नीदरलैंड: के द हेग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारतीय समुदाय ने जोरदार स्वागत किया। करीब 9 साल बाद नीदरलैंड पहुंचे पीएम मोदी ने प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए कहा कि यहां का माहौल देखकर उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वे भारत के किसी बड़े उत्सव में शामिल हों। कार्यक्रम में मौजूद भारतीय मूल के लोगों ने “मोदी-मोदी” के नारों से पूरा माहौल उत्साह से भर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड के दौरे पर हैं। इस यात्रा को भारत और नीदरलैंड के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। दौरे के दौरान व्यापार, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, वाटर मैनेजमेंट, कृषि तकनीक और रक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण चर्चाएं होंगी।
द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां अपनी संस्कृति, परंपरा और मेहनत से भारत की पहचान को मजबूत करते हैं। उन्होंने प्रवासी भारतीयों की तारीफ करते हुए कहा कि वे भारत और दुनिया के बीच मजबूत पुल का काम कर रहे हैं।
पीएम मोदी के स्वागत के लिए कार्यक्रम स्थल पर भारतीय कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक नृत्य और संगीत ने भारतीय संस्कृति की झलक पेश की। इस दौरान भारतीय मूल के एक युवक ने पीएम मोदी को अयोध्या के राम मंदिर की पेंटिंग भेंट की, जिसे देखकर प्रधानमंत्री काफी भावुक नजर आए।

इस दौरे का सबसे बड़ा फोकस सेमीकंडक्टर और हाई-टेक इंडस्ट्री को माना जा रहा है। भारत इस समय अपनी चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में नीदरलैंड की मशहूर कंपनी ASML के साथ साझेदारी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ASML दुनिया की सबसे बड़ी चिप मशीन बनाने वाली कंपनियों में शामिल है और उसकी तकनीक वैश्विक सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में बेहद अहम मानी जाती है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत चाहता है कि भविष्य में चिप निर्माण और तकनीकी विकास के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत हो। इससे भारत को टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़ी बढ़त मिल सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच व्यापारिक निवेश, ग्रीन हाइड्रोजन, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा पीएम मोदी नीदरलैंड के राजा विलेम अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से भी मुलाकात करेंगे।
दौरे की सबसे भावुक और ऐतिहासिक घटना तब सामने आई जब नीदरलैंड ने 11वीं सदी की ऐतिहासिक “अनाइमंगलम कॉपर प्लेट्स” भारत को लौटाने का फैसला किया। इन तांबे की पट्टिकाओं को “लीडेन प्लेट्स” के नाम से भी जाना जाता है। ये चोल साम्राज्य के राजा राजा चोल प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल से जुड़ी मानी जाती हैं।
इतिहासकारों के अनुसार, इन पट्टिकाओं में दक्षिण भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच समुद्री व्यापार, सांस्कृतिक संबंध और धार्मिक सहअस्तित्व से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं। 18वीं सदी में डच अधिकारियों द्वारा इन्हें भारत से नीदरलैंड ले जाया गया था। भारत कई वर्षों से इनकी वापसी की मांग कर रहा था।
नीदरलैंड सरकार की स्वतंत्र समिति और लीडेन यूनिवर्सिटी के शोध के बाद यह तय किया गया कि इन ऐतिहासिक धरोहरों को भारत लौटाया जाना चाहिए। इस फैसले को भारत-नीदरलैंड संबंधों में सांस्कृतिक विश्वास और सहयोग की बड़ी मिसाल माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा केवल एक सामान्य विदेश यात्रा नहीं, बल्कि यूरोप में भारत की नई रणनीतिक नीति का अहम हिस्सा है। रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन संकट के बाद भारत यूरोप के देशों के साथ आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को तेजी से मजबूत कर रहा है।
नीदरलैंड यूरोप का बड़ा व्यापारिक केंद्र माना जाता है। रॉटरडैम पोर्ट के जरिए पूरे यूरोप में व्यापार पहुंचता है। ऐसे में भारत के लिए नीदरलैंड का रणनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है। माना जा रहा है कि यह दौरा आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकता है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नीदरलैंड दौरा केवल कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रवासी भारतीयों के उत्साह, सेमीकंडक्टर साझेदारी और चोल काल की धरोहरों की वापसी ने इस दौरे को ऐतिहासिक बना दिया है।

