नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस विवाद में 15 अक्टूबर 2026 को अहम घटनाक्रम सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता से जुड़े सात मामलों के विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है। यह कदम तब उठाया गया, जब अदालत को बताया गया कि राजपाल यादव और उनकी पत्नी की ओर से कोर्ट रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपये जमा कराए जा चुके हैं। अदालत ने दोनों पक्षों से आपसी सहमति के जरिए विवाद सुलझाने की संभावना तलाशने को कहा।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव के पासपोर्ट को जारी करने के लिए संबंधित ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया, ताकि वह पेशेवर काम के सिलसिले में विदेश यात्रा कर सकें। हालांकि, यह अनुमति बिना शर्त नहीं है। अभिनेता को ट्रायल कोर्ट की ओर से तय शर्तों का पालन करना होगा और विदेश से लौटने के बाद अदालत को इसकी जानकारी देनी होगी।
₹2 करोड़ जमा होने के बाद अदालत ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने जमा की गई रकम को ध्यान में रखते हुए कहा कि विवाद को बातचीत और मध्यस्थता के जरिए सुलझाने की कोशिश की जा सकती है।
अदालत का रुख था कि दोनों पक्ष निष्पक्ष तरीके से बातचीत करें और समझौते की संभावना तलाशें। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र भेजने का निर्देश दिया गया। दोनों पक्षों को मध्यस्थ से संपर्क कर बैठक की तारीख तय करने को कहा गया। जरूरत पड़ने पर पक्षकारों को व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन उपस्थित होने के लिए भी कहा जा सकता है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि 2 करोड़ रुपये अदालत की रजिस्ट्री में जमा किए गए हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरा विवाद समाप्त हो गया या सभी बकाया राशि का भुगतान हो चुका है। अब आगे की स्थिति मध्यस्थता में होने वाली बातचीत और शेष विवाद के समाधान पर निर्भर करेगी।
पैतृक संपत्ति बेचकर जुटाई रकम
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से पेश वकील ने बताया कि अभिनेता ने रकम जुटाने के लिए अपनी पैतृक संपत्ति बेचने का सहारा लिया। इससे पहले अदालत में भुगतान की व्यवस्था को लेकर कई बार चर्चा हो चुकी थी।
राजपाल यादव ने पहले भी अदालत के सामने अपनी आर्थिक परेशानियों का जिक्र किया था। उनके मुताबिक, उनकी फिल्म आटा पता लापता से जुड़े आर्थिक नुकसान ने उनकी स्थिति को प्रभावित किया था। इसी फिल्म से संबंधित वित्तीय लेनदेन के कारण विवाद अदालत तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी भुगतान को लेकर समय दिया था। अभिनेता की ओर से रकम जमा करने की प्रक्रिया में देरी होने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी। अब 2 करोड़ रुपये जमा होने के बाद अदालत ने शेष विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का रास्ता चुना है।

क्या है पूरा चेक बाउंस मामला?
यह विवाद एक निजी कंपनी से फिल्म निर्माण के सिलसिले में लिए गए लगभग 5 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। मामले में समझौतों और भुगतान की शर्तों को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद कई चेक बैंक में प्रस्तुत किए गए, जो भुगतान के लिए स्वीकार नहीं हुए। इसी के बाद चेक बाउंस से जुड़े मामले दर्ज हुए।
कुल सात मामलों में राजपाल यादव ने अपनी दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा को चुनौती दी है। इससे पहले निचली अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट में भी इस विवाद की सुनवाई हुई थी। मई 2024 में सत्र अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। बाद में कानूनी कार्यवाही के दौरान सजा से जुड़ी स्थिति में बदलाव हुआ और दिल्ली हाईकोर्ट ने अंततः तीन महीने की सजा का आदेश दिया।
राजपाल यादव ने इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसलिए मौजूदा मध्यस्थता प्रक्रिया का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की संभावना तलाशना है। इससे मामले का अंतिम परिणाम क्या होगा, यह अभी तय नहीं है।
पासपोर्ट जारी करने का निर्देश, विदेश में काम कर सकेंगे?
सुनवाई में राजपाल यादव की ओर से यह भी बताया गया कि उन्हें पेशेवर काम के लिए विदेश जाना है। इसके लिए पासपोर्ट की जरूरत है। अदालत ने संबंधित ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह तय शर्तों के अधीन उनका पासपोर्ट जारी करे।
इसका मतलब यह नहीं है कि अभिनेता को बिना किसी औपचारिकता के विदेश जाने की पूरी छूट मिल गई है। यात्रा से पहले उन्हें संबंधित अदालत की शर्तें पूरी करनी होंगी। विदेश से लौटने पर ट्रायल कोर्ट को सूचना देना भी जरूरी होगा।
यह राहत अभिनेता के पेशेवर काम को जारी रखने में मदद कर सकती है, लेकिन चेक बाउंस मामलों में चल रही कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह जारी रहेगी।
अब आगे क्या होगा?
अब इस मामले में सबसे अहम चरण मध्यस्थता का होगा। दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए शेष विवाद का समाधान तलाशना है। यदि आपसी सहमति बनती है, तो मामले को निपटाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। अगर समझौता नहीं होता, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे सुनवाई की संभावना बनी रहेगी।
राजपाल यादव के लिए 2 करोड़ रुपये जमा करना और पासपोर्ट को लेकर मिला निर्देश महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं। हालांकि, उनके खिलाफ मामलों का अंतिम निपटारा अभी नहीं हुआ है। आने वाले समय में मध्यस्थता के नतीजे और अदालत के आगे के आदेश इस विवाद की दिशा तय करेंगे।
निष्कर्ष
राजपाल यादव से जुड़े चेक बाउंस विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का रास्ता खोलते हुए अहम कदम उठाया है। अभिनेता की ओर से कोर्ट रजिस्ट्री में 2 करोड़ रुपये जमा किए जाने के बाद दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावना तलाशने को कहा गया। साथ ही, पेशेवर काम के लिए विदेश यात्रा करने हेतु पासपोर्ट जारी करने का निर्देश भी दिया गया, जो ट्रायल कोर्ट की शर्तों के अधीन है। हालांकि, सात मामलों में दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देने वाली कानूनी प्रक्रिया का अंतिम परिणाम अभी बाकी है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि मध्यस्थता से विवाद सुलझता है या आगे अदालत में सुनवाई जारी रहती है।

