्स 50% घटाकर 18% किया गया
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रूस से तेल खरीदने पर लगा 25% अतिरिक्त टैक्स हटाया गया
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अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) का फ्रेमवर्क जारी हुआ
दोनों देशों ने यह भी तय किया है कि समझौते का लाभ किसी तीसरे देश को न मिले।

नॉन-टैरिफ बाधाओं पर विशेष फोकस
ट्रम्प भारत-यूएस ट्रेड डील में केवल टैरिफ ही नहीं, बल्कि नॉन-टैरिफ बैरियर्स को हटाने पर भी जोर दिया गया है।
इनमें शामिल हैं:
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मेडिकल डिवाइसेस की कीमत तय करने के नियम
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रजिस्ट्रेशन में देरी
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तकनीकी मानकों की जटिलता
इन बाधाओं को कम करने से द्विपक्षीय व्यापार और तेज हो सकता है।
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ब्रिटेन और ओमान के साथ समानांतर डील
भारत केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के साथ भी व्यापारिक समझौतों को आगे बढ़ा रहा है।
ब्रिटेन के साथ FTA के तहत 99% भारतीय उत्पादों को जीरो ड्यूटी पर एंट्री मिलेगी। बदले में भारत ब्रिटेन से आने वाली कारों और स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स कम करेगा।
ओमान के साथ भी अप्रैल से डील लागू होने की उम्मीद है, जिससे खाड़ी देशों में भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

निष्कर्ष: भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
ट्रम्प भारत-यूएस ट्रेड डील वैश्विक व्यापार समीकरण में भारत की स्थिति को मजबूत कर सकती है।
हालांकि 10% ग्लोबल टैरिफ का ऐलान हुआ है, लेकिन कुल मिलाकर भारत के लिए टैरिफ संरचना पहले से अधिक संतुलित दिख रही है।
यदि फरवरी के अंत तक यह समझौता तय समय पर फाइनल हो जाता है, तो अप्रैल से भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिल सकता है।
आने वाले हफ्ते इस डील की दिशा तय करेंगे।

