नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति एक बार फिर चर्चा में है। यूक्रेनी नौसेना ने दावा किया है कि उसने रूस के वोरोनेझ क्षेत्र में स्थित बोरिसोग्लेब्स्क सैन्य हवाई अड्डे पर रात के समय मिसाइल हमला करके छह Su-34M लड़ाकू-बमवर्षक विमानों को नष्ट कर दिया। 15 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस खबर के मुताबिक, हमले में विमानन संचालन से जुड़े तकनीकी उपकरणों को भी नुकसान पहुंचा। हालांकि, यूक्रेनी पक्ष ने कहा है कि नुकसान के पूरे स्तर की पुष्टि की जा रही है।
इस दावे के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि छह विमानों को वास्तव में नष्ट किया गया है, तो इससे रूस की युद्धक विमानन क्षमता पर कितना असर पड़ सकता है? फिलहाल, इस नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए यूक्रेनी नौसेना के दावे और सत्यापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
बोरिसोग्लेब्स्क एयरबेस को क्यों बनाया गया निशाना?
बोरिसोग्लेब्स्क सैन्य हवाई अड्डा रूस के वोरोनेझ क्षेत्र में स्थित है। यहां सैन्य विमानों और उनसे जुड़ी गतिविधियों का संचालन होता है। यूक्रेन के मुताबिक, यह हमला रूसी सैन्य विमानन क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से किया गया।
यूक्रेनी नौसेना के अनुसार, हमले में यूक्रेन की विकसित नेप्च्यून तटीय मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल किया गया। इस हमले के बाद हवाई अड्डे पर विस्फोट और आग लगने की भी खबर सामने आई। इसके अलावा विमानों के रखरखाव और संचालन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
हालांकि, हमले के बाद एयरबेस पर मौजूद सभी विमानों की स्थिति, क्षति की वास्तविक मात्रा और परिचालन पर पड़े असर को लेकर स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए गए विस्तृत आंकड़े सामने नहीं आए हैं।

Su-34M विमान रूस के लिए क्यों हैं अहम?
Su-34M रूस के Su-34 लड़ाकू-बमवर्षक विमान का आधुनिकीकृत संस्करण है। इस तरह के विमान हवा से जमीन पर हमला करने और निर्देशित बमों के इस्तेमाल के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये विभिन्न प्रकार के बम और मिसाइल ले जाने में सक्षम हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध में ऐसे विमानों का इस्तेमाल सैन्य ठिकानों, अग्रिम मोर्चों और अन्य लक्ष्यों पर हमले करने के लिए किया जाता रहा है। इसी वजह से सैन्य हवाई अड्डों पर खड़े विमानों को निशाना बनाना किसी भी पक्ष के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
यदि यूक्रेन का छह विमानों को नष्ट करने का दावा सही साबित होता है, तो रूस को विमानों की उपलब्धता, मरम्मत और परिचालन व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने विमान पूरी तरह नष्ट हुए, कितने क्षतिग्रस्त हुए और उनकी जगह दूसरे विमान कितनी जल्दी तैनात किए जा सकते हैं।
नेप्च्यून मिसाइल प्रणाली से हमले का दावा
यूक्रेनी पक्ष के अनुसार, इस अभियान में नेप्च्यून मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल किया गया। यह यूक्रेन में विकसित तटीय मिसाइल प्रणाली है, जिसे समुद्री और संबंधित सैन्य लक्ष्यों के विरुद्ध इस्तेमाल करने के लिए जाना जाता है। इसके इस्तेमाल का दावा इस बात की ओर संकेत करता है कि यूक्रेन रूसी सैन्य परिसंपत्तियों को निशाना बनाने के लिए लंबी दूरी की मारक क्षमताओं पर जोर दे रहा है।
फिर भी, किसी हमले की सफलता का आकलन केवल हथियार के नाम या विस्फोट की खबर से नहीं किया जा सकता। इसके लिए उपग्रह तस्वीरों, स्वतंत्र जांच, आधिकारिक बयानों और नुकसान के विश्वसनीय आकलन की जरूरत होती है।
क्या रूस की हवाई हमले करने की क्षमता पर पड़ेगा असर?
Su-34M जैसे विमान रूस की सामरिक विमानन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर छह विमानों का नुकसान प्रमाणित होता है, तो संबंधित क्षेत्र में रूसी वायु अभियानों की क्षमता पर दबाव पड़ सकता है। विमानों की मरम्मत, नए विमान उपलब्ध कराने और दूसरे ठिकानों से संचालन करने की जरूरत भी बढ़ सकती है।
हालांकि, इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि रूस की पूरी वायुसेना कमजोर हो गई है या युद्ध का रुख तुरंत बदल जाएगा। सैन्य क्षमता का आकलन कुल विमानों की संख्या, उनकी उपलब्धता, हथियारों, पायलटों और अन्य एयरबेस की भूमिका को ध्यान में रखकर किया जाता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में एयरबेस क्यों बन रहे हैं अहम लक्ष्य?
युद्ध में एयरबेस किसी भी देश की सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। यहां विमान तैनात रहते हैं, तकनीकी देखभाल होती है और हवाई अभियानों की तैयारी की जाती है। ऐसे ठिकानों को नुकसान पहुंचने से विमानों के संचालन और सैन्य रसद पर असर पड़ सकता है।
रूस और यूक्रेन दोनों ही एक-दूसरे की सैन्य और महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं को निशाना बनाने की रणनीति अपनाते रहे हैं। ऐसे हमले युद्ध की लागत बढ़ाने और विरोधी पक्ष की कार्रवाई करने की क्षमता को सीमित करने के प्रयासों का हिस्सा होते हैं।
फिलहाल, बोरिसोग्लेब्स्क एयरबेस पर हमले से जुड़े दावे की स्वतंत्र पुष्टि और नुकसान का अंतिम आकलन महत्वपूर्ण होगा। आने वाली जानकारी से ही स्पष्ट हो सकेगा कि छह Su-34M विमानों के कथित नुकसान का रूस की सैन्य रणनीति पर कितना वास्तविक प्रभाव पड़ा।

