Chandigarh Cab News 2026: चंडीगढ़ में ऐप के जरिए कैब बुक करके सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। प्रशासन ने अब उन कैब एग्रीगेटर ऐप्स पर भी रोक को प्रभावी बनाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिनके लाइसेंस पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं। Ola, Uber, Rapido और InDrive के लाइसेंस छह-छह महीने के लिए निलंबित किए जा चुके हैं और अब चंडीगढ़ प्रशासन इन प्लेटफॉर्म के ऐप को शहर में ब्लॉक कराने के लिए केंद्र सरकार से तकनीकी मदद मांग रहा है।
प्रशासन का कहना है कि लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद मोबाइल फोन पर ऐप उपलब्ध रहने से इनके जरिए कैब बुकिंग की संभावना बनी हुई है। ऐसे में केवल सड़क पर वाहनों के खिलाफ चालान या इंपाउंडिंग की कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं माना जा रहा। अब प्रशासन GPS आधारित तकनीक के जरिए निलंबित एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म की सेवाओं को चंडीगढ़ क्षेत्र में रोकने की व्यवस्था चाहता है।
चारों बड़े कैब एग्रीगेटर्स पर कार्रवाई
चंडीगढ़ में यह कार्रवाई एक साथ नहीं हुई है। प्रशासन ने अलग-अलग समय पर चार प्रमुख ऐप-बेस्ड कैब एग्रीगेटर्स के खिलाफ लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की।
Ola का लाइसेंस 17 जून 2026 को छह महीने के लिए निलंबित किया गया था। इसके बाद InDrive पर 10 अगस्त को कार्रवाई हुई। वहीं Uber और Rapido के लाइसेंस 8 सितंबर 2026 को छह महीने के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित किए गए। इस तरह चंडीगढ़ में चारों प्रमुख ऐप आधारित कैब एग्रीगेटर्स के लाइसेंस फिलहाल निलंबित हैं।
Uber और Rapido के मामले में प्रशासन ने नियमों और लाइसेंस की शर्तों के कथित उल्लंघन का हवाला दिया। इनमें ड्राइवर बीमा, प्रशिक्षण, निर्धारित किराया, वाहन पात्रता और अन्य सुरक्षा एवं संचालन संबंधी नियम शामिल बताए गए हैं। प्रशासन के मुताबिक कंपनियों को कई बार नोटिस और अनुपालन का अवसर दिया गया था।
अब ऐप ही ब्लॉक कराने की तैयारी
लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद अगर संबंधित ऐप मोबाइल फोन पर सक्रिय रहते हैं, तो यात्री बुकिंग कर सकते हैं और ड्राइवर भी ऐप के माध्यम से यात्राएं स्वीकार कर सकते हैं। इसी वजह से प्रशासन अब कार्रवाई को ऐप स्तर तक ले जाना चाहता है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय से संपर्क कर GPS आधारित ऐप ब्लॉकिंग या प्रतिबंध व्यवस्था में तकनीकी सहायता मांगी है। प्रशासन का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे निलंबित एग्रीगेटर की सेवाएं चंडीगढ़ क्षेत्र में प्रभावी रूप से संचालित न हो सकें।
जब तक यह तकनीकी व्यवस्था लागू नहीं होती, प्रशासन सड़क पर कार्रवाई जारी रख रहा है। निलंबित प्लेटफॉर्म से जुड़े वाहनों के चालान किए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर वाहनों को इंपाउंड भी किया जा रहा है।

यात्रियों की जेब पर भी पड़ा असर
चार बड़े ऐप-बेस्ड कैब प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई का सीधा असर यात्रियों पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में कैब यात्रियों ने पहले की तुलना में किराए में बढ़ोतरी की शिकायत की है।
जागरण की रिपोर्ट में यात्रियों के हवाले से बताया गया है कि कुछ रूट पर किराया करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है। उदाहरण के तौर पर सेक्टर-9 से रेलवे स्टेशन के बीच पहले करीब 160 रुपये का किराया बताया जाता था, जबकि हाल में अलग-अलग ऐप पर यही यात्रा करीब 260 से 280 रुपये तक दिखाई गई। वास्तविक किराया समय, उपलब्धता और संबंधित सेवा के आधार पर बदल सकता है।
ऐसे में रोजाना ऑफिस, कॉलेज, रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के लिए कैब सेवाओं में बदलाव महत्वपूर्ण हो गया है।
चंडीगढ़ में कैब का नया किराया कितना है?
प्रशासन की नई अधिसूचना के तहत शुरुआती तीन किलोमीटर के लिए न्यूनतम किराया निर्धारित किया गया है। 5-सीटर यानी 4+1 कैब के लिए शुरुआती तीन किलोमीटर का न्यूनतम किराया 90 रुपये रखा गया है। इसके बाद 25 रुपये प्रति किलोमीटर की दर लागू होगी।
वहीं 7-सीटर यानी 6+1 कैब के लिए शुरुआती तीन किलोमीटर का न्यूनतम किराया 100 रुपये और उसके बाद 28 रुपये प्रति किलोमीटर की दर निर्धारित की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले इन कैब के लिए प्रति किलोमीटर दरें इससे कम थीं।
प्रशासन ने ऑटो, ई-ऑटो और ई-रिक्शा के लिए भी प्रति किलोमीटर दरें निर्धारित की हैं।
Bharat Taxi बना बड़ा विकल्प
चार प्रमुख एग्रीगेटर्स के लाइसेंस निलंबित होने के बाद Bharat Taxi को चंडीगढ़ में एक प्रमुख उपलब्ध ऐप-बेस्ड विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, इस सेवा को शुरू किए जाने के बाद इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।
हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन का कहना है कि लगभग 5 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है और करीब 1 लाख टैक्सी ड्राइवर प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। हालांकि वास्तविक उपलब्धता और सेवा का अनुभव क्षेत्र और समय के अनुसार अलग हो सकता है।
ड्राइवरों और यात्रियों पर क्या असर?
इस पूरे विवाद का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में ड्राइवर भी इन ऐप-बेस्ड प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं। चंडीगढ़ में कैब और टैक्सी चालकों की ओर से लंबे समय से नियमों, किराए और कामकाज से जुड़े मुद्दे उठाए जाते रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि एग्रीगेटर कंपनियों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। दूसरी ओर, ऐप सेवाओं पर निर्भर यात्रियों के सामने अब वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था की चुनौती है।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चंडीगढ़ में इन चारों ऐप्स की सेवाएं तकनीकी रूप से भी बंद हो पाएंगी? प्रशासन ने इसके लिए केंद्र से मदद मांगी है। GPS आधारित व्यवस्था लागू होने पर निलंबित प्लेटफॉर्म के संचालन पर निगरानी और रोक लगाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।
फिलहाल प्रशासन सड़क पर निलंबित प्लेटफॉर्म से जुड़ी कैब के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है और साथ ही वैकल्पिक सेवाओं को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है।

