वॉशिंगटन: इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी ICC को लेकर अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के बीच टकराव एक बार फिर सुर्खियों में है। ट्रंप प्रशासन अब केवल ICC के अधिकारियों को निशाना बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पूरे संस्थान पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी में बताया जा रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित कदमों का उद्देश्य ICC की वित्तीय गतिविधियों और अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक उसकी पहुंच को सीमित करना हो सकता है।
पूरे ICC को निशाना बनाने की तैयारी
अब तक अमेरिका ने मुख्य रूप से ICC से जुड़े कुछ अधिकारियों पर व्यक्तिगत प्रतिबंध लगाए हैं। लेकिन नई योजना इससे अलग है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने पूरे ICC को प्रतिबंधों के दायरे में लाने की तैयारी की है। यदि यह कदम लागू होता है, तो अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए ICC के साथ वित्तीय लेनदेन, सामान या सेवाओं की आपूर्ति पर प्रतिबंध लग सकता है, जब तक कि संबंधित गतिविधि के लिए अमेरिकी ट्रेजरी से अनुमति न हो।
यही वजह है कि इस प्रस्ताव को ICC के खिलाफ अब तक की कार्रवाई से अधिक व्यापक माना जा रहा है।
डॉलर में लेनदेन पर पड़ सकता है असर
जागरण और अन्य रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित प्रतिबंधों के तहत ICC के लिए अमेरिकी डॉलर में लेनदेन पर रोक लगाने की व्यवस्था हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रतिबंधों को लागू करने से पहले लगभग छह से सात महीने की अवधि दी जा सकती है। हालांकि अंतिम नियम और उनकी वास्तविक शर्तें अमेरिकी सरकार की अंतिम घोषणा पर निर्भर करेंगी।
अगर अमेरिकी वित्तीय संस्थानों और कंपनियों के साथ ICC के लेनदेन पर व्यापक रोक लगती है, तो इसका असर अदालत की रोजमर्रा की वित्तीय गतिविधियों पर पड़ सकता है।
ग्लोबल बैंकिंग सिस्टम से अलग-थलग होने का खतरा
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बैंकिंग सिस्टम है। अमेरिका की वित्तीय व्यवस्था और डॉलर आधारित अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की भूमिका को देखते हुए अमेरिकी प्रतिबंधों का प्रभाव केवल अमेरिकी कंपनियों तक सीमित नहीं रह सकता।
Reuters के अनुसार, बैंक अक्सर अमेरिकी प्रतिबंधों का अनुपालन जरूरत से अधिक सख्ती से भी करते हैं, क्योंकि उन्हें अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था तक अपनी पहुंच बनाए रखना होती है। इसलिए किसी संस्था पर व्यापक अमेरिकी प्रतिबंध लगने की स्थिति में अन्य देशों के बैंक और कारोबारी संस्थान भी उसके साथ लेनदेन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत सकते हैं।
यही स्थिति ICC के लिए वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ा सकती है।

IT, इंश्योरेंस और कर्मचारियों के भुगतान पर भी असर?
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे संस्थान पर प्रतिबंध लगाए जाने से ICC की कुछ रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इनमें IT सेवाएं खरीदना, इंश्योरेंस, जांच से जुड़े काम और कर्मचारियों को भुगतान जैसी गतिविधियां शामिल हैं। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी सरकार अंतिम प्रतिबंधों में किन गतिविधियों को शामिल करती है और कौन-कौन सी गतिविधियों के लिए लाइसेंस या छूट दी जाती है।
अमेरिकी OFAC की मौजूदा जानकारी भी बताती है कि ICC से जुड़े प्रतिबंधों के तहत कुछ गतिविधियों को विशेष लाइसेंस के जरिए अधिकृत किया जा सकता है।
अमेरिका और ICC के बीच विवाद की जड़ क्या है?
अमेरिका और ICC के बीच विवाद नया नहीं है। अमेरिका ICC का सदस्य देश नहीं है। अदालत की स्थापना 2002 में युद्ध अपराध, नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई के लिए हुई थी। ICC का कहना है कि वह उन परिस्थितियों में कार्रवाई कर सकता है जहां संबंधित राष्ट्रीय न्याय व्यवस्था वास्तविक जांच या अभियोजन करने में सक्षम या इच्छुक नहीं होती।
ट्रंप प्रशासन का ICC के साथ मौजूदा टकराव खास तौर पर अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों से जुड़े मामलों को लेकर बढ़ा है।
नेतन्याहू और गैलेंट के खिलाफ वारंट के बाद बढ़ा तनाव
ICC ने नवंबर 2024 में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। अमेरिका और इजरायल दोनों ICC के सदस्य नहीं हैं।
अमेरिकी अधिकारियों ने ICC पर ऐसे देशों के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया है, जिन्होंने अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 2026 में ICC को लेकर दबाव बढ़ाने की नीति के तहत अन्य देशों से भी अदालत से दूरी बनाने का आह्वान किया था।
अगस्त में ICC प्रमुख पर भी लगा था अमेरिकी प्रतिबंध
यह घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ है। 18 अगस्त 2026 को अमेरिका ने ICC की अध्यक्ष जज टोमोको अकाने और वरिष्ठ ट्रायल लॉयर अब्दुलाये सेये पर भी प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि संबंधित लोगों ने ऐसे मामलों में ICC की कार्रवाई में भूमिका निभाई जिनमें सरकारों ने अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया था।
ICC ने इन प्रतिबंधों की आलोचना की और कहा कि इस तरह के कदम अदालत की न्यायिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं। यूरोपीय देशों और जापान की ओर से भी ICC के समर्थन की बात सामने आई है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि पूरे ICC पर प्रस्तावित व्यापक प्रतिबंधों को लेकर अंतिम अमेरिकी आदेश और उसकी विस्तृत शर्तें सामने आना बाकी हैं। Reuters के अनुसार, घोषणा का समय संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों के दौरान या उसके आसपास हो सकता है, लेकिन सटीक समय स्पष्ट नहीं था।
अगर प्रतिबंध लागू होते हैं, तो इसका असर केवल अमेरिका और ICC के संबंधों तक सीमित रहने के बजाय उन संस्थानों और देशों तक भी पहुंच सकता है जो अदालत के साथ वित्तीय, तकनीकी या प्रशासनिक रूप से जुड़े हैं। दूसरी ओर, ICC और उसके समर्थक देश इसे अंतरराष्ट्रीय न्यायिक स्वतंत्रता के मुद्दे के रूप में देख रहे हैं।

