रांची: झारखंड में इन दिनों सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर हैं। राजधानी रांची से शुरू हुआ आंदोलन अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन चुका है। इसकी वजह है 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 के परिणाम के बाद सामने आए कथित अनियमितताओं के आरोप। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और इसी कारण परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
हालांकि पूरे मामले की जांच राज्य सरकार ने अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंप दी है, लेकिन आंदोलनकारी छात्र सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
क्या है JPSC?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) का गठन राज्य गठन के बाद 15 नवंबर 2000 को संविधान के अनुच्छेद-315 के तहत किया गया था। आयोग का मुख्य कार्य राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में ग्रुप-ए और ग्रुप-बी अधिकारियों की भर्ती करना है। इसके अलावा आयोग भर्ती, पदोन्नति और सेवा संबंधी मामलों में सरकार को सलाह भी देता है।
हाल ही में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने विवादों के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद आयोग का अध्यक्ष पद रिक्त हो गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब JPSC ने 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया। आयोग ने 103 रिक्त पदों के लिए 2,204 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया।
रिजल्ट आते ही कई अभ्यर्थियों ने आयोग से श्रेणीवार कट-ऑफ जारी करने की मांग की। छात्रों का आरोप था कि आयोग ने चयन सूची तो जारी कर दी, लेकिन कट-ऑफ सार्वजनिक नहीं किया। इसके अलावा मेरिट सूची पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए गए।
इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ कथित ओएमआर शीट वायरल हुईं। दावा किया गया कि कुछ अभ्यर्थियों ने अपेक्षाकृत कम प्रश्न हल करने के बावजूद मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई कर लिया। हालांकि इन वायरल दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं दावों ने छात्रों के बीच असंतोष को और बढ़ा दिया।

कैसे बढ़ा आंदोलन?
शुरुआत में कुछ अभ्यर्थियों ने JPSC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। धीरे-धीरे यह विरोध प्रदर्शन राजधानी रांची के मोराबादी, अल्बर्ट एक्का चौक और जयपाल सिंह स्टेडियम तक पहुंच गया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं बल्कि वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं के खिलाफ युवाओं का गुस्सा है।
छात्रों की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं—
- 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए।
- निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित हो।
- पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए।
- JPSC और JSSC भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं।
- परीक्षा कराने वाली एजेंसी से जुड़ी सभी परीक्षाओं की समीक्षा हो।
- दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
- भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार ने जांच CID को सौंप दी। विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया और जांच शुरू हुई।
जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक, परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारी और संबंधित एजेंसी के कर्मचारी शामिल हैं।
CID ने सफल घोषित अभ्यर्थियों से भी जांच में सहयोग करने की अपील की है। आयोग ने उनसे ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने को कहा है ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा सके।
जेपीएससी ने क्या फैसला लिया?
विवाद बढ़ने के बाद JPSC ने बड़ा फैसला लेते हुए मुख्य परीक्षा सहित नौ भर्ती परीक्षाओं को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया।
आयोग ने कहा कि सरकार के निर्देश और परीक्षा संचालन से जुड़े विवादों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। नई परीक्षा तिथि बाद में घोषित की जाएगी।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला
मामला अब झारखंड हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। याचिकाओं में मॉडल उत्तर कुंजी, कट-ऑफ और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी है, लेकिन आयोग को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
क्या पहली बार विवाद हुआ है?
विशेषज्ञों के अनुसार JPSC की यह पहली विवादित परीक्षा नहीं है। राज्य गठन के बाद कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर उत्तर कुंजी, इंटरव्यू अंक, आरक्षण और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं। पहले और दूसरे JPSC परीक्षा विवाद की जांच भी लंबे समय से चल रही है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
छात्र आंदोलन के बीच राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए हैं। भाजपा ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है और सरकार से जवाब मांगा है। वहीं विभिन्न विपक्षी नेताओं ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जरूरत बताई है।
दूसरी ओर कुछ सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों ने आंदोलन को समर्थन दिया है। हालांकि सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
JPSC विवाद अब केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। यह झारखंड में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, युवाओं के भरोसे और सरकारी चयन प्रणाली की विश्वसनीयता का बड़ा सवाल बन चुका है। जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई कर रही हैं, जबकि छात्र निष्पक्ष जांच और ठोस सुधार की मांग पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और न्यायालय की सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।

