नई दिल्ली / असम। भारतीय वायुसेना का एक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान सुखोई Su-30MKI असम में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा उस समय हुआ जब फाइटर जेट नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान अचानक रडार से गायब हो गया। कुछ देर बाद जानकारी मिली कि विमान असम के कार्बी आंगलोंग जिले के पहाड़ी क्षेत्र में क्रैश हो गया है। इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार दोनों पायलटों—स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरागकर—की मौत हो गई।
भारतीय वायुसेना ने गुरुवार देर रात 1 बजकर 9 मिनट पर इस दुर्घटना की आधिकारिक पुष्टि की। इसके बाद शुक्रवार सुबह करीब 9 बजकर 14 मिनट पर जारी एक और आधिकारिक बयान में दोनों पायलटों के निधन की जानकारी दी गई। हादसे के बाद सेना और वायुसेना की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर तलाशी अभियान में जुट गई है।
ट्रेनिंग मिशन के दौरान अचानक टूटा संपर्क
वायुसेना के अनुसार यह फाइटर जेट नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था। उड़ान के दौरान अचानक विमान का ग्राउंड कंट्रोल से संपर्क टूट गया। जब रडार से भी विमान का सिग्नल गायब हो गया तो वायुसेना ने तुरंत अलर्ट जारी किया।
इसके बाद खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि विमान असम के कार्बी आंगलोंग जिले के पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह क्षेत्र जोरहाट से करीब 60 किलोमीटर दूर है। इलाके की भौगोलिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होने के कारण तलाशी अभियान में काफी मुश्किलें आ रही हैं।
दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि
वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार विमान में सवार दोनों पायलट—स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरागकर—इस दुर्घटना में शहीद हो गए।
दोनों पायलट भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारी माने जाते थे और कई महत्वपूर्ण प्रशिक्षण तथा ऑपरेशनल मिशनों का हिस्सा रह चुके थे।
वायुसेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह देश के लिए बड़ी क्षति है और दोनों अधिकारियों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई है।

हादसे की जांच के आदेश
इस दुर्घटना के बाद भारतीय वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दे दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि विमान के साथ संपर्क टूटने और दुर्घटना की असली वजह क्या थी।
प्रारंभिक अनुमान में तकनीकी खराबी, मौसम की स्थिति या किसी अन्य कारण की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। हालांकि आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
वायुसेना की विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंचकर ब्लैक बॉक्स और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
सुखोई Su-30MKI: भारत का सबसे ताकतवर फाइटर जेट
सुखोई Su-30MKI भारतीय वायुसेना के सबसे आधुनिक और शक्तिशाली लड़ाकू विमानों में से एक है। यह रूस के सुखोई डिजाइन पर आधारित एक दो इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे भारत में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा बनाया और असेंबल किया जाता है।
यह विमान अपनी लंबी दूरी की क्षमता, तेज गति और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली के कारण भारतीय वायुसेना की ताकत का प्रमुख हिस्सा माना जाता है।

Su-30MKI की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
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दो इंजन वाला शक्तिशाली लड़ाकू विमान
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लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता
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हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन
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अत्याधुनिक रडार और हथियार प्रणाली
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30 मिमी की तोप और कई मिसाइलें ले जाने की क्षमता
यह विमान भारत की वायु रक्षा प्रणाली में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सीमाओं की सुरक्षा में लगातार तैनात रहता है।
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पिछले 12 वर्षों में कई बार हो चुके हैं हादसे
हालांकि Su-30MKI को बेहद भरोसेमंद फाइटर जेट माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसके साथ कुछ दुर्घटनाएं भी हुई हैं। पिछले 12 वर्षों में लगभग 8 बार इस विमान से जुड़े हादसे सामने आए हैं।
4 जून 2024 – नासिक, महाराष्ट्र
ट्रेनिंग उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी आने पर विमान खेत में गिर गया। दोनों पायलट समय रहते इजेक्ट कर सुरक्षित बच गए।

28 जनवरी 2023 – मध्य प्रदेश
ग्वालियर से उड़ान भरने के बाद Su-30MKI और Mirage-2000 हवा में टकरा गए। Su-30 के पायलट सुरक्षित रहे, लेकिन Mirage के पायलट की मौत हो गई।

8 अगस्त 2019 – तेजपुर, असम
उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद विमान में तकनीकी समस्या आ गई। दोनों पायलटों ने इजेक्ट कर अपनी जान बचा ली।

27 जून 2018 – नासिक
HAL के टेस्ट पायलटों द्वारा की जा रही परीक्षण उड़ान के दौरान विमान क्रैश हो गया, लेकिन दोनों पायलट सुरक्षित रहे।

23 मई 2017 – अरुणाचल प्रदेश सीमा
तेजपुर एयरबेस से उड़ान के बाद विमान से संपर्क टूट गया। बाद में पहाड़ी इलाके में मलबा मिला और दोनों पायलटों की मौत हो गई।

15 मार्च 2017 – बाड़मेर, राजस्थान
ट्रेनिंग मिशन के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दोनों पायलट सुरक्षित निकल आए, लेकिन जमीन पर मौजूद तीन लोग घायल हो गए।

14 अक्टूबर 2014 – पुणे
ट्रेनिंग उड़ान के दौरान विमान क्रैश हुआ, लेकिन पायलट समय रहते इजेक्ट कर सुरक्षित बच गए।

19 मई 2015 – तेजपुर
तकनीकी खराबी के कारण विमान को छोड़ना पड़ा, हालांकि दोनों पायलट सुरक्षित रहे।

विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक फाइटर जेट अत्यंत जटिल तकनीक से बने होते हैं और इनमें हजारों सिस्टम एक साथ काम करते हैं। ऐसे में कभी-कभी तकनीकी खराबी या अन्य कारणों से दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
हालांकि हर हादसे के बाद जांच के आधार पर सुरक्षा मानकों में सुधार किए जाते हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

देशभर में शोक
इस दुर्घटना की खबर सामने आने के बाद देशभर में शोक की लहर है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने दोनों पायलटों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
भारतीय वायुसेना ने भी अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि दोनों अधिकारी राष्ट्र की सेवा करते हुए शहीद हुए हैं और उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
निष्कर्ष:
असम में हुए इस दुखद विमान हादसे ने एक बार फिर देश को झकझोर दिया है। भारतीय वायुसेना के दो बहादुर पायलटों की मौत से रक्षा बलों और पूरे देश में शोक का माहौल है। अब सभी की नजर वायुसेना की जांच रिपोर्ट पर है, जिससे इस दुर्घटना के वास्तविक कारण सामने आ सकेंगे। उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

