उत्तर प्रदेश: की राजधानी लखनऊ से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां आशियाना क्षेत्र के सेक्टर-L में रहने वाले वर्धमान पैथोलॉजी लैब के मालिक मानवेंद्र सिंह की उनके 21 वर्षीय बेटे अक्षत ने गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में भर दिए और सिर को कार से 21 किलोमीटर दूर फेंक आया।
यह सनसनीखेज वारदात Lucknow के Ashiyana इलाके में हुई, जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है।

डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता, होटल खोलना चाहता था बेटा
पुलिस पूछताछ में आरोपी अक्षत ने बताया कि उसके पिता चाहते थे कि वह NEET परीक्षा पास कर MBBS करे और पारिवारिक पैथोलॉजी व्यवसाय को आगे बढ़ाए। लेकिन अक्षत बीकॉम का छात्र है और वह होटल या रेस्टोरेंट खोलने का सपना देखता था।
बताया जा रहा है कि मृतक मानवेंद्र सिंह की प्रदेश में कुल 18 पैथोलॉजी लैब थीं, जिनमें काकोरी स्थित वर्धमान पैथोलॉजी प्रमुख है। इसी वजह से वह बेटे को मेडिकल क्षेत्र में स्थापित देखना चाहते थे।
20 फरवरी की सुबह इसी मुद्दे को लेकर पिता-पुत्र के बीच तीखी बहस हुई। आरोप है कि गुस्से में आकर अक्षत ने पिता की लाइसेंसी राइफल से गोली मार दी।

बहन के सामने वारदात, दी जान से मारने की धमकी
घटना के समय घर में 17 वर्षीय बहन भी मौजूद थी। आरोपी ने उसे धमकाया कि अगर किसी को बताया तो उसे भी जान से मार देगा। इसके बाद बहन को घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, गोली सुबह करीब 4:30 बजे चलाई गई। उस समय मानवेंद्र अपने कमरे में लेटे हुए थे।
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शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाया
हत्या के बाद आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। वह बाजार से आरी खरीदकर लाया और शव के कई टुकड़े किए। सिर और कुछ अंगों को कार में रखकर काकोरी क्षेत्र के सदरौना गांव में फेंक आया। बाकी धड़ को पॉलीथिन में लपेटकर नीले ड्रम में भर दिया।
पुलिस के मुताबिक, डेडबॉडी चार दिन तक घर में पड़ी रही, जिससे तेज दुर्गंध फैलने लगी थी। दुर्गंध छिपाने के लिए आरोपी ने रूम स्प्रे और तारपीन तेल का इस्तेमाल किया।

तीन दिन बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट
हत्या के तीन दिन बाद आरोपी खुद आशियाना कोतवाली पहुंचा और पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई। उसने पुलिस को बताया कि उसके पिता 20 फरवरी की सुबह दिल्ली जाने की बात कहकर निकले थे और लौटकर नहीं आए।
जब पुलिस ने पूछताछ की तो उसके हावभाव संदिग्ध लगे। सख्ती से पूछने पर पहले उसने आत्महत्या की कहानी गढ़ी, लेकिन अंततः हत्या की बात कबूल कर ली।
राइफल गद्दे के नीचे छिपाई
पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घर से लाइसेंसी राइफल बरामद की, जिसे गद्दे के नीचे छिपाया गया था। घर से नीला ड्रम भी बरामद किया गया, जिसमें मानवेंद्र का धड़ पैक मिला। हालांकि सिर बरामद नहीं हो सका है।

33 मिनट का सीन री-क्रिएशन
पुलिस आरोपी को घर लेकर पहुंची और करीब 33 मिनट तक सीन री-क्रिएशन कराया। फॉरेंसिक टीम ने रात 2 बजे तक जांच की। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया, जिसकी निगरानी पांच डॉक्टरों की टीम कर रही है।
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परिवार और पड़ोसियों में शोक
मानवेंद्र मूल रूप से जालौन जिले के रहने वाले थे। उनके पिता सुरेंद्र पाल सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस से सेवानिवृत्त हैं। घटना की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य जालौन से लखनऊ पहुंचे।
पड़ोसियों के अनुसार, मानवेंद्र मिलनसार स्वभाव के थे और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहते थे। वहीं अक्षत रिजर्व स्वभाव का था और मोहल्ले में ज्यादा घुलता-मिलता नहीं था।
चार साल पहले भी वह घर से भाग गया था और एक पत्र छोड़ गया था, जिसमें उसने MBBS न करने की इच्छा जताई थी।

मनोवैज्ञानिक पहलू
विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक दबाव, करियर को लेकर मतभेद और संवाद की कमी ऐसी घटनाओं को जन्म दे सकती है। हालांकि किसी भी परिस्थिति में हिंसा का रास्ता स्वीकार्य नहीं है।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पारिवारिक संबंधों में बढ़ती दूरी और संवादहीनता का भी उदाहरण बन गया है।
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पुलिस की आगे की कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। सिर की तलाश जारी है। फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आशियाना थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है।

निष्कर्ष:
लखनऊ के आशियाना क्षेत्र में हुआ यह हत्याकांड केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पारिवारिक मतभेद की भयावह परिणति है। पिता अपने बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते थे, जबकि बेटा अलग राह चुनना चाहता था। संवाद की जगह हिंसा ने ले ली और एक परिवार बिखर गया।
यह घटना समाज के लिए चेतावनी है कि करियर और भविष्य को लेकर दबाव की बजाय संवाद और समझदारी जरूरी है।

