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Home - दिल्ली - धर्म के नाम पर विदेशी फंडिंग पर बड़ा प्रहार! MHA का नया FCRA नियम लागू, अब हर रुपये का देना होगा हिसाब

धर्म के नाम पर विदेशी फंडिंग पर बड़ा प्रहार! MHA का नया FCRA नियम लागू, अब हर रुपये का देना होगा हिसाब

Rajat Kumar
Last updated: 2026/06/23 at 6:17 PM
Rajat Kumar
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4 Min Read
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धर्म के नाम पर विदेशी फंडिंग पर केंद्र का बड़ा एक्शन, MHA ने लागू किए नए FCRA नियम

भारत: में विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाली धार्मिक, सामाजिक और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 (FCRA Amendment Rules 2026) लागू कर दिए हैं। इन नए नियमों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नियंत्रित बनाना बताया जा रहा है।

Contents
धर्म के नाम पर विदेशी फंडिंग पर केंद्र का बड़ा एक्शन, MHA ने लागू किए नए FCRA नियमकिन गतिविधियों को मिलेगी अनुमति?धर्मांतरण पर स्पष्ट प्रतिबंध‘की फंक्शनरी’ की नई परिभाषापंजीकरण के समय बताना होगा उद्देश्य और कार्यक्षेत्रविदेशी नागरिकों पर बढ़ी सख्ती75% फंड खर्च करना होगा जरूरीसोशल मीडिया और वेबसाइट की जानकारी देना अनिवार्यशुल्क संरचना में भी बदलावक्यों महत्वपूर्ण हैं ये बदलाव?निष्कर्ष

नए नियमों के तहत धार्मिक संस्थाओं की गतिविधियों को पहली बार विस्तार से परिभाषित किया गया है। इसके साथ ही विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले संगठनों पर निगरानी और रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियां भी बढ़ा दी गई हैं।

किन गतिविधियों को मिलेगी अनुमति?

गृह मंत्रालय द्वारा जारी नई अनुसूची में धार्मिक गतिविधियों की विस्तृत सूची शामिल की गई है। इसके अनुसार मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, मठ, सिनेगॉग और अन्य धार्मिक स्थलों के निर्माण, मरम्मत, नवीनीकरण और रखरखाव को वैध धार्मिक गतिविधि माना जाएगा।

इसके अलावा धार्मिक ग्रंथों के संरक्षण, अनुवाद, प्रकाशन और डिजिटलीकरण जैसी गतिविधियों को भी विदेशी फंडिंग के दायरे में अनुमति दी गई है। धार्मिक दर्शन, इतिहास और संस्कृति के अध्ययन से जुड़े संस्थानों को भी सहायता मिल सकेगी।

सरकार ने तीर्थयात्रियों के लिए पेयजल, विश्राम स्थल, धर्मशाला, लंगर, अन्नदान और सामुदायिक रसोई जैसी सेवाओं को भी धार्मिक गतिविधियों की श्रेणी में रखा है।

धर्मांतरण पर स्पष्ट प्रतिबंध

नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि धर्मांतरण (Conversion) से जुड़ी किसी भी गतिविधि को विदेशी फंडिंग के माध्यम से संचालित करने की अनुमति नहीं होगी।

हालांकि धार्मिक शिक्षा, प्रवचन, ध्यान शिविर, भक्ति संगीत, आध्यात्मिक कार्यक्रम, नैतिक शिक्षा और आदिवासी आस्था परंपराओं के संरक्षण को अनुमति दी गई है, लेकिन धर्म परिवर्तन से संबंधित कार्यों पर सख्त रोक लगाने का प्रावधान किया गया है।

‘की फंक्शनरी’ की नई परिभाषा

संशोधित नियमों में “Key Functionary” शब्द को पहली बार स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।

अब किसी संस्था के ट्रस्टी, निदेशक, साझेदार, अध्यक्ष, सचिव, HUF के कर्ता और संगठन के संचालन से जुड़े अन्य प्रमुख व्यक्तियों को भी कानूनी जवाबदेही के दायरे में रखा जाएगा। इससे संस्थाओं के शीर्ष पदाधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ेगी।

पंजीकरण के समय बताना होगा उद्देश्य और कार्यक्षेत्र

अब FCRA पंजीकरण प्राप्त करने वाले संगठनों को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वे किस उद्देश्य के लिए विदेशी फंड प्राप्त कर रहे हैं और किन राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों में कार्य करेंगे।

सरकार ने पहले से पंजीकृत संस्थाओं को भी अपने उद्देश्य और कार्यक्षेत्र का विवरण अपडेट करने के लिए एक वर्ष का समय दिया है।

विदेशी नागरिकों पर बढ़ी सख्ती

नए नियमों के अनुसार यदि किसी संगठन के प्रमुख पदों पर भारतीय मूल के अलावा अन्य विदेशी नागरिक हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में ऐसे संगठन को FCRA पंजीकरण नहीं दिया जाएगा।

हालांकि राष्ट्रीय हित या विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार को छूट देने का अधिकार रहेगा।

75% फंड खर्च करना होगा जरूरी

विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों को अब अगली किस्त प्राप्त करने से पहले पहले मिले फंड का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग करना होगा।

सरकार का मानना है कि इससे फंड जमा करके रखने या उसके दुरुपयोग की संभावना कम होगी और परियोजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।

सोशल मीडिया और वेबसाइट की जानकारी देना अनिवार्य

पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से अब सभी NGOs और संस्थाओं को अपने सोशल मीडिया अकाउंट, वेबसाइट, प्रकाशन, पत्रिकाओं और अन्य सार्वजनिक सामग्री की जानकारी भी सरकार को देनी होगी।

इस कदम को डिजिटल निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शुल्क संरचना में भी बदलाव

सरकार ने पंजीकरण और नवीनीकरण शुल्क में भी संशोधन किया है। एक से अधिक राज्यों में कार्य करने वाले या कई उद्देश्यों के लिए पंजीकरण कराने वाले संगठनों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये बदलाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों के जरिए सरकार विदेशी फंडिंग के उपयोग को अधिक पारदर्शी बनाना चाहती है। पिछले कुछ वर्षों में विदेशी चंदे के उपयोग और उसके प्रभाव को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं।

इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने गतिविधियों का स्पष्ट वर्गीकरण, जवाबदेही और निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है।


निष्कर्ष

FCRA संशोधन नियम 2026 विदेशी फंडिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। धार्मिक संस्थाओं से लेकर NGOs तक सभी को अब अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों के तहत काम करना होगा। सरकार का दावा है कि इससे विदेशी चंदे के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी, जबकि आलोचक इसे निगरानी बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं। आने वाले समय में इन नियमों का प्रभाव देशभर की हजारों संस्थाओं पर दिखाई देगा।

TAGGED: FCRA Amendment 2026, FCRA Rules 2026, Foreign Contribution Regulation Act, Foreign Funding Rules India, Home Ministry Rules, MHA New Guidelines, NGO Foreign Funds, Religious Organizations FCRA
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