मध्य पूर्व: में चल रहे अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के बीच एक बड़ा सैन्य हादसा सामने आया है। पश्चिमी Iraq में अमेरिकी वायुसेना का KC-135 Stratotanker रिफ्यूलिंग विमान गुरुवार को मिशन के दौरान क्रैश हो गया। इस दुर्घटना में विमान में सवार 6 क्रू मेंबर्स में से 4 की मौत हो गई, जबकि 2 अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान United States Central Command (CENTCOM) ने इस हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि दुर्घटना पश्चिमी इराक में एक ऑपरेशन के दौरान हुई। हादसे के समय मिशन में एक दूसरा टैंकर विमान भी शामिल था, लेकिन वह सुरक्षित वापस लौट आया।

हमले की वजह नहीं, जांच जारी
अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि यह हादसा किसी दुश्मन के हमले या फ्रेंडली फायर की वजह से नहीं हुआ। फिलहाल दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
CENTCOM के मुताबिक लापता दो क्रू सदस्यों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बचाव दल इलाके में मलबे की जांच और संभावित जीवित लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।
इस दुर्घटना के बाद ईरान युद्ध में अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है।
इससे पहले भी हुए हमले
इससे पहले 1 मार्च को Kuwait के शुआइबा पोर्ट पर हुए हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी। वहीं इसी महीने Saudi Arabia में एक हमले में घायल अमेरिकी सैनिक की बाद में अस्पताल में मौत हो गई थी।
इन घटनाओं के बाद मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर दावा
इसी बीच ईरान से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei गंभीर रूप से घायल हैं और फिलहाल कोमा में हैं।
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें Tehran के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमले में लगी गंभीर चोट के कारण उनका एक पैर काटना पड़ा और उनके लिवर को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि इन खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मुजतबा खामेनेई को उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद 9 मार्च को देश का नया सर्वोच्च नेता बनाया गया था।
मिसाइल और ड्रोन हमलों से बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व में संघर्ष के बीच कई देशों में सुरक्षा अलर्ट जारी है। हाल ही में Saudi Arabia ने अपने एयरस्पेस में घुसे 56 ड्रोन मार गिराने का दावा किया है।
वहीं Turkey ने भी बताया कि ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल उसके हवाई क्षेत्र में पहुंच गई थी, जिसे नाटो के एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया।

तेल की कीमतों पर असर
युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। निवेश बैंक Goldman Sachs के मुताबिक मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि मार्च महीने में ब्रेंट क्रूड ऑयल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
इसका कारण Strait of Hormuz में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होना बताया जा रहा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20-30% तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।

भारत पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर भारत समेत कई एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से देश में ईंधन महंगा हो सकता है और महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
इसके अलावा खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों की नौकरियों और रेमिटेंस पर भी असर पड़ सकता है।
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निष्कर्ष
इराक में अमेरिकी एयरफोर्स के विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना ने पहले से जारी ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। जहां एक ओर युद्ध के सैन्य प्रभाव सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तेल सप्लाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर दिखने लगा है। यदि यह संघर्ष लंबा चलता है तो इसके दूरगामी प्रभाव पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।

