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WhatsApp Privacy Policy Breaking: सुप्रीम कोर्ट की Meta को सख्त चेतावनी

Rajat Kumar
Last updated: 2026/02/03 at 2:22 PM
Rajat Kumar
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7 Min Read
WhatsApp Privacy Policy पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से जुड़ी न्यूज़ इमेज
WhatsApp प्राइवेसी पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार
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WhatsApp Privacy Policy को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने Meta Platforms और WhatsApp को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत में काम करने वाली तकनीकी कंपनियां नागरिकों के निजता अधिकारों से समझौता नहीं कर सकतीं।

कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि अगर कंपनियां भारत के संविधान का पालन नहीं कर सकतीं, तो उन्हें देश छोड़ देना चाहिए।

Contents
WhatsApp Privacy Policy को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने Meta Platforms और WhatsApp को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत में काम करने वाली तकनीकी कंपनियां नागरिकों के निजता अधिकारों से समझौता नहीं कर सकतीं।WhatsApp Privacy Policy पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुखNCLAT और CCI के फैसले से जुड़ा है मामला9 फरवरी को आएगा अंतरिम आदेशकोर्ट ने WhatsApp के दबदबे पर उठाए सवालWhatsApp Privacy Policy और यूजर की सहमति‘डेटा शेयरिंग के नाम पर चोरी बर्दाश्त नहीं’Meta और WhatsApp की दलीलक्या है पूरा विवादनिष्कर्ष:

WhatsApp Privacy Policy पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

WhatsApp Privacy Policy से जुड़े मामले की सुनवाई मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने Meta और WhatsApp को स्पष्ट चेतावनी दी कि डेटा शेयरिंग के नाम पर नागरिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अदालत ने कहा कि भारत में रहकर कोई भी कंपनी संविधान से ऊपर नहीं हो सकती। यदि किसी को देश के कानून और संविधान से समस्या है, तो उसे भारत में कारोबार करने का अधिकार नहीं है।


NCLAT और CCI के फैसले से जुड़ा है मामला

यह मामला WhatsApp Privacy Policy से जुड़े उस विवाद से जुड़ा है, जिसमें Meta और WhatsApp ने राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

NCLAT ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा था। यह जुर्माना WhatsApp की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर लगाया गया था।

हालांकि, NCLAT ने विज्ञापन से जुड़े डेटा शेयरिंग पर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध को हटा दिया था, जिस पर CCI ने भी अलग से अपील दाखिल की है।

👉 संबंधित खबर पढ़ें: (PM Modi US Tariff Cut Breaking 20: ‘मेड इन इंडिया’ पर बड़ी राहत, ऐतिहासिक फैसला)


9 फरवरी को आएगा अंतरिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को भी इस याचिका में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।

अदालत ने Meta और WhatsApp से कहा है कि वे या तो डेटा शेयर न करने का लिखित आश्वासन दें, या फिर कोर्ट को सख्त अंतरिम आदेश पारित करना पड़ेगा।

कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में 9 फरवरी को अंतरिम आदेश सुनाया जाएगा।

WhatsApp Privacy Policy पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से जुड़ी न्यूज़ इमेज
WhatsApp प्राइवेसी पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

कोर्ट ने WhatsApp के दबदबे पर उठाए सवाल

WhatsApp Privacy Policy और यूजर की सहमति

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp की बाजार में मजबूत स्थिति पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि WhatsApp के दबदबे के कारण यूजर्स के पास सीमित विकल्प हैं।

अदालत ने पूछा कि क्या एक आम यूजर WhatsApp की जटिल Privacy Policy को वास्तव में समझ पाता है। कोर्ट ने कहा कि सहमति तभी वैध मानी जाएगी, जब वह स्पष्ट, सरल और समझने योग्य हो।

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यूजर्स का डेटा केवल इकट्ठा ही नहीं किया जा रहा, बल्कि उसका व्यावसायिक उपयोग भी किया जा रहा है।


‘डेटा शेयरिंग के नाम पर चोरी बर्दाश्त नहीं’

मुख्य न्यायाधीश ने WhatsApp Privacy Policy की भाषा को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणी की।

उन्होंने कहा:

“आप डेटा शेयरिंग के बहाने इस देश की प्राइवेसी के साथ नहीं खेल सकते। आपकी शर्तें इतनी चालाकी से लिखी गई हैं कि आम नागरिक उन्हें समझ ही नहीं पाता।”

मुख्य न्यायाधीश ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि स्वास्थ्य से जुड़े संदेश भेजने के बाद संबंधित विज्ञापन दिखाई देने लगते हैं, जिससे डेटा उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने आगे कहा:

“अगर आप हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते, तो भारत छोड़ दें। नागरिकों की निजता से कोई समझौता नहीं होगा।”

WhatsApp Privacy Policy पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से जुड़ी न्यूज़ इमेज
WhatsApp प्राइवेसी पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

Meta और WhatsApp की दलील

Meta और WhatsApp की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और अखिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि WhatsApp के मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित होते हैं और कंपनी उन्हें पढ़ नहीं सकती।

कंपनियों ने यह भी बताया कि CCI द्वारा लगाया गया जुर्माना पहले ही जमा किया जा चुका है। Meta ने डेटा उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने पर सहमति जताई है।

👉 संबंधित खबर पढ़ें: (PM Modi US Tariff Cut Breaking 20: ‘मेड इन इंडिया’ पर बड़ी राहत, ऐतिहासिक फैसला)


क्या है पूरा विवाद

पूरा विवाद CCI के नवंबर 2024 के फैसले से जुड़ा है। CCI ने कहा था कि WhatsApp ने अपनी 2021 की Privacy Policy के जरिए मैसेजिंग सेवा तक पहुंच को डेटा शेयरिंग की सहमति से जोड़ा।

CCI के मुताबिक, WhatsApp ने “लेना है तो लो, नहीं तो छोड़ दो” मॉडल अपनाया और यूजर्स को Meta की अन्य इकाइयों के साथ डेटा साझा करने के लिए मजबूर किया।

नियामक संस्था ने इसे प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का उल्लंघन माना और Meta पर भारी जुर्माना लगाया।

सरकारी नीतियों और डिजिटल अधिकारों से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार को एक भरोसेमंद स्रोत माना जाता है।


निष्कर्ष:

WhatsApp Privacy Policy पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख यह संकेत देता है कि भारत में अब डेटा प्राइवेसी से जुड़ी किसी भी ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

9 फरवरी को आने वाला अंतरिम आदेश न सिर्फ Meta और WhatsApp के लिए, बल्कि भारत में काम कर रही सभी बड़ी टेक कंपनियों के लिए एक अहम मिसाल साबित हो सकता है।

TAGGED: Breaking News, CCI, Data Privacy India, Digital Rights, Meta Platforms, NCLAT, Privacy Policy, Supreme Court, Tech News Hindi, WhatsApp
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