उत्तर प्रदेश: के विकास इतिहास में 15 जून 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। वर्षों के इंतजार के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से पहली कमर्शियल फ्लाइट ने उड़ान भरी और प्रदेश को एक नई पहचान दी। इस ऐतिहासिक अवसर को और खास बनाने के लिए उन किसानों को भी विमान यात्रा कराई गई, जिन्होंने एयरपोर्ट निर्माण के लिए अपनी जमीन दी थी।
इंडिगो की पहली फ्लाइट लखनऊ से जेवर एयरपोर्ट पहुंची, जहां वाटर कैनन सलामी देकर उसका स्वागत किया गया। इसके बाद 161 यात्रियों के साथ फ्लाइट बेंगलुरु के लिए रवाना हुई। वहीं दूसरी विशेष उड़ान में 170 किसान, जिनमें 20 महिला किसान शामिल थीं, नोएडा से लखनऊ पहुंचे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की।
‘जिस जमीन पर खेती होती थी, आज वहीं से उड़ान भरी’
लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान डॉक्टर हेरा राशिद ने भावुक होते हुए कहा कि जिस भूमि पर उनके पिता खेती करते थे, आज उसी भूमि से उड़ान भरकर वह मुख्यमंत्री से मिलने आई हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विकास और बेहतर शिक्षा सुविधाओं के कारण ही वह बिना कोचिंग के नीट परीक्षा पास कर सकीं।
डॉ. राशिद ने मुख्यमंत्री से कहा, “मैं चाहती हूं कि आप भविष्य में प्रधानमंत्री बनें।” उनके इस बयान पर सभागार में मौजूद लोगों ने तालियों से स्वागत किया।
पहली बार फ्लाइट में बैठे किसान
किसानों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। किसान रीता ने बताया कि उन्होंने एयरपोर्ट निर्माण के लिए चार बीघा जमीन दी थी और पहली बार हवाई जहाज में बैठीं। उन्होंने कहा कि सात घंटे का सफर महज एक घंटे में पूरा हो गया।
व्हीलचेयर पर पहुंचीं किसान कमलेश ने कहा कि विमान यात्रा उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रही। वहीं किसान शमे मोहम्मद ने कहा कि कई मुख्यमंत्री आए और गए, लेकिन किसानों को विमान में बैठाकर सम्मान देने का काम पहली बार हुआ है।
योगी बोले- किसानों के भरोसे बना इतिहास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जेवर एयरपोर्ट का सपना किसानों के सहयोग और विश्वास से पूरा हुआ है। उन्होंने याद किया कि शुरुआत में किसान जमीन देने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन संवाद और विश्वास के बाद परियोजना आगे बढ़ी।
योगी ने कहा कि यह एयरपोर्ट सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास का नया द्वार है। उन्होंने किसानों को धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रदेश और देश का एविएशन सेक्टर आज एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है।

भारत का पहला कार्गो और MRO हब बनेगा जेवर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट भविष्य में भारत का पहला बड़ा कार्गो और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) केंद्र बनेगा। इससे किसानों को अपनी उपज अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जहां स्थानीय बाजार में आम 50 रुपये किलो बिकता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। इससे किसानों की आय कई गुना बढ़ेगी।
एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की ओर
28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए इस एयरपोर्ट के पहले चरण का निर्माण पूरा हो चुका है। लगभग 3300 एकड़ भूमि पर बने इस प्रोजेक्ट पर करीब 11 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
चार चरणों में विकसित होने वाला यह एयरपोर्ट पूरा होने पर एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठा सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। यहां से प्रतिवर्ष लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों के यात्रा करने की क्षमता विकसित की गई है।
नई उड़ानों की शुरुआत
सोमवार से हैदराबाद और अमृतसर के लिए भी सेवाएं शुरू हो गईं। 16 जून से इंडिगो बेंगलुरु और जम्मू के लिए नियमित उड़ानें संचालित करेगी, जबकि अकासा एयर बेंगलुरु और नवी मुंबई के लिए सेवा शुरू करेगी। आने वाले समय में श्रीनगर, जयपुर, जोधपुर, धर्मशाला, भोपाल, चंडीगढ़, किशनगढ़ और देहरादून के लिए भी उड़ानें शुरू होंगी।
निष्कर्ष
जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर और विकास की नई उड़ान का प्रतीक बन चुका है। पहली उड़ान के साथ किसानों का सम्मान और उनकी भागीदारी यह संदेश देती है कि विकास तभी सार्थक है, जब उसमें आम जनता की साझेदारी हो। आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट प्रदेश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और वैश्विक कनेक्टिविटी का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।

