अमेरिका: और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दुनिया को जल्द बड़ी राहत मिल सकती है। नई दिल्ली दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने रविवार को संकेत दिया कि अगले कुछ घंटों में ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर “गुड न्यूज” सामने आ सकती है। उनके बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक बाजारों में हलचल तेज हो गई है।a
रूबियो ने यह भी संकेत दिया कि लंबे समय से तनाव का केंद्र बने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
क्या बोले मार्को रूबियो?
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मार्को रूबियो ने कहा,
“मुझे लगता है कि अगले कुछ घंटों में दुनिया को अच्छी खबर मिल सकती है।”
उन्होंने बताया कि अमेरिका, ईरान और कई अन्य देशों के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। प्रस्तावित समझौते के तहत मौजूदा संघर्ष-विराम (सीजफायर) को 60 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।
रूबियो के मुताबिक इस समझौते का सबसे बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना होगा, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति सामान्य हो सकेगी।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे व्यस्त तेल व्यापार मार्गों में शामिल है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद फरवरी से यह मार्ग काफी हद तक प्रभावित रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सीमित हो गई थी।

ट्रंप के बयान के बाद बढ़ी हलचल
रूबियो का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान के कुछ घंटों बाद आया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि वॉशिंगटन 60 दिनों के संघर्ष-विराम को आगे बढ़ाने के बेहद करीब है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “Truth Social” पर लिखा था कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द बड़ा समझौता हो सकता है।
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अटकलें तेज हो गई थीं कि अमेरिका और ईरान के बीच बैकडोर डिप्लोमेसी सफल हो सकती है।
ईरान की क्या हैं मांगें?
सूत्रों के अनुसार ईरान ने समझौते के लिए कुछ अहम शर्तें रखी हैं। इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, विदेशी बैंकों में फंसी ईरानी संपत्तियों को जारी करना और तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत शामिल है।
ईरान चाहता है कि उसे वैश्विक बाजार में दोबारा खुलकर तेल बेचने की अनुमति मिले। बदले में वह होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमत हो सकता है।
हालांकि अभी तक किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। भारत की बड़ी ऊर्जा जरूरतें खाड़ी देशों से पूरी होती हैं। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से भारत को भी बड़ी राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाता है तो तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
दुनिया की नजरें अगले ऐलान पर
अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम का इंतजार कर रहा है। यदि 60 दिनों का संघर्ष-विराम लागू होता है तो यह पश्चिम एशिया में लंबे समय बाद बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते से न सिर्फ युद्ध का खतरा कम होगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी।
निष्कर्ष:
भारत दौरे पर आए मार्को रूबियो के बयान ने दुनिया भर में उम्मीद जगा दी है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य खुलता है, तो यह वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

