Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस मामले में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को शीर्ष अदालत ने अभिनेता को बकाया रकम के भुगतान के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने ₹2 करोड़ की राशि जमा करने की व्यवस्था को स्वीकार किया है और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उनकी याचिका पर आगे विचार करने की बात कही है।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश?
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की। सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से भुगतान की व्यवस्था अदालत के सामने रखी गई।
जानकारी के मुताबिक, अभिनेता ने ₹1.15 करोड़ के डिमांड ड्राफ्ट अदालत में पेश किए हैं। वहीं शेष ₹85 लाख की रकम उनकी पैतृक संपत्ति के संभावित खरीदार की ओर से जमा किए जाने की व्यवस्था बताई गई है। यह रकम 12 अक्टूबर तक जमा किए जाने की बात सामने आई है।
इस तरह कुल ₹2 करोड़ के भुगतान की व्यवस्था सामने आने के बाद अदालत ने मामले में आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ किया है।
13 अक्टूबर की तारीख क्यों है अहम?
इस मामले में 13 अक्टूबर की तारीख राजपाल यादव के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बकाया भुगतान से जुड़ी शर्त पूरी होने के बाद ही अभिनेता की याचिका पर आगे विचार किया जाएगा। यानी अब मामले में राहत पाने के लिए भुगतान की शर्त पूरी करना बेहद अहम है।
इससे पहले अदालत ने राजपाल यादव को बकाया रकम जमा करने के लिए अंतिम अवसर दिया था। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर अदालत ने सोमवार को अभिनेता के प्रति कड़ा रुख अपनाया था और मामले की गंभीरता स्पष्ट की थी।
कहां से शुरू हुआ था पूरा विवाद?
यह मामला वर्ष 2012 में बनी फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा बताया जाता है। फिल्म के निर्माण के लिए लिए गए कर्ज और उससे जुड़े भुगतान को लेकर विवाद सामने आया था। इसके बाद चेक बाउंस के कई मामले अदालत तक पहुंचे।
दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव की सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद अभिनेता ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान उन्हें बकाया राशि का भुगतान करने और मामले के निपटारे के लिए ठोस प्रस्ताव पेश करने का मौका दिया।

पहले भी मिल चुका था ₹2 करोड़ जमा करने का मौका
सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को ₹2 करोड़ जमा करने के लिए अंतिम अवसर दिया था। अदालत ने उन्हें बकाया राशि के भुगतान को लेकर ठोस व्यवस्था प्रस्तुत करने को कहा था। साथ ही उनकी अंतरिम सुरक्षा को भी एक निश्चित अवधि तक बढ़ाया गया था।
लेकिन निर्धारित समयसीमा तक भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर अदालत ने नाराजगी जताई। 6 अक्टूबर को हुई सुनवाई में पीठ ने अभिनेता की ओर से किए गए वादे के बावजूद भुगतान न होने पर कड़ा रुख अपनाया था। अदालत ने यहां तक कहा था कि यदि बकाया रकम का भुगतान नहीं होता तो जेल जाने की स्थिति पैदा हो सकती है।
पैतृक संपत्ति बेचने की पेशकश क्यों करनी पड़ी?
ताजा सुनवाई में राजपाल यादव की ओर से बकाया रकम जुटाने के लिए अपनी पैतृक संपत्ति बेचने की व्यवस्था बताई गई। अदालत ने इस प्रस्ताव पर गौर किया और भुगतान की व्यवस्था को रिकॉर्ड पर लिया।
अभिनेता की ओर से पेश किए गए ₹1.15 करोड़ के डिमांड ड्राफ्ट और बाकी ₹85 लाख की रकम के लिए संभावित खरीदार की व्यवस्था से यह संकेत मिलता है कि बकाया रकम चुकाने के लिए अब ठोस कदम उठाए गए हैं।
अब आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि तय समयसीमा के भीतर पूरी ₹2 करोड़ की राशि जमा होती है या नहीं। अदालत भुगतान की स्थिति को देखने के बाद राजपाल यादव की याचिका पर आगे सुनवाई करेगी।
यदि भुगतान की शर्त पूरी हो जाती है तो अभिनेता को अपनी याचिका पर अदालत से आगे राहत मिलने की उम्मीद बनी रहेगी। वहीं यदि तय व्यवस्था के मुताबिक रकम जमा नहीं होती है तो उनके लिए कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
राजपाल यादव के लिए क्यों अहम है यह मामला?
राजपाल यादव लंबे समय से हिंदी सिनेमा में अपने हास्य अभिनय के लिए पहचाने जाते रहे हैं। लेकिन चेक बाउंस से जुड़े इन मामलों ने उनके लिए कानूनी परेशानी खड़ी कर दी है। मामला अब भुगतान और अदालत के निर्देशों के पालन के चरण में पहुंच चुका है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से साफ है कि अदालत इस मामले में सिर्फ आश्वासन के बजाय वास्तविक भुगतान की व्यवस्था चाहती है। अब 13 अक्टूबर तक की समयसीमा और उसके बाद होने वाली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी।

